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महिला अस्पताल में एनआईसीयू न होना बना नवजात की मौत का कारण
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अल्मोड़ा का महिला चिकित्सालय
- फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा। महिला अस्पताल में नवजात शिशुओं के लिए एनआईसीयू का न होना एक नवजात की मौत का कारण बन गया। अस्पताल की ही एक महिला स्वास्थ्य कर्मी के नवजात को एनआईसीयू न होने के कारण हायर सेंटर रेफर करना पड़ा लेकिन उसने हायर सेंटर पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया।
जिला मुख्यालय में स्थित महिला अस्पताल में पूरे जिले से गर्भवती महिलाएं इलाज के लिए पहुंचती हैं। प्रसव के कई मामलों में बच्चे समय से पहले पैदा हो जाते हैं या उनमें कुछ और स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं या फिर मुश्किल से उनका जन्म होता है। ऐसे बच्चों की देखभाल, इलाज के लिए नवजात गहन देखभाल इकाई (एनआईसीयू) की आवश्यकता होती है लेकिन महिला अस्पताल में एनआईसीयू नहीं है। बुधवार देर रात गर्भवती महिला स्वास्थ्य कर्मी ने एक शिशु को जन्म दिया। शिशु को स्वास्थ्य संबंधी कुछ परेशानी थी जिसके लिए उसे एनआईसीयू की आवश्यकता थी लेकिन अस्पताल में एनआईसीयू न होने के कारण शिशु को हायर सेंटर हल्द्वानी के लिए रेफर कर दिया गया। नवजात ने हायर सेंटर पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया। इससे दुखी अस्पताल प्रबंधन का भी कहना है कि इस नवजातों की देखभाल के लिए अस्पताल में एनआईसीयू का होना जरूरी है।
अस्पताल से दो माह में पांच नवजात किए रेफर
अल्मोड़ा। महिला अस्पताल में रोजाना कई महिलाओं का प्रसव होता है। पिछले दो माह में अस्पताल में जन्म लेने वाले पांच नवजातों को रेफर किया गया। बुधवार को एक नवजात की मौत हो गई। संवाद
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चार माह में 236 बच्चों ने लिया जन्म
अल्मोड़ा। एक फरवरी से 25 मई तक अस्पताल में 236 बच्चों ने जन्म लिया। मई में ही अस्पताल में 62 बच्चों ने जन्म लिया है। अगर इनमें से प्रिमेच्योर बच्चों की संख्या अधिक होती तो एनआईसीयू न होने से अधिक बच्चों की जान को खतरा हो सकता था। संवाद
मेडिकल कॉलेज में भी संचालित नहीं है एनआईसीयू
अल्मोड़ा। जिला मुख्यालय में मेडिकल कॉलेज की स्थापना के बाद उम्मीद जगी थी कि यहां की स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार होगा। मेडिकल कॉलेज के मानकों के अनुसार कॉलेज में एनआईसीयू होना चाहिए लेकिन यहां एनआईसीयू होने के बाद भी स्टाफ और संसाधनों के अभाव में उसका संचालन नहीं हो पा रहा है। संवाद
महिला अस्पताल में एनआईसीयू खोलने में परेशानी
अल्मोड़ा। महिला अस्पताल में भी एनआईसीयू खोलने में कई तरह की परेशानी है। यहां पर एनआईसीयू खोलने के लिए अस्पताल परिसर में जगह नहीं है और न ही अस्पताल प्रशासन के पास कहीं और जमीन है। एनआईसीयू चलाने के लिए यहां प्रशिक्षित डॉक्टर और स्टाफ भी नहीं है जिस कारण यहां एनआईसीयू नहीं खुल पा रहा है।
