फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Almora News ›   masheeneekaran yug mein bhee pahaad mein jeevant hai okhal mein chyoode taiyaar karane kee viraasat

Almora News: मशीनीकरण युग में भी पहाड़ में जीवंत है ओखल मेंं च्यूड़े तैयार करने की विरासत

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 22 Oct 2025 10:42 PM IST
विज्ञापन
masheeneekaran yug mein bhee pahaad mein jeevant hai okhal mein chyoode taiyaar karane kee viraasat
अल्मोड़ा। पलायन की मार से जूझ रहे पहाड़ के गांवों में ओखली (ओखव) और मूसल हर घर के आंगन का सौंदर्य बढ़ा रहे हैं। दिवाली पर तो इनका महत्व और भी बढ़ जाता है। बुधवार को जिले के ग्रामीण क्षेत्र के प्रत्येक घरों के आंगन में ओखली में च्यूड़े तैयार किए गए। इससे गांवों में रौनक रही। ओखली में तैयार किए गए च्यूड़े रेडीमेड से अधिक कुरकुरे और स्वादिष्ट होते हैं। मशीन से पीसे जाने पर च्यूड़े अक्सर टूट जाते हैं और उनका स्वाद बदल जाता है।
विज्ञापन


पहाड़ के गांवों में आज आधुनिक मकान बन रहे हैं लेकिन हर घर के आंगन में ओखली जरूर मिलेगी। ओखल को कुमाऊंनी भाषा में ओखव कहा जाता है। ओखल पहाड़ की खास विरासत है। इसमें धान, मडुवा समेत अन्य अनाज कूटा जाता है। इसलिए यह स्थान बेहद पवित्र माना जाता है। इसको लांघना वर्जित होता है। दिवाली में इस ओखली का महत्व काफी बढ़ जाता है। मशीनीकरण युग में जहां शहरों में रेडीमेड च्यूड़े का प्रचलन बढ़ गया है वहीं गांवों में आज भी ओखली में परंपरागत तरीके से च्यूड़े तैयार किए जाते हैं। दिवाली पर्व के दूसरे दिन बुधवार को गांव-गांव में ओखली में च्यूड़े कूटे गए। जिले के सैनोली, बाराकोट, पुभाऊ, नौगांव, दाड़िमी, सीम समेत कई गांवों में घर-घर में च्यूड़े तैयार किए गए। कुंज, आरा, लोहना समेत कई अन्य गांवों में सामूहिक रूप से भी च्यूड़े कूटे गए। इससे घरों के आंगन में रौनक रही। बृहस्पतिवार को भाईदूज के दिन च्यूड़े का सिरोधारण किया जाएगा। ओखली में कूट कर तैयार किए जाने वाले च्यूड़े शुभ माने जाते हैं।
विज्ञापन




बहनें भाइयों को आज च्यूड़े कराएंगी सिरोधारण
आज भैया दूज पर्व पर बहनें अपने भाइयों को च्यूड़े सिरोधारण कराएंगी। विवाहित महिलाएं अपने मायके जाकर भाइयों को च्यूड़े पूजकर उनकी दीर्घायु की कामना करेंगी। भाई बहनों को बदले में गिफ्ट आदि देंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन




ऐसे तैयार होते हैं च्यूड़े
कार्तिक माह में शुभ मुहूर्त पर विशेष नक्षत्र में सूखे धानों को एक बाल्टी पानी या टब में आठ-दस दिन पहले भिगो दिया जाता है। धान के अच्छे से भीगने के बाद बाल्टी का पानी फेंक दिया जाता है। भीगे धान को बड़े तवे या परात में चूल्हे पर खूब भूना जाता है। फिर इन्हें ओखली में कूटा जाता है।

-----------------------------------

बोली महिलाएं

पुराने समय में च्यूड़े कूटने को लेकर महिलाओं में उत्साह रहता था। अब पुरानी पीढ़ी के लोग भी गिने चुने हैं और नई पीढ़ी के लोग इसे समय की बर्बादी समझते हैं जो चिंताजनक है। इस विरासत को बचाना होगा।


-खष्टी देवी, चौकुना (अल्मोड़ा)
-----------

हाथ से च्यूड़े तैयार करने में काफी मेहनत लगती है। इसमें मां की ममता तो बहन का भाई के प्रति प्यार छुपा रहता है। ओखल और मूसल से दूर होते जा रही नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ना होगा। -धनुली देवी, चौकुना (अल्मोड़ा)
-----------

आधुनिकता की होड़ में पहाड़ की परंपरा खत्म हो रही है। नई पीढ़ी को भी ओखल और मूसल का महत्व बताना होगा। ओखल में तैयार च्यूड़े शुद्ध, ताजा होने के साथ ही पौष्टिक होते हैं। रेडीमेड च्यूड़े इनकी जगह नहीं ले सकते। -दीपा महरा, जैंती (अल्मोड़ा)
-------------------

फोटो- 22एएलएम01पी-खष्टी देवी, चौकुना (अल्मोड़ा)
फोटो- 22एएलएम02पी-धनुली देवी, चौकुना (अल्मोड़ा)
फोटो- 22एएलएम03पी-दीपा महरा, जैंती (अल्मोड़ा)
फोटो- 22एएलएम04पी- अल्मोड़ा के कनोली में ओखली में च्यूड़े कूटतीं महिलाएं।।संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed