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Almora News: पलायन की मार झेल रहा सल्ट का नेवलगांव, कभी 1200 आबादी वाला गांव अब हुआ वीरान

Wed, 13 May 2026 11:10 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा Updated Wed, 13 May 2026 11:10 PM IST
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Navalgaon in Salt is facing the brunt of migration; the village, once home to 1,200 people, is now deserted.
नेवलगांव में घरों में लटके ताले। संवाद
मौलेखाल(अल्मोड़ा)। सल्ट ब्लॉक के दूरस्थ क्षेत्र में स्थित नेवलगांव-1 और उसके तोक खदेरागांव की तस्वीर आज पहाड़ों से हो रहे पलायन की दर्दनाक हकीकत बयां कर रही है। कभी करीब 1200 से अधिक आबादी वाला यह गांव अब सिमटकर महज 80 से 100 लोगों तक रह गया है। जिन आंगनों में कभी बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं वहां अब सन्नाटा पसरा है।
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ग्रामीणों के अनुसार रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के चलते अधिकांश परिवार वर्षों पहले ही शहरों की ओर पलायन कर चुके हैं। गांव तक पहुंचने के लिए लोगों को आज भी करीब सात किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई पार करनी पड़ती है। बरसात और खराब मौसम में यह रास्ता और अधिक खतरनाक हो जाता है। बीमारी या आपात स्थिति में हालात बेहद कठिन हो जाते थे। ग्रामीणों को मरीज को चारपाई के सहारे सड़क तक पहुंचाना पड़ता था, जिसके लिए चार से छह युवाओं की जरूरत पड़ती थी। कई बार सड़क तक पहुंचने में चार से पांच घंटे तक लग जाते थे। लगातार पलायन के कारण अब गांव में युवा भी बेहद कम बचे हैं, जिससे बुजुर्गों और महिलाओं की परेशानियां और बढ़ गई हैं।
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गांव में अब अधिकतर घरों में केवल एक-दो बुजुर्ग ही रह गए हैं या फिर वे महिलाएं, जिनके परिवार के सदस्य रोजगार के लिए शहरों में रहते हैं। कुछ परिवार मजदूरी और छोटे-मोटे कार्यों के सहारे किसी तरह जीवनयापन कर रहे हैं। ग्रामीण बताते हैं कि जो लोग पलायन कर चुके हैं वे अब केवल धार्मिक आयोजनों, पूजा-पाठ, शादी-विवाह या किसी विशेष अवसर पर ही गांव लौटते हैं। बाकी अधिकांश परिवारों ने शहरों में स्थायी ठिकाना बना लिया है। कभी चहल-पहल से भरा रहने वाला नेवलगाँव-1 अब साल के अधिकांश समय वीरानी और खामोशी में डूबा रहता है।
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कभी 300 बच्चों से गुलजार थे स्कूल, आज लटका ताला

नेवलगांव में आज से करीब 30 साल पहले गांव में लगभग 300 स्कूली बच्चे हुआ करते थे। करीब 15 साल पहले भी यहां लगभग 150 बच्चे पढ़ाई करते थे। स्कूलों में बच्चों की चहल-पहल, खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों से पूरा गांव जीवंत रहता था, लेकिन रोजगार और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव ने धीरे-धीरे गांव को खाली कर दिया। आज हालत यह है कि गांव के प्राथमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालय दोनों बंद हो चुके हैं। कुछ बच्चे बांगीधार इंटरकॉलेज जाते हैं। कभी बच्चों की आवाज से गूंजने वाले स्कूल अब वीरान पड़े हैं।

पलायन से उजड़ गई खेती-किसानी

खदेरागांव कभी मंडुवा, गेहूं, हल्दी, अदरक और मिर्च के उत्पादन के लिए पहचाना जाता था। यहां की उपज आसपास के क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान रखती थी। लेकिन लगातार पलायन ने खेती-किसानी की रीढ़ तोड़ दी। अधिकांश खेत अब बंजर पड़े हैं।
सड़क आई, लेकिन बहुत देर से

ग्रामीणों को वर्षों तक सड़क सुविधा का इंतजार करना पड़ा। करीब एक साल पहले गांव तक सड़क पहुंचाने का प्रयास शुरू हुआ लेकिन कच्ची सड़क अभी भी गांव से लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर रगढ़गाड़ तक ही पहंच पाई है। विडंबना यह है कि सड़क तब पहुंची जब अधिकांश परिवार गांव छोड़ चुके थे।

क्या बोले लोग

क्षेत्र पंचायत निधि से गांव तक सड़क ले जाने का प्रयास कर रहे हैं। यदि समय रहते सड़क और शिक्षा जैसी सुविधाएं गांव तक पहुंच जातीं तो काफी हद तक पलायन रोका जा सकता था। पलायन रोकने के लिए सरकार को स्थायी समाधान करना चाहिए। - गंगा देवी, क्षेत्र पंचायत सदस्य
गांव में न स्कूल हैं और न ही सड़क। स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली तो पूरे सल्ट में देखने को मिलती है। मजबूरी में लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ रहा है। पलायन एक दीमक के कीड़े की तरह पहाड़ों को खोखला कर रहा है। - चंपा देवी, ग्राम प्रधान-

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पहले गांव में रौनक थी। सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सुविधाओं के अभाव में लोग धीरे-धीरे गांव छोड़ते चले गए। स्कूल बंद हो गए, इलाज के लिए घंटों पैदल चलना पड़ता है। गांव में अब बुजुर्ग ही बचे हैं। - जमन सिंह, ग्रामीण, खदेरागांव

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यदि समय रहते सड़क, शिक्षा और अन्य मूलभूत सुविधाओं पर काम किया गया होता तो शायद गांव आज इस बदहाली तक नहीं पहुंचता। अच्छी शिक्षा और सुविधाओं की तलाश में लोग पलायन करने करने के लिए मजबूर हैं। - आलम सिंह, ग्रामीण
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