{"_id":"1f68bb36303a1273572b1281969e8b56","slug":"museum-of-almora-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":" उपेक्षा ने निदेशक की कुर्सी को ही बना दिया ‘धरोहर’ ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उपेक्षा ने निदेशक की कुर्सी को ही बना दिया ‘धरोहर’
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
Updated Sun, 14 Feb 2016 01:38 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तराखंड की संस्कृति को समृद्ध बनाने के लिए तमाम दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन धरातल में स्थिति कुछ और है। सांस्कृतिक राजधानी कहे जाने वाले अल्मोड़ा में संस्कृति विभाग के अधीन राजकीय संग्रहालय में निदेशक और क्षेत्रीय पुरातत्व संस्थान क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी का पद कई सालों से खाली चल रहे हैं।
विज्ञापन
हालत यह है कि राज्य स्तर के संग्रहालय में निदेशक का पद राज्य बनने से पहले से ही खाली है। वहीं, क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी का पद पिछले पांच साल से रिक्त पड़ा है। इन प्रमुख संस्थानों में लंबे समय से मुखिया नहीं होने से सांस्कृतिक गतिविधियों पर सीधा असर पड़ रहा है।
विज्ञापन
अल्मोड़ा में राजकीय संग्रहालय की स्थापना 1979 में हो गई थी। इस संस्थान में तीन हजार से अधिक मूर्तियां, सोने और चांदी के प्राचीन सिक्के, महत्वपूर्ण पेंटिंग समेत कई महत्वपूर्ण कृतियां रखी गई हैं, लेकिन राज्य बनने से पहले और बाद में लगातार इस संस्थान की उपेक्षा होती रही।
विज्ञापन
संस्थान में निदेशक का पद 1997 से रिक्त है। करीब दो दर्जन कर्मचारियों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें आधे पद खाली पड़े हैं। संग्रहालय में रखी गई तमाम धरोहरों की सुरक्षा के लिए कोई प्रबंध नहीं हैं। प्रचार-प्रसार के अभाव में संग्रहालय में रखी कलाकृतियों को देखने आने वालों की संख्या भी नगण्य है।
निदेशक का पद खाली रहने से इस संस्थान के विकास और प्रशासनिक व्यवस्था में काफी असर पड़ रहा है। अल्मोड़ा में स्थित संस्कृति विभाग की एक अन्य संस्था क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई पर कुमाऊं की पुरातत्व धरोहरों की देखरेख की जिम्मेदारी है, लेकिन इस संस्था की हालत भी खस्ता है।
इस विभाग में भी क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी का पद 2011 से रिक्त चल रहा है। वर्तमान में इस पद की जिम्मेदारी अन्वेषण सहायक के पास है। इसके अलावा तकनीकी स्टाफ के कुछ अन्य पद भी खाली पड़े हैं।
क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई के ऊपर कुमाऊं में स्थित 26 संरक्षित स्मारकों के देखरेख की जिम्मेदारी है, लेकिन विभाग के पास पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध नहीं हैं। ज्यादातर स्मारक भगवान भरोसे हैं और कई महत्वपूर्ण स्मारक देखरेख के अभाव में बर्बाद हो रहे हैं।