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दादा हम शर्मिंदा है आप अनाथालय में हैं मिलना चाहूं..
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अल्मोड़ा। बच्चों की पत्रिका बाल प्रहरी और बाल साहित्य संस्थान की ओर से श्राद्ध पक्ष में दादा-दादी विषय पर ऑनलाइन कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि बाल साहित्य संस्थान दरभंगा (बिहार) के निदेशक डॉ. सतीश भगत रहे। उन्होंने ‘दादा हम शर्मिंदा है आप अनाथालय में हैं मिलना चाहूं आपसे पर घर में सब संशय में हैं... कविता प्रस्तुत की।
जयपुर के नीतेश सोनी बोले ‘आज सुनाते हैं हम दादा की कहानी चार बेटे हैं जिनके वे खुद भरें पानी’। अल्मोड़ा के डॉ. धाराबल्लभ पांडे ने ‘खेद है देख न पाया तुम्हें कभी आप तो थे पर मैं न कहीं था यहां’ तभी कविता सुनाई। गोष्ठी में सुशील सरित (आगरा), नरेंद्र बहुगुणा (जोशीमठ), डॉ. दिनेश प्रसाद साह (दरभंगा), ओमप्रकाश शिव (नागपुर), सत्यानंद बडोनी (देहरादून), हंसा बिष्ट (खुर्पाताल), विजयपाल सेहलंगिया (महेंद्रगढ़), प्रज्ञा गुप्ता (बांसवाड़ा), कैलाश त्रिपाठी (औरैया), पुष्पा जोशी (शक्तिफार्म), डॉ. दलजीत कौर (चंडीगढ़), सुशीला शर्मा (जयपुर), रूबी शर्मा (रायबरेली), दुर्ग सिंह झाला (जोधपुर), डॉ. पूनम गुप्त (पटियाला), कृपाल सिंह शीला (बासोट), डॉ. महेंद्र प्रताप पांडे (खटीमा), प्रमोद कांडपाल (द्वाराहाट), नरेश सोराड़ी (नानकमत्ता) सहित 24 कवियों ने दादा-दादी पर बाल कविताएं प्रस्तुत कीं। अध्यक्षता करते हुए चंपावत के डॉ. विष्णु शास्त्री ‘सरस’ ने कहा कि दादा-दादी सारे बच्चों को प्यारे होते हैं लेकिन संयुक्त परिवारों के विघटन के बाद बच्चों को अब दादा-दादी, नाना-नानी का प्राकृतिक प्यार नहीं मिल रहा है। जीआईसी हवालबाग के संस्कृत प्रवक्ता मोती प्रसाद साहू ने संचालन किया। बालसाहित्य संस्थान के सचिव, बाल प्रहरी संपादक उदय किरौला ने सभी का स्वागत किया। यहां डॉ. शैलेंद्र धपोला, संजय प्रजापति, डॉ. सारिका काला, गीता जोशी, प्रभा उनियाल, नीतू डिमरी, हर्षिता पुजारी, बलवंत सिंह नेगी, भव्यांशी, गीता कन्नौजिया, डॉ. महेंद्र सिंह राणा आदि शामिल थे।
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जयपुर के नीतेश सोनी बोले ‘आज सुनाते हैं हम दादा की कहानी चार बेटे हैं जिनके वे खुद भरें पानी’। अल्मोड़ा के डॉ. धाराबल्लभ पांडे ने ‘खेद है देख न पाया तुम्हें कभी आप तो थे पर मैं न कहीं था यहां’ तभी कविता सुनाई। गोष्ठी में सुशील सरित (आगरा), नरेंद्र बहुगुणा (जोशीमठ), डॉ. दिनेश प्रसाद साह (दरभंगा), ओमप्रकाश शिव (नागपुर), सत्यानंद बडोनी (देहरादून), हंसा बिष्ट (खुर्पाताल), विजयपाल सेहलंगिया (महेंद्रगढ़), प्रज्ञा गुप्ता (बांसवाड़ा), कैलाश त्रिपाठी (औरैया), पुष्पा जोशी (शक्तिफार्म), डॉ. दलजीत कौर (चंडीगढ़), सुशीला शर्मा (जयपुर), रूबी शर्मा (रायबरेली), दुर्ग सिंह झाला (जोधपुर), डॉ. पूनम गुप्त (पटियाला), कृपाल सिंह शीला (बासोट), डॉ. महेंद्र प्रताप पांडे (खटीमा), प्रमोद कांडपाल (द्वाराहाट), नरेश सोराड़ी (नानकमत्ता) सहित 24 कवियों ने दादा-दादी पर बाल कविताएं प्रस्तुत कीं। अध्यक्षता करते हुए चंपावत के डॉ. विष्णु शास्त्री ‘सरस’ ने कहा कि दादा-दादी सारे बच्चों को प्यारे होते हैं लेकिन संयुक्त परिवारों के विघटन के बाद बच्चों को अब दादा-दादी, नाना-नानी का प्राकृतिक प्यार नहीं मिल रहा है। जीआईसी हवालबाग के संस्कृत प्रवक्ता मोती प्रसाद साहू ने संचालन किया। बालसाहित्य संस्थान के सचिव, बाल प्रहरी संपादक उदय किरौला ने सभी का स्वागत किया। यहां डॉ. शैलेंद्र धपोला, संजय प्रजापति, डॉ. सारिका काला, गीता जोशी, प्रभा उनियाल, नीतू डिमरी, हर्षिता पुजारी, बलवंत सिंह नेगी, भव्यांशी, गीता कन्नौजिया, डॉ. महेंद्र सिंह राणा आदि शामिल थे।
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