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Almora News: बंदर हुए हमलावर, सिस्टम सो रहा, दहशत में जी रहे लोग
Fri, 02 Oct 2026 11:14 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Fri, 02 Oct 2026 11:14 PM IST
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अल्मोड़ा। जिले में नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक आक्रामक (कटखने) बंदरों का खौफ लगातार बढ़ता जा रहा है। हालात यह हैं कि पिछले छह महीनों (अप्रैल से अब तक) में बंदरों के हमलों में 370 लोग घायल हो चुके हैं। जिला प्रशासन और वन विभाग की तमाम कोशिशों के बावजूद इस समस्या का कोई ठोस समाधान नहीं निकल पा रहा है, जिससे आम जनता में भारी रोष है।
नगर हो या गांव हर जगह बंदरों के झुंड लोगों के लिए मुसीबत का सबब बन चुके हैं। भोजन की तलाश में कटखने बंदर घरों की छत और आंगन में बेधड़क बैठे रहते हैं। भगाने पर वह लोगों पर हमला कर रहे हैं। वहीं रास्ते में बैठे बंदर अचानक स्कूली बच्चों, राहगीरों पर हमलावर हो रहे हैं।
अभिभावक भी बच्चों को अकेले स्कूल भेजने से डर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि समय पर इन्हें पकड़कर जंगल में नहीं छोड़ा गया तो बंदर आगे चलकर मुसीबत बन जाएंगे।
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ग्रामीण क्षेत्रों में तो ये फसलों को चौपट कर रहे हैं। इसके चलते कई लोगों ने खेतीबाड़ी भी छोड़ दी है। जो फसलें उगा रहे हैं अब उनका बंदरों और जंगली जानवरों के चलते मोहभंग हो रहा है। उनका कहना है कि सालभर मेहनत करने के बाद भी उन्हें फसल के नाम पर मायूसी मिलती है। लोगों का कहना है कि बंदरों बधियाकरण किया जाना चाहिए ताकि इनकी आबादी पर कुछ हद तक अंकुश लग सके।
बंदरों के हमले में घायल लोग
- अप्रैल 52
- मई 54
- जून 78
- जुलाई 73
- अगस्त 58
- सितंबर से अब तक 62
बधियाकरण के बाद भी संख्या में इजाफा
वन विभाग के अनुसार, पिछले दो वर्षों में जिले में लगभग 2500 बंदरों का बधियाकरण किया गया है, फिर भी इनकी संख्या कम होने का नाम नहीं ले रही है। आज यह समस्या जिले की सबसे गंभीर समस्याओं में शुमार हो चुकी है। जनता लगातार ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन से मुक्ति की गुहार लगा रही है।
खेती बर्बाद, पलायन को मजबूर किसान
सिर्फ शहरी इलाके ही नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी बंदरों का आतंक चरम पर है। खेतों में खड़ी फसल को बंदर चट कर रहे हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। आज स्थिति यह है कि कई किसान खेती से किनारा कर रोजगार की तलाश में महानगरों का रुख करने लगे हैं, जिससे पहाड़ी गांवों से पलायन की समस्या और गंभीर हो गई है।
बोले लोग
बंदरों के झुंड सुबह से ही घरों की छत और आंगन में डेरा जमा लेते हैं। उन्हें भगाने की कोशिश करने पर वे लोगों पर हमला करने लगते हैं। बंदरों के चलते घर से बाहर निकलने में भी डर लगा रहता है। प्रशासन को बंदरों से छुटकारा दिलाने के लिए ठोस कार्रवाई करनी चाहिए। - देवकी नंदन जोशी, ढूंगाधारा, अल्मोड़ा
स्कूल जाने वाले बच्चों को हमेशा ही बंदरों के हमले की आशंका बनी रहती है। रास्ते में बंदर बैठे हों तो बच्चों को अकेले भेजना मुश्किल हो जाता है। प्रशासन को बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए प्रभावी कदम उठाने चाहिए। - दीवान सिंह मेहरा, पूर्वी पोखरखाली, अल्माेड़ा
बंदर खेतों में खड़ी फसलों को लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं। फसल बचाने के लिए दिनभर खेतों की रखवाली करनी पड़ती है। बंदरों के चलते कई किसान खेतीबाड़ी छोड़ने के लिए मजबूर हो रहे हैं। - प्रेमलता तिवारी, गोलनाकरड़िया, अल्मोड़ा
बंदरों की समस्या विकराल होते जा रही है। जल्द ही हम नगर के कुछ लोग इस मामले में जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक करेंगे। इस गंभीर समस्या से निजात पाने के लिए अधिकारियों से भी वार्ता की जाएगी जिससे कि नगर क्षेत्र के लोग बेखौफ आवाजाही कर सकेंगे। - मनोज सनवाल, गोपालधारा, अल्मोड़ा
क्षेत्र में बंदरों की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। बंदर लोगों पर झपट कर उन्हें घायल कर रहे हैं। वन विभाग और प्रशासन को मिलकर इसका स्थायी समाधान तलाशना चाहिए। ताकि लोगों की इनके खौफ से मुक्ति मिल सके। - गोपाल बिष्ट, पांडेखोला, अल्मोड़ा
बंदरों की बढ़ती आबादी पर रोक लगाने के लिए समय-समय पर अभियान चलाकर इन्हें पकड़ा जाता है और इनका बधियाकरण किया जाता है। विभाग नागरिकों को इस दहशत से निजात दिलाने के लिए पूरी तरह गंभीर है। - अभिमन्यु सिंह, प्रभागीय वनाधिकारी, वन विभाग, अल्मोड़ा
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नगर हो या गांव हर जगह बंदरों के झुंड लोगों के लिए मुसीबत का सबब बन चुके हैं। भोजन की तलाश में कटखने बंदर घरों की छत और आंगन में बेधड़क बैठे रहते हैं। भगाने पर वह लोगों पर हमला कर रहे हैं। वहीं रास्ते में बैठे बंदर अचानक स्कूली बच्चों, राहगीरों पर हमलावर हो रहे हैं।
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अभिभावक भी बच्चों को अकेले स्कूल भेजने से डर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि समय पर इन्हें पकड़कर जंगल में नहीं छोड़ा गया तो बंदर आगे चलकर मुसीबत बन जाएंगे।
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ग्रामीण क्षेत्रों में तो ये फसलों को चौपट कर रहे हैं। इसके चलते कई लोगों ने खेतीबाड़ी भी छोड़ दी है। जो फसलें उगा रहे हैं अब उनका बंदरों और जंगली जानवरों के चलते मोहभंग हो रहा है। उनका कहना है कि सालभर मेहनत करने के बाद भी उन्हें फसल के नाम पर मायूसी मिलती है। लोगों का कहना है कि बंदरों बधियाकरण किया जाना चाहिए ताकि इनकी आबादी पर कुछ हद तक अंकुश लग सके।
बंदरों के हमले में घायल लोग
- अप्रैल 52
- मई 54
- जून 78
- जुलाई 73
- अगस्त 58
- सितंबर से अब तक 62
बधियाकरण के बाद भी संख्या में इजाफा
वन विभाग के अनुसार, पिछले दो वर्षों में जिले में लगभग 2500 बंदरों का बधियाकरण किया गया है, फिर भी इनकी संख्या कम होने का नाम नहीं ले रही है। आज यह समस्या जिले की सबसे गंभीर समस्याओं में शुमार हो चुकी है। जनता लगातार ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन से मुक्ति की गुहार लगा रही है।
खेती बर्बाद, पलायन को मजबूर किसान
सिर्फ शहरी इलाके ही नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी बंदरों का आतंक चरम पर है। खेतों में खड़ी फसल को बंदर चट कर रहे हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। आज स्थिति यह है कि कई किसान खेती से किनारा कर रोजगार की तलाश में महानगरों का रुख करने लगे हैं, जिससे पहाड़ी गांवों से पलायन की समस्या और गंभीर हो गई है।
बोले लोग
बंदरों के झुंड सुबह से ही घरों की छत और आंगन में डेरा जमा लेते हैं। उन्हें भगाने की कोशिश करने पर वे लोगों पर हमला करने लगते हैं। बंदरों के चलते घर से बाहर निकलने में भी डर लगा रहता है। प्रशासन को बंदरों से छुटकारा दिलाने के लिए ठोस कार्रवाई करनी चाहिए। - देवकी नंदन जोशी, ढूंगाधारा, अल्मोड़ा
स्कूल जाने वाले बच्चों को हमेशा ही बंदरों के हमले की आशंका बनी रहती है। रास्ते में बंदर बैठे हों तो बच्चों को अकेले भेजना मुश्किल हो जाता है। प्रशासन को बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए प्रभावी कदम उठाने चाहिए। - दीवान सिंह मेहरा, पूर्वी पोखरखाली, अल्माेड़ा
बंदर खेतों में खड़ी फसलों को लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं। फसल बचाने के लिए दिनभर खेतों की रखवाली करनी पड़ती है। बंदरों के चलते कई किसान खेतीबाड़ी छोड़ने के लिए मजबूर हो रहे हैं। - प्रेमलता तिवारी, गोलनाकरड़िया, अल्मोड़ा
बंदरों की समस्या विकराल होते जा रही है। जल्द ही हम नगर के कुछ लोग इस मामले में जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक करेंगे। इस गंभीर समस्या से निजात पाने के लिए अधिकारियों से भी वार्ता की जाएगी जिससे कि नगर क्षेत्र के लोग बेखौफ आवाजाही कर सकेंगे। - मनोज सनवाल, गोपालधारा, अल्मोड़ा
क्षेत्र में बंदरों की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। बंदर लोगों पर झपट कर उन्हें घायल कर रहे हैं। वन विभाग और प्रशासन को मिलकर इसका स्थायी समाधान तलाशना चाहिए। ताकि लोगों की इनके खौफ से मुक्ति मिल सके। - गोपाल बिष्ट, पांडेखोला, अल्मोड़ा
बंदरों की बढ़ती आबादी पर रोक लगाने के लिए समय-समय पर अभियान चलाकर इन्हें पकड़ा जाता है और इनका बधियाकरण किया जाता है। विभाग नागरिकों को इस दहशत से निजात दिलाने के लिए पूरी तरह गंभीर है। - अभिमन्यु सिंह, प्रभागीय वनाधिकारी, वन विभाग, अल्मोड़ा