फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Almora News ›   Kafaltaa Kand of Sult

सल्ट के कफल्टा कांड की याद दिला गई भिकिसैंण के नृशंस हत्याकांड की घटना

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Fri, 02 Sep 2022 11:24 PM IST
विज्ञापन
Kafaltaa Kand of Sult
रानीखेत (अल्मोड़ा)। भिकियासैंण में हुई ताजा घटना ने 1980 में सल्ट के कफल्टा कांड की यादें ताजा कर दी हैं। कफल्टा में भी मंदिर के आगे से बरात गुजारने को लेकर हुए संघर्ष में अनुसूचित जाति के 14 लोगों की नृशंस हत्या कर दी गई थी। उन्हें एक कमरे में बंद कर सवर्ण लोगों ने जिंदा जला दिया था। कुछ मह पूर्व सल्ट क्षेत्र में अनुसूचित जाति के दूल्हे को घोड़े से उतारने के मामले का विवाद भी सुर्खियों में रहा।
विज्ञापन

अंतर्जातीय प्रेम विवाह करने के जुर्म में भिकियासैंण में अनुसूचित जाति के युवक की उसके ससुरालियों ने मिलकर नृशंस हत्या कर दी। घटना से लोगों को 1980 में हुए कफल्टा कांड की याद ताजा हो गई। तब लोहार जाति के श्याम प्रसाद की बरात कफल्टा गांव से होकर गुजर रही थी तो कुछ महिलाओं ने दूल्हे से कहा कि वह भगवान बदरीनाथ के प्रति सम्मान दिखाए और पालकी से उतर जाए। अनुसूचित जाति के लोगों ने ऐसा करने से मना कर दिया, इससे वहां विवाद बढ़ गया।
विज्ञापन

महिलाओं ने पुरुषों को आवाज दी जिसके बाद गांव में उन दिनों छुट्टी पर आये खीमानंद नामक एक फौजी ने जबरन पालकी को उलटा दिया। खीमानंद की इस हरकत से नाराज हुए अनुसूचित जाति के लोगों ने उन पर हमला बोल दिया और उनकी मृत्यु हो गई। घटना का बदला लेने के लिए सवर्ण एक हो गए। जान बचाने के लिए सभी बरातियों ने कफल्टा में रहने वाले इकलौते अनुसूचित जाति के नरी राम के घर पनाह ली और कुंडी भीतर से बंद कर दी।
विज्ञापन
विज्ञापन

सवर्णों ने घर को घेर लिया और उसकी छत तोड़ डाली। छत के टूटे हुए हिस्से से उन्होंने चीड़ का सूखा पिरूल, लकड़ी और मिट्टी का तेल भीतर डाल घर को आग लगा दी। घटना में छह लोग जिंदा जल गए। जो युवक खिड़कियों के रास्ते अपनी जान बचाने के लिए बाहर निकले उन्हें खेतों में दौड़ाया गया और लाठी-पत्थरों से उनकी हत्या कर दी गई। घटना में अनुसूचित जाति के 14 लोग मारे गए।

दूल्हा श्याम प्रसाद और कुछ बराती किसी तरह जान बचाकर वहां से भाग निकले। इस वीभत्स घटना के बाद तत्कालीन गृह मंत्री ज्ञानी जैल सिंह को सल्ट आना पड़ा। 1997 में न्याय हुआ और सुप्रीम कोर्ट ने 16 आरोपियों को उम्र कैद की सजा सुनाई, जिसमें से तीन लोगों की मौत हो चुकी थी। अब भिकियासैंण की घटना ने समाज में जातीय भेद के चलते हुई उस घटना की यादें फिर ताजा कर दी हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed