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टपक और फव्वारा विधि से करें फसल की सिंचाई
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
Updated Wed, 27 Jul 2016 12:08 AM IST
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आजीविका सहयोग की ट्रेनिंग
- फोटो : अमर उजाला
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अल्मोड़ा। एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना ने हवालबाग में कार्यशाला आयोजित कर उत्पादक समूह सहकारिताओं के सदस्यों को बेमौसमी सब्जी उत्पादन की जानकारी दी। कृषि विज्ञान केंद्र मटेला के डा. बीडी सिंह ने पौधशाला की तैयारी, सब्जी बीज के चयन, पॉलीहाउस में सब्जी उत्पादन के बारे में बताया।
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उन्होंने कहा कि टपक और फव्वारा विधि से कम पानी में फसल की सिंचाई की जा सकती है। इससे मौसमी और बेमौसमी सब्जी उत्पादन में बढ़ोतरी होगी। उन्होंने फसलों में लगने वाली बीमारियों के लक्षण और बचाव के उपाय, वर्मी कंपोस्ट के लाभ भी काश्तकारों को बताए।
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सहायक उद्यान अधिकारी पीडी जोशी ने कहा कि सब्जी बीज बोते समय ही कीट नियंत्रण की तैयारी कर लेनी चाहिए। विभागीय योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि जिला योजना के अंतर्गत छोटे आकार के पॉलीहाउस और व्यावसायिक आकार के पालीहाउस राज्य उद्यान मिशन से प्राप्त किए जा सकते हैं।
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परियोजना प्रभाग के सहायक प्रबंधक कृषि प्रदीप गुसाई, सहायक प्रबंधक मुकेश कुमार, ग्रास संस्था के मुख्य कार्यकारी गोपाल सिंह चौहान ने कहा कि काश्तकार सब्जी उत्पादन कर अधिक आय अर्जित करें। संचालन करते हुए पकंज कुमार ओझा ने सभी का आभार जताया। कार्यशाला में बल्टा, माट, बर्शिमी, धामस, फलसीमा के काश्तकारों ने भाग लिया।