{"_id":"e20328528de7364ef4ec4cb2cf0e97db","slug":"leopard-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"चमड़खान में तेंदुए की दस्तक से फैली दहशत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चमड़खान में तेंदुए की दस्तक से फैली दहशत
ब्यूरो/अमर उजाला, चमड़खान (अल्मोड़ा)।
Updated Fri, 23 Jan 2015 12:11 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चमड़खान में तेंदुए की दस्तक से क्षेत्रवासियों में दहशत फैल गई। सौनी, देवलीखेत, डौड़ाखाल, पंतगांव, चमड़खान आदि स्थानों पर अब तक वह 12 से अधिक मवेशियों को मार चुका है। ग्रामीणों ने बताया कि तेंदुआ कई बार आबादी क्षेत्र तक आ गया। दहशतजदा ग्रामीणों ने मवेशियों को जंगल भेजना भी बंद कर दिया है।
सिलोर घाटी में भी तेंदुए का आतंक छाया हुआ है। अभिभावक बच्चों को अकेले स्कूल भेजने से डर रहे हैं। पूर्व बीडीसी चंदन बिष्ट ने कहा कि वन विभाग को मामले को गंभीरता से लेना चाहिए। साथ ही जिन लोगों के मवेशियों को निवाला बनाया उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए। इधर, जालली क्षेत्र के मासों, धमेड़ा आदि क्षेत्रों में भी तेंदुए की दस्तक से लोग भयभीत हैं।
पूर्व प्रधान सुरेश चंद्र टम्टा ने बताया कि इस क्षेत्र में वह 12 से अधिक बकरियों को जंगल में ही मार चुका है। वन विभाग को अतिशीघ्र पिंजरा लगाना चाहिए।
विज्ञापन
सिलोर घाटी में भी तेंदुए का आतंक छाया हुआ है। अभिभावक बच्चों को अकेले स्कूल भेजने से डर रहे हैं। पूर्व बीडीसी चंदन बिष्ट ने कहा कि वन विभाग को मामले को गंभीरता से लेना चाहिए। साथ ही जिन लोगों के मवेशियों को निवाला बनाया उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए। इधर, जालली क्षेत्र के मासों, धमेड़ा आदि क्षेत्रों में भी तेंदुए की दस्तक से लोग भयभीत हैं।
विज्ञापन
पूर्व प्रधान सुरेश चंद्र टम्टा ने बताया कि इस क्षेत्र में वह 12 से अधिक बकरियों को जंगल में ही मार चुका है। वन विभाग को अतिशीघ्र पिंजरा लगाना चाहिए।