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जोखिम में जान पर सुध लेने वाला कोई नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
Updated Tue, 22 Dec 2015 10:26 PM IST
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जर्जर हो चुुका खीड़ा-चुलेरासीम पैदल पुल किसी बड़ी दुर्घटना को दावत दे रहा है। पुल में छोटे बच्चे तो क्या बड़े लोगों और मवेशियों का गुजरना भी मुश्किल हो गया है।
खीड़ा-चुलेरासीम के बीच राम गंगा नदी में बने पुल की खतरनाक स्थिति को देखकर इससे पैदा हुई खतरे की स्थिति का स्वत: ही अंदाजा लगाया जा सकता है। खस्ताहाल हो चुके पुल से आवागमन में भारी दिक्कत हो रही है। विशेषकर छोटे बच्चे जान जोखिम में डालकर किसी तरह आर-पार हो रह हैं। ग्रामीणों द्वारा बताया गया कि गत वर्ष पुल के जीर्णोद्धार का कार्य किया गया था जिसकी गुणवत्ता निम्न स्तर की थी जिसके चलते पुल में बिछाया गया डामर आदि उखड़ गया और तख्ते टूट गए। शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई है। सामाजिक कार्यकर्ता खीमसिंह नेगी सहित तमाम लोगों ने पुल की मरम्मत शीघ्र करने की मांग करते हुए किसी भी तरह का हादसा होने पर संबंधित विभाग और प्रशासन को जिम्मेदार ठहराने की बात कही है।
खीड़ा-चुलेरासीम के बीच राम गंगा नदी में बने पुल की खतरनाक स्थिति को देखकर इससे पैदा हुई खतरे की स्थिति का स्वत: ही अंदाजा लगाया जा सकता है। खस्ताहाल हो चुके पुल से आवागमन में भारी दिक्कत हो रही है। विशेषकर छोटे बच्चे जान जोखिम में डालकर किसी तरह आर-पार हो रह हैं। ग्रामीणों द्वारा बताया गया कि गत वर्ष पुल के जीर्णोद्धार का कार्य किया गया था जिसकी गुणवत्ता निम्न स्तर की थी जिसके चलते पुल में बिछाया गया डामर आदि उखड़ गया और तख्ते टूट गए। शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई है। सामाजिक कार्यकर्ता खीमसिंह नेगी सहित तमाम लोगों ने पुल की मरम्मत शीघ्र करने की मांग करते हुए किसी भी तरह का हादसा होने पर संबंधित विभाग और प्रशासन को जिम्मेदार ठहराने की बात कही है।
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