बुधवार को एक महिला स्वास्थ्य कर्मी ने शिशु को जन्म दिया। स्वास्थ्य संबंधी कुछ दिक्कतों के कारण नवजात को एनआईसीयू की जरूरत पड़ी लेकिन अस्पताल में एनआईसीयू न होने से उसको हायर सेंटर रेफर करना पड़ा। हायर सेंटर पहुंचने से पहले ही उसने दम तोड़ दिया। अस्पताल में एनआईसीयू संचालन के लिए जगह और स्टाफ का अभाव है।
- डॉ. प्रीति पंत, पीएमएस महिला अस्पताल अल्मोड़ा।
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जिला मुख्यालय में स्थित महिला अस्पताल में पूरे जिले से गर्भवती महिलाएं इलाज के लिए पहुंचती हैं। प्रसव के कई मामलों में बच्चे समय से पहले पैदा हो जाते हैं या उनमें कुछ और स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं या फिर मुश्किल से उनका जन्म होता है। ऐसे बच्चों की देखभाल, इलाज के लिए नवजात गहन देखभाल इकाई (एनआईसीयू) की आवश्यकता होती है लेकिन महिला अस्पताल में एनआईसीयू नहीं है। बुधवार देर रात गर्भवती महिला स्वास्थ्य कर्मी ने एक शिशु को जन्म दिया। शिशु को स्वास्थ्य संबंधी कुछ परेशानी थी जिसके लिए उसे एनआईसीयू की आवश्यकता थी लेकिन अस्पताल में एनआईसीयू न होने के कारण शिशु को हायर सेंटर हल्द्वानी के लिए रेफर कर दिया गया। नवजात ने हायर सेंटर पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया। इससे दुखी अस्पताल प्रबंधन का भी कहना है कि इस नवजातों की देखभाल के लिए अस्पताल में एनआईसीयू का होना जरूरी है।
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अस्पताल से दो माह में पांच नवजात किए रेफर
अल्मोड़ा। महिला अस्पताल में रोजाना कई महिलाओं का प्रसव होता है। पिछले दो माह में अस्पताल में जन्म लेने वाले पांच नवजातों को रेफर किया गया। बुधवार को एक नवजात की मौत हो गई। संवाद
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चार माह में 236 बच्चों ने लिया जन्म
अल्मोड़ा। एक फरवरी से 25 मई तक अस्पताल में 236 बच्चों ने जन्म लिया। मई में ही अस्पताल में 62 बच्चों ने जन्म लिया है। अगर इनमें से प्रिमेच्योर बच्चों की संख्या अधिक होती तो एनआईसीयू न होने से अधिक बच्चों की जान को खतरा हो सकता था। संवाद
मेडिकल कॉलेज में भी संचालित नहीं है एनआईसीयू
अल्मोड़ा। जिला मुख्यालय में मेडिकल कॉलेज की स्थापना के बाद उम्मीद जगी थी कि यहां की स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार होगा। मेडिकल कॉलेज के मानकों के अनुसार कॉलेज में एनआईसीयू होना चाहिए लेकिन यहां एनआईसीयू होने के बाद भी स्टाफ और संसाधनों के अभाव में उसका संचालन नहीं हो पा रहा है। संवाद
महिला अस्पताल में एनआईसीयू खोलने में परेशानी
अल्मोड़ा। महिला अस्पताल में भी एनआईसीयू खोलने में कई तरह की परेशानी है। यहां पर एनआईसीयू खोलने के लिए अस्पताल परिसर में जगह नहीं है और न ही अस्पताल प्रशासन के पास कहीं और जमीन है। एनआईसीयू चलाने के लिए यहां प्रशिक्षित डॉक्टर और स्टाफ भी नहीं है जिस कारण यहां एनआईसीयू नहीं खुल पा रहा है।
बुधवार को एक महिला स्वास्थ्य कर्मी ने शिशु को जन्म दिया। स्वास्थ्य संबंधी कुछ दिक्कतों के कारण नवजात को एनआईसीयू की जरूरत पड़ी लेकिन अस्पताल में एनआईसीयू न होने से उसको हायर सेंटर रेफर करना पड़ा। हायर सेंटर पहुंचने से पहले ही उसने दम तोड़ दिया। अस्पताल में एनआईसीयू संचालन के लिए जगह और स्टाफ का अभाव है।
- डॉ. प्रीति पंत, पीएमएस महिला अस्पताल अल्मोड़ा।