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विकास की दौड़ में पिछड़ रहे मजखाली को पृथक विकासखंड की दरकार
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इंद्र पाल सिंह
- फोटो : RANIKHET
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। पर्यटन की दृष्टि से बेहद खूबसूरत मजखाली क्षेत्र तहसील रानीखेत, ब्लाक द्वाराहाट और सोमेश्वर विधानसभा में बंटा होने के कारण विकास की दृष्टि से पिछड़ रहा है। इससे जुड़े सुदूरवर्ती गांवों की हालत और भी खराब है। आजादी के बाद से ही यहां के लोग मजखाली को पृथक विकासखंड बनाने की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन सरकारी तंत्र ने आज तक नहीं सुनीं। मजखाली से जुड़े गांवों की दूरी ब्लाक मुख्यालय द्वाराहाट से 70 से 80 किमी है। इस कारण ग्रामीणों के विकासखंड संबंधी कार्य नहीं हो पाते हैं।
मजखाली कसबे से विधानसभा क्षेत्र सोमेश्वर की दूरी 35 किमी, ब्लाक मुख्यालय द्वाराहाट की दूरी 50 किमी तथा तहसील रानीखेत की दूरी 10 किमी है। सिमोली, भैंसोली गांव इन मुख्यालयों से 70 से 80 किमी की दूरी पर हैं। छोटे-मोटे कार्यों के लिए भी ग्रामीणों को भारी धनराशि और समय बर्बाद करना पड़ता है। इसी के चलते 1960 में मजखाली क्षेत्र के लोगों ने विकासखंड बनाने की मांग उठाई। स्व. मोते सिंह और स्व. प्रताप सिंह इन आंदोलनों के सूत्रधार रहे, लेकिन सरकारी तंत्र हमेशा क्षेत्र के लोगों को छलता रहा। इसके बाद विशन सिंह, किशन सिंह के नेतृत्व में आंदोलन चले। कैप्टन भूपाल सिंह ने भी ब्लाक के लिए संघर्ष किया।
-द्वारसौं, कठपुडिय़ा, बबुरखोला, तुस्यारी, मछलिया, खौड़ी, कालिका सहित 60 गांवों को मिलाकर ब्लाक की मांग शासन प्रशासन के नुमाइंदों तक पहुंचाई गई, ब्लाक मुख्यालय के लिए भी ढांचागत सुविधाएं मौजूद हैं लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधि ने साथ नहीं दिया।-एनएस अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता मजखाली।
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-मजखाली क्षेत्र का दुर्भाग्य है कि तीन क्षेत्रों में इलाका बंटा हुआ है, जिसके चलते विकास कार्यों में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ब्लाक संबंधी कार्यों के लिए द्वाराहाट के चक्कर काटने पड़ते हैं। यदि मजखाली को अलग विकासखंड बना दिया जाए तो दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को इसका लाभ जरूर मिलेगा।-इंद्रपाल सिंह, पूर्व प्रधान रियूनी मजखाली
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मजखाली कसबे से विधानसभा क्षेत्र सोमेश्वर की दूरी 35 किमी, ब्लाक मुख्यालय द्वाराहाट की दूरी 50 किमी तथा तहसील रानीखेत की दूरी 10 किमी है। सिमोली, भैंसोली गांव इन मुख्यालयों से 70 से 80 किमी की दूरी पर हैं। छोटे-मोटे कार्यों के लिए भी ग्रामीणों को भारी धनराशि और समय बर्बाद करना पड़ता है। इसी के चलते 1960 में मजखाली क्षेत्र के लोगों ने विकासखंड बनाने की मांग उठाई। स्व. मोते सिंह और स्व. प्रताप सिंह इन आंदोलनों के सूत्रधार रहे, लेकिन सरकारी तंत्र हमेशा क्षेत्र के लोगों को छलता रहा। इसके बाद विशन सिंह, किशन सिंह के नेतृत्व में आंदोलन चले। कैप्टन भूपाल सिंह ने भी ब्लाक के लिए संघर्ष किया।
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-द्वारसौं, कठपुडिय़ा, बबुरखोला, तुस्यारी, मछलिया, खौड़ी, कालिका सहित 60 गांवों को मिलाकर ब्लाक की मांग शासन प्रशासन के नुमाइंदों तक पहुंचाई गई, ब्लाक मुख्यालय के लिए भी ढांचागत सुविधाएं मौजूद हैं लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधि ने साथ नहीं दिया।-एनएस अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता मजखाली।
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-मजखाली क्षेत्र का दुर्भाग्य है कि तीन क्षेत्रों में इलाका बंटा हुआ है, जिसके चलते विकास कार्यों में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ब्लाक संबंधी कार्यों के लिए द्वाराहाट के चक्कर काटने पड़ते हैं। यदि मजखाली को अलग विकासखंड बना दिया जाए तो दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को इसका लाभ जरूर मिलेगा।-इंद्रपाल सिंह, पूर्व प्रधान रियूनी मजखाली

एनएस अधिकारी- फोटो : RANIKHET