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विदेशी की चमक फीकी पड़ी, स्वदेशी याद आया
अमर उजाला ब्यूरो, रानीखेत, अल्मोड़ा
Updated Tue, 09 Aug 2016 10:40 PM IST
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चौबटिया स्थित उद्यान गार्डन में सेब की प्रख्यात स्वदेशी डेलीसेस प्रजाति को फिर से विकसित करने की कोशिश जारी है। सब कुछ ठीक रहा तो पांच सालों के भीतर डेलीसेस सेब की खुशबू फिर महकेगी।
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मुनाफे के फेर में उद्यान विभाग ने एक दशक पहले स्वदेशी सेब की प्रजाति के पुराने पेड़ों को काटकर वहां अमेरिकन प्रजाति के सेब विकसित कर दिए थे, लेकिन विदेशी प्रजाति सफल नहीं हुई। अब फिर से स्वदेशी सेब की याद आई है। फिलहाल उद्यान के 10 हेक्टेयर क्षेत्र में पिछले दो सालों में साढ़े पांच हजार पेड़ लगाए गए हैं। मालूम हो कि चौबटिया उद्यान निदेशालय में स्वदेशी डेलीसेस सेब का गौरवशाली अतीत रहा है।
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यह सेब देश के अलावा यूरोपियन देशों में भी पसंद किया जाता था, लेकिन 2005-06 में अमेरिकी सेब प्रजाति के पेड़ विकसित किए गए, लेकिन यह प्रजाति यहां सफल नहीं हो सकी, परिणाम स्वरूप सेब का उत्पादन सिमट गया। अब विभाग को पुन: स्वदेशी प्रजाति के सेबों की याद आई है।
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उद्यान में खाली पड़ी 10 हेक्टेयर भूमि पर सेब की डेलीसेस, स्पर, सुपर चीफ प्रजाति के पेड़ों को लगाने का काम शुरू किया गया है। पहले साल 2015 में 25 सौ और इस साल तीन हजार 80 पेड़ लगाए गए हैं। इनमें से 26 सौ पेड़ प्रख्यात रेड डेलीसेस प्रजाति के हैं। यदि सब कुछ ठीक ठाक रहा तो चार से पांच सालों के भीतर यह पेड़ फल देने लगेंगे।