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कोआपरेटिव ड्रग फैक्ट्री को पुराना गौरव वापस दिलाने की लगाई गुहार
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को आपरेटिव ड्रग फैक्ट्री का भवन। अमर उजाला
- फोटो : RANIKHET
रानीखेत (अल्मोड़ा)। यहां गनियाद्योली स्थित कोआपरेटिव ड्रग फैक्ट्री उपेक्षा के चलते बदहाली का दंश झेल रही है। कर्मचारियों की संख्या काफी कम हो चुकी है। फैक्ट्री के भवनों की स्थिति भी काफी दयनीय हो चुकी है। सहकारी संघ के अध्यक्ष मोहन नेगी ने राज्य सहकारी संघ लिमिटेड के प्रबंध