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जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से निपटने को उपाय जरूरी: डा.शर्मा
अल्मोड़ा़, अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 12 Jul 2017 10:54 PM IST
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व्याखान में मौजूद पदाधिकारी।
- फोटो : अमर उजाला
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जीबी पंत पर्यावरण संस्थान कोसी कटारमल में आयोजित व्याख्यान कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय संस्था आईसीमोड काठमांडू के उप महानिदेशक डा. एकलव्य शर्मा ने कहा कि हिमालय क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से निपटने के लिए उपाय करने जरूरी हैं। उन्होंने बताया कि भूस्खलन, बाढ़, भूकंप जैसी समस्याओं और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए आईसीमोड ने ग्रामीणों के समन्वित विकास का मॉडल तैयार किया है। जिसका नेपाल के आठ गांवों में परीक्षण किया जा रहा है।
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हिमालय से जुड़े भू-भागों को प्रवाहित हो रही पर्यावरणीय सेवाओं की विस्तार से व्याख्या करते हुए उन्होंने पर्यावरण संस्थान कोसी कटारमल और आईसीमोड को एक दूसरे का पूरक बताया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन होने से दुष्प्रभाव भी बढ़ रहे हैं। इनसे निपटने के लिए संपूर्ण हिमालय क्षेत्र में जलवायु समाधानों की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि आईसीमोड ने ग्रामीणों के समन्वित विकास के लिए कृषि, जल ऊर्जा, अवस्थापना विकास, स्थानीय संस्थाओं में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी, आपदा प्रबंधन, संचार प्रौद्योगिकी के समावेश से पर्यावरण एवं मजबूत आर्थिकी के विकास का एक मॉडल तैयार किया है। जिसे नेपाल के आठ गांवों में परीक्षण किया जा रहा है। इस मॉडल में ग्रामीणों की भूस्खलन, बाढ़, भूकंप और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए तकनीकी क्षमता विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में पर्यावरण संस्थान के साथ कई क्षेत्रों में मिलकर काम करेंगे। संस्थान के निदेशक डा. पीतांबर ध्यानी ने संस्थान और आईसीमोड के बीच चल रहे विभिन्न मैत्री कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए आशा जताई कि आगामी समय में पर्यावरण संस्थान के शोध और विकास कार्यक्रमों को गति देने के लिए आईसी मोड से अपेक्षित सहयोग प्राप्त होगा। उन्होंने बताया कि हिमालय के महत्व को ध्यान में रखते हुए यूएन जनरल एसेंबली में संस्थान द्वारा हिमालय को वैश्विक स्तर पर ध्यान दिए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस मौके पर डा. शर्मा ने संस्थान द्वारा विकसित तिलियों पर एक पुस्तिका का भी विमोचन किया।
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व्याख्यान माला के संयोजक डा. राकेश सुंदरियाल ने डा. एकलव्य शर्मा के जीवनवृत्त में प्रकाश डालते हुए बताया कि डा. शर्मा भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के फैलो हैं और कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं। उन्हें 1995 में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय का प्रतिष्ठित विशिष्ट वैज्ञानिक पुरस्कार भी मिल चुका है। मालूम हो कि डा. शर्मा ने जीबी पंत संस्थान से ही अपने वैज्ञानिक सफर की शुरुआत की थी। इस अवसर पर संस्थान के वैज्ञानिक इंजी. किरीट कुमार, डा. नकुल क्षेत्रिय समेत संस्थान के वैज्ञानिक मौजूद थे। संचालन डा. वसुधा ने किया।
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