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‘अधिक से अधिक लोग बोलें तभी बचेगी कुमाऊंनी भाषा’
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
Updated Sat, 12 Nov 2016 10:51 PM IST
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देवकी मेहरा को सम्मनित करते अतिथि।
- फोटो : अमर उजाला
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कुमाऊंनी भाषा, साहित्य, संस्कृति प्रचार समिति और कुमाऊंनी मासिक पहरु की ओर से धारानौला स्थित जिला पंचायत सभागार में तीन दिवसीय कुमाऊंनी भाषा सम्मेलन शुरू हो गया है। मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार डा. तारा चंद्र त्रिपाठी ने कहा कि कुमाऊंनी भाषा तभी बचेगी जब उसे अधिक से अधिक लोग बोलेंगे। उन्होंने कहा कि भाषा और साहित्य के प्रति सरकार हमेशा से दोहरा बर्ताव करती आई है।
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उन्होंने भाषा के विकास के लिए बोलियों को बचाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने भारतीय संस्कृति, भाषा, साहित्य पर बहुत अच्छा काम किया। आज इससे प्रेरणा लेेने की जरूरत है। कुमाऊंनी भाषा के संरक्षण के लिए कुमाऊंनी भाषा में बातचीत करना जरूरी है। समिति के सचिव डा. हयात सिंह रावत ने बताया कि सम्मेलन के दौरान नई पीढ़ी को कुमाऊंनी भाषा से जोड़ने, नए विषय, नई विधाओं में साहित्य सृजन, लोक भाषाओं को संविधान की आठवीं सूची में स्थान देने आदि मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि साहित्यकारों, भाषा प्रेमियों और जनता को एकजुट होकर भाषा के संरक्षण में भागीदारी करने की जरूरत है। समिति के संयोजक जमन सिंह बिष्ट ने कहा कि कुमाऊंनी भाषा के संरक्षण, संवर्धन के लिए समर्पित होकर काम करने की जरूरत है। उत्तराखंड लोक वाहिनी के
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अध्यक्ष डा. शमशेर सिंह बिष्ट ने कहा कि नेताओं में इच्छा शक्ति का अभाव है। कहा कि कुमाऊंनी रचनाकार आम आदमी से जुड़ा साहित्य सृजन करें।
उपपा के केंद्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी ने कहा कि साहित्य के बगैर समाज की कल्पना असंभव है। जय नंदा लोककला केंद्र के कलाकारों ने वंदना और स्वागत गीत प्रस्तुत किया। इस मौके पर गोविंद पिलख्वाल, दयानंद आर्य, गोविंद बिष्ट, देवकी मेहरा, देवकीनंदन कांडपाल, डा. कपिलेश भोज, जगदीश जोशी, गिरीश जोशी, शंकर जोशी, गोविंद महरा, विपिन जोशी, प्रकाश जोशी, राजेंद्र ढैला, कैलाश डोलिया, पूरन कांडपाल, डा. महेंद्र मेहरा, मधु, गिरीश बिष्ट, उदय किरौला, अजय तिवारी, कृपाल शीला, खुशाल सिंह खनी, महेंद्र ठकुराठी ने विचार रखे। सम्मलेन में कीर्तिबल्लभ शक्टा, अनूप तिवारी, दान सिंह फर्त्याल, रूप सिंह बिष्ट, विनोद पंत, मोहन कबड्वाल, रमेश हितेषी, चंदन बोरा, शंकर जोशी, नंदाबल्लभ पांडे, पवनेश ठकुराठी, जीवन चंद्र, तारा पांडे, डीके जोशी, त्रिभुवन गिरी, श्याम सिंह कुटौला, ललित योगी, प्रदीप उपाध्याय आदि मौजूद थे।
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