फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Almora News ›   New species of parasitic wasp found in Himalayan forests

Almora News: हिमालय के जंगलों में मिली परजीवी ततैया की नई प्रजाति

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sun, 07 Jun 2026 10:59 PM IST
विज्ञापन
New species of parasitic wasp found in Himalayan forests
अल्मोड़ा। चंपावत जिले के एक छोटे से हिमालयी गांव के आसपास किए गए शोध ने दुनियाभर के वैज्ञानिक जगत का ध्यान आकर्षित किया है। फोर्ती गांव में परजीवी ततैया की एक ऐसी प्रजाति मिली है जिसका अब तक कोई वैज्ञानिक रिकॉर्ड नहीं था। इस नई प्रजाति का नाम नियानास्टेटस इंडिगोफेरम रखा गया है।
विज्ञापन

सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के जंतु विज्ञान विभाग के शोधार्थियों ने चंपावत जिले के लोहाघाट क्षेत्र स्थित फोर्ती गांव में हिमालयी वनस्पतियों का अध्ययन किया। इस शोध को प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिका इंटरनेशनल जर्नल ऑफ ट्रॉपिकल इंसेक्ट साइंस ने मान्यता देते हुए प्रकाशित किया है। शोध के दौरान औषधीय पौधे इंडिगोफेरा हेटेरैंथा पर बनने वाली गांठों (गॉल) की जांच की गई।
विज्ञापन

अध्ययन में पता चला कि इन गांठों में रहने वाले सूक्ष्म गॉल मिज कीटों पर एक छोटी परजीवी ततैया आश्रित है। वर्गिकी और सूक्ष्म संरचनात्मक विश्लेषण के बाद यह स्पष्ट हुआ कि यह विज्ञान के लिए पूरी तरह नई प्रजाति है। शोधकर्ताओं के अनुसार यह प्रजाति चैल्सिडोइडिया समूह की परजीवी ततैयों से संबंधित है। ये प्राकृतिक रूप से हानिकारक कीटों की संख्या नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

यह प्रजाति नियानास्टेटस कुल से संबंध रखती है। अब तक विश्वभर में इस कुल की केवल 47 प्रजातियां दर्ज की गई हैं। यह खोज हिमालयी जैव विविधता के छिपे रहस्यों को उजागर करती है। साथ ही भविष्य में पर्यावरण अनुकूल जैविक कीट नियंत्रण की दिशा में भी नई संभावनाएं खोलती है।
-----
जैव विविधता प्रबंधन में नई उम्मीद
शोधार्थियों का कहना है कि हिमालयी क्षेत्र में अभी भी अनेक सूक्ष्म जीव और कीट प्रजातियां मौजूद हैं जिनका वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण नहीं हो पाया है। यह शोध उत्तराखंड की समृद्ध जैव विविधता का प्रमाण होने के साथ-साथ कृषि, वन संरक्षण और जैव विविधता प्रबंधन के क्षेत्र में भी नई उम्मीदें जगाता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक ऐसी परजीवी प्रजातियां भविष्य में जैविक कीट नियंत्रण के प्रभावी साधन बन सकती है जिससे रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
-----
जटिल पारिस्थितिक संबंधों की पहचान

शोध दल ने प्रयोगशाला में गॉल का पालन-पोषण कर ततैया की संरचना, जीवनचक्र और अन्य प्रजातियों से उसकी भिन्नताओं का विस्तृत अध्ययन किया। शोध में औषधीय पौधों, कीटों और परजीवी जीवों के बीच मौजूद जटिल पारिस्थितिक संबंधों की भी पहचान की गई। अध्ययन में यह भी सामने आया कि इंडिगोफेरा हेटेरैंथा पौधा, उस पर गांठ बनाने वाला गॉल मिज कीट और उस कीट पर निर्भर यह परजीवी ततैया एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं।
------
कोट

ततैया की नई प्रजाति की खोज उत्तराखंड की समृद्ध जैव विविधता का वैज्ञानिक प्रमाण है। परजीवी ततैया की यह प्रजाति हानिकारक कीटों की संख्या को प्राकृतिक रूप से नियंत्रित करने में सहायक हो सकती हैं। वर्तमान में कई विकसित देशों में परजीवी कीटों का प्रयोग हानिकारक कीट को नियंत्रण करने में उपयोग किया जा रहा है

- डॉ. संदीप कुमार, मुख्य अन्वेषक, जंतु विज्ञान विभाग, एसएसजे विवि अल्मोड़ा
------
हिमालय की जैव विविधता में अभी भी कई प्रकार के अनजाने जीव छिपे हुए हैं। यह शोध भविष्य में जैव विविधता संरक्षण और पर्यावरण-अनुकूल कीट नियंत्रण की नई संभावनाओं को मजबूत करेगा।

- सुमन उपाध्याय, शोधार्थी, जंतु विज्ञान विभाग, एसएसजे विवि अल्मोड़ा

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed