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Almora News: धमकी से डराया, फर्जी दस्तावेजों से जीता भरोसा
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अल्मोड़ा। साइबर ठगों ने जिले के एक युवक को ऑनलाइन डराया-धमकाया। उसे गंभीर चोट पहुंचाने की धमकी देकर उससे 1.10 लाख रुपये ठग लिए। घटना के बाद पीड़ित ने कोतवाली अल्मोड़ा में तहरीर दी जिसके आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
अल्मोड़ा निवासी प्रतीक पेटशाली ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि अज्ञात साइबर अपराधियों ने ऑनलाइन माध्यम से उससे संपर्क किया। आरोपियों ने उसे डराने के साथ शारीरिक नुकसान पहुंचाने की धमकी दी। धमकी से भयभीत युवक से आरोपियों ने धोखे से 1.10 लाख रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करा लिए। मामले की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
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फर्जी दस्तावेज दिखाकर युवक से 1.44 लाख की साइबर ठगी
अल्मोड़ा। साइबर ठगों ने पहचान छिपाकर युवक को अपने जाल में फंसाया और फर्जी दस्तावेज व जाली इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड दिखाकर उससे 1,44,140 रुपये ठग लिए। शिकायत के बाद मामले की जांच शुरू हो गई है। देहरादून स्थित केंद्रीय साइबर थाने में दर्ज प्राथमिकी को क्षेत्राधिकार के अनुसार भतरौंजखान थाने में स्थानांतरित किया गया है।
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भतरौंजखान क्षेत्र के गुजरगड़ी निवासी राहुल फर्त्याल ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि अज्ञात साइबर अपराधियों ने पहचान छिपाकर (इम्पर्सनेशन) उनसे संपर्क किया। आरोपियों ने कुछ फर्जी दस्तावेज और जाली इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को वास्तविक बताकर उनका विश्वास जीता। इसके बाद धोखे से 1,44,140 रुपये हड़प लिए।
थानाध्यक्ष अवनीश कुमार ने बताया कि मामले में देहरादून स्थित केंद्रीय साइबर थाने में ई-जीरो प्राथमिकी दर्ज की गई थी। क्षेत्राधिकार के अनुसार अब केस को भतरौंजखान थाने में स्थानांतरित किया गया है।
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वर्जन
दोनों मामलों की जांच शुरू कर दी गई है। साइबर सेल की मदद से ठगी में इस्तेमाल बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की जानकारी जुटाई जा रही है। आरोपियों तक पहुंचने के लिए तकनीकी साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है। -बलवंत सिंह रावत, सीओ
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साइबर ठगी से बचने के लिए रहें सतर्क, डरें नहीं
क्या करें
-अनजान नंबर से वीडियो कॉल, फोन या मैसेज आने पर पहचान और दावे की पुष्टि करें।
-पुलिस, सीबीआई, ईडी, बैंक या किसी अन्य सरकारी संस्था के नाम पर धमकी मिले तो घबराएं नहीं। संबंधित विभाग के आधिकारिक नंबर से स्वयं संपर्क कर सत्यापन करें।
-कोई व्यक्ति फर्जी दस्तावेज, आईडी, नोटिस या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड दिखाए तो उसे सच न मानें।
-बैंक खाते, एटीएम कार्ड, यूपीआई, ओटीपी, पासवर्ड और अन्य निजी जानकारी किसी से साझा न करें।
-ठगी होने पर तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करें और संबंधित बैंक को भी सूचना दें।
-संदिग्ध मोबाइल नंबर, लिंक, स्क्रीनशॉट, चैट और लेनदेन की जानकारी सुरक्षित रखें, ताकि पुलिस जांच में मदद मिल सके।
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क्या न करें
-डिजिटल अरेस्ट जैसी धमकी से डरकर पैसे न भेजें। कोई भी वैध सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर आपको गिरफ्तार या डिजिटल रूप से नजरबंद नहीं करती।
-अनजान व्यक्ति के कहने पर किसी खाते में रकम ट्रांसफर न करें।
-फर्जी दस्तावेज, पहचान पत्र या सरकारी मुहर देखकर तुरंत भरोसा न करें।
-अनजान लिंक पर क्लिक न करें और किसी के कहने पर रिमोट एक्सेस/स्क्रीन शेयरिंग ऐप इंस्टॉल न करें।
-ओटीपी, यूपीआई पिन, एटीएम पिन या बैंकिंग पासवर्ड कभी न बताएं।
-ठगी का पता चलने के बाद भी शर्म या डर के कारण शिकायत करने में देरी न करें।
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अल्मोड़ा निवासी प्रतीक पेटशाली ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि अज्ञात साइबर अपराधियों ने ऑनलाइन माध्यम से उससे संपर्क किया। आरोपियों ने उसे डराने के साथ शारीरिक नुकसान पहुंचाने की धमकी दी। धमकी से भयभीत युवक से आरोपियों ने धोखे से 1.10 लाख रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करा लिए। मामले की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
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फर्जी दस्तावेज दिखाकर युवक से 1.44 लाख की साइबर ठगी
अल्मोड़ा। साइबर ठगों ने पहचान छिपाकर युवक को अपने जाल में फंसाया और फर्जी दस्तावेज व जाली इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड दिखाकर उससे 1,44,140 रुपये ठग लिए। शिकायत के बाद मामले की जांच शुरू हो गई है। देहरादून स्थित केंद्रीय साइबर थाने में दर्ज प्राथमिकी को क्षेत्राधिकार के अनुसार भतरौंजखान थाने में स्थानांतरित किया गया है।
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भतरौंजखान क्षेत्र के गुजरगड़ी निवासी राहुल फर्त्याल ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि अज्ञात साइबर अपराधियों ने पहचान छिपाकर (इम्पर्सनेशन) उनसे संपर्क किया। आरोपियों ने कुछ फर्जी दस्तावेज और जाली इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को वास्तविक बताकर उनका विश्वास जीता। इसके बाद धोखे से 1,44,140 रुपये हड़प लिए।
थानाध्यक्ष अवनीश कुमार ने बताया कि मामले में देहरादून स्थित केंद्रीय साइबर थाने में ई-जीरो प्राथमिकी दर्ज की गई थी। क्षेत्राधिकार के अनुसार अब केस को भतरौंजखान थाने में स्थानांतरित किया गया है।
वर्जन
दोनों मामलों की जांच शुरू कर दी गई है। साइबर सेल की मदद से ठगी में इस्तेमाल बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की जानकारी जुटाई जा रही है। आरोपियों तक पहुंचने के लिए तकनीकी साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है। -बलवंत सिंह रावत, सीओ
साइबर ठगी से बचने के लिए रहें सतर्क, डरें नहीं
क्या करें
-अनजान नंबर से वीडियो कॉल, फोन या मैसेज आने पर पहचान और दावे की पुष्टि करें।
-पुलिस, सीबीआई, ईडी, बैंक या किसी अन्य सरकारी संस्था के नाम पर धमकी मिले तो घबराएं नहीं। संबंधित विभाग के आधिकारिक नंबर से स्वयं संपर्क कर सत्यापन करें।
-कोई व्यक्ति फर्जी दस्तावेज, आईडी, नोटिस या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड दिखाए तो उसे सच न मानें।
-बैंक खाते, एटीएम कार्ड, यूपीआई, ओटीपी, पासवर्ड और अन्य निजी जानकारी किसी से साझा न करें।
-ठगी होने पर तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करें और संबंधित बैंक को भी सूचना दें।
-संदिग्ध मोबाइल नंबर, लिंक, स्क्रीनशॉट, चैट और लेनदेन की जानकारी सुरक्षित रखें, ताकि पुलिस जांच में मदद मिल सके।
क्या न करें
-डिजिटल अरेस्ट जैसी धमकी से डरकर पैसे न भेजें। कोई भी वैध सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर आपको गिरफ्तार या डिजिटल रूप से नजरबंद नहीं करती।
-अनजान व्यक्ति के कहने पर किसी खाते में रकम ट्रांसफर न करें।
-फर्जी दस्तावेज, पहचान पत्र या सरकारी मुहर देखकर तुरंत भरोसा न करें।
-अनजान लिंक पर क्लिक न करें और किसी के कहने पर रिमोट एक्सेस/स्क्रीन शेयरिंग ऐप इंस्टॉल न करें।
-ओटीपी, यूपीआई पिन, एटीएम पिन या बैंकिंग पासवर्ड कभी न बताएं।
-ठगी का पता चलने के बाद भी शर्म या डर के कारण शिकायत करने में देरी न करें।