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पर्यटन को बढ़ावा देने की बस डींगें, सुविधाएं सिफर

Mon, 16 Oct 2017 11:32 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा। Updated Mon, 16 Oct 2017 11:32 PM IST
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Just boast of promoting tourism, facilities are cipher
जोखिम भरे ढुंगियाढोंग से आगे कटरिया मार्ग में चलता ट्रैकिंग दल सदस्य। - फोटो : अमर उजाला
 एक तरफ सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने की बात करती है दूसरी तरफ पर्यटन क्षेत्रों में ट्रैकिंग पर जाने वाले पर्यटकों को सुविधाएं मुहैया नहीं कराई जाती हैं। विश्व प्रसिद्ध सुंदरढुंगा घाटी से लौटा अल्मोड़ा के चार सदस्यीय पर्यटकों के दल ने मार्ग में आने वाली सारी समस्याओं को उजागर किया। उन्होंने बताया कि 2013 की आपदा में ध्वस्त हुए मार्ग को आज तक ठीक नहीं कराया गया और तो और ट्रैकिंग पर जाने वाले पर्यटकों की सुविधा के लिए पर्यटन विभाग ने ऐरो मार्क तक नहीं बनाए हैं जिससे इस क्षेत्र में पर्यटन काफी कम हो गया है।  
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   ट्रैकिंग से लौटे युवा ट्रैकर भुवन चंद्र जोशी ने बताया कि उत्तराखंड पर्यटन विकास विभाग पर्यटन को बढ़ावा देने की बात कर रहा है,  सुंदरढुंगा घाटी को जाने वाले मार्ग में यह नजर नहीं आता है। जैंतोली से पांच किमी के बाद के शेष ट्रैक पर रास्तों का नामोनिशान नहीं है। न तो यहां पर्यटन विभाग ने सूचना बोर्ड लगाया है और न ही यात्रियों को मार्ग बताने के लिए किसी प्रकार का ऐरो साइन। पर्यटकों को जान जोखिम में डालकर आगे का रास्ता तय करना पड़ रहा है। भुवन जोशी ने बताया कि सूचनाओं के अभाव में कई पर्यटक और ट्रैकर यहां से लौट रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह जगह खूबसूरत पर्वत श्रृंखलाओं, बुग्याल से घिरी है। यहा से देवी कुंड, नंद कुंड, मैकतोली बेस कैंप काफी नजदीक है। उन्होंने बताया कि स्थानीय गाइड रूप सिंह दानू ने उन्हें बताया कि 2013 में आई आपदा के बाद से यहां मार्ग का नामोनिशान मिट गया है। नदी को पार करने के लिए भी किसी प्रकार का पुल नहीं बना है। ट्रैकिंग दल काफी मुसीबतों का सामना करते हुए हिमालय से लगे अंतिम गांव जैतोंली पहुंचा और उसके बाद उन्होंने ढुंगियाढोंग से होते हुए सुंदरढुंगा घाटी तक ट्रैकिंग की। दल में डा. महेंद्र सिंह मिराल, भुवन नरेंद्र साही और डा. ललित वर्मा शामिल थे।  
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