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बंदरों और लंगूरों के आतंक पर लगाम लगाने की कवायद वन विभाग की नहीं चढ़ सकी परवान
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रानीखेत के कुंपुर लालकुर्ती में एक पेड़ पर लंगूरों का झुंड। संवाद
- फोटो : RANIKHET
रानीखेत (अल्मोड़ा)। रानीखेत मुख्य बाजार और आसपास के इलाकों में इन दिनों बंदरों, लंगूरों और जंगली सूअरों से लोग परेशान है। पूर्व में वन विभाग ने बंदरों का बधियाकरण कर उनकी संख्या वृद्धि को नियंत्रित करने की योजना बनाई थी। योजना आज तक परवान नहीं चढ़ सकी है।
पिछले एक दशक से जंगली जानवर पर्वतीय कृषि व्यवस्था को चौपट किए हुए हैं। अनाज, फल और सब्जी उत्पादन के लिए मशहूर सिलोर, कंडारखुवा, धूराफाट, अठागुल्ली पट्टियों में कई लोगों ने बंदरों और सुअरों की वजह से खेती किसानी भी बंद कर दी है। बंदरों का यह मुद्दा विधानसभा चुनाव में भी उठा था। द्वाराहाट ब्लॉक के कई लोगों ने बंदरों और सुअरों से निजात दिलाने वाले प्रत्याशी को ही वोट देने की शर्त रखी थी। चुनाव में भी किसी प्रत्याशी पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। वन विभाग ने 2017 चुनाव के दौरान कहा था कि बंदरों की संख्या नियंत्रित करने के लिए बधियाकरण की योजना बनाई गई है। वनाधिकारियों का कहना था कि बंदरों को मारा नहीं जा सकता। विभाग इन्हें ट्रेंकुलाइज कर उनको बधियाकरण करने की योजना बना रहा है। चार से पांच सालों में इनकी संख्या में कमी आ जाएगी।
सूअरों को मारने के लिए ग्राम प्रधान के स्तर से लाइसेंसी बंदूकधारी व्यक्ति को चयनित करने का प्रस्ताव प्रभागीय वनाधिकारी को भेजा जाएगा। संबंधित व्यक्ति को सूअर मारने का परमिट जारी किया जाएगा। यह योजना आज तक परवान नहीं चढ़ सकी है। कुंपुर लालकुर्ती, रानीखेत मुख्य बजार, चिलियानौला, ताड़ीखेत क्षेत्र में बंदरों और लंगूरों ने फसलों को चौपट कर दिया है। इस संबंध में वन क्षेत्राधिकारी हरीश टम्टा का कहना है कि वन विभाग की ओर से बंदरों के बधियाकरण की कोई योजना नहीं है जबकि पूर्व रेंजर दीवानी राम ने इसकी पुष्टि की थी।
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पिछले एक दशक से जंगली जानवर पर्वतीय कृषि व्यवस्था को चौपट किए हुए हैं। अनाज, फल और सब्जी उत्पादन के लिए मशहूर सिलोर, कंडारखुवा, धूराफाट, अठागुल्ली पट्टियों में कई लोगों ने बंदरों और सुअरों की वजह से खेती किसानी भी बंद कर दी है। बंदरों का यह मुद्दा विधानसभा चुनाव में भी उठा था। द्वाराहाट ब्लॉक के कई लोगों ने बंदरों और सुअरों से निजात दिलाने वाले प्रत्याशी को ही वोट देने की शर्त रखी थी। चुनाव में भी किसी प्रत्याशी पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। वन विभाग ने 2017 चुनाव के दौरान कहा था कि बंदरों की संख्या नियंत्रित करने के लिए बधियाकरण की योजना बनाई गई है। वनाधिकारियों का कहना था कि बंदरों को मारा नहीं जा सकता। विभाग इन्हें ट्रेंकुलाइज कर उनको बधियाकरण करने की योजना बना रहा है। चार से पांच सालों में इनकी संख्या में कमी आ जाएगी।
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सूअरों को मारने के लिए ग्राम प्रधान के स्तर से लाइसेंसी बंदूकधारी व्यक्ति को चयनित करने का प्रस्ताव प्रभागीय वनाधिकारी को भेजा जाएगा। संबंधित व्यक्ति को सूअर मारने का परमिट जारी किया जाएगा। यह योजना आज तक परवान नहीं चढ़ सकी है। कुंपुर लालकुर्ती, रानीखेत मुख्य बजार, चिलियानौला, ताड़ीखेत क्षेत्र में बंदरों और लंगूरों ने फसलों को चौपट कर दिया है। इस संबंध में वन क्षेत्राधिकारी हरीश टम्टा का कहना है कि वन विभाग की ओर से बंदरों के बधियाकरण की कोई योजना नहीं है जबकि पूर्व रेंजर दीवानी राम ने इसकी पुष्टि की थी।
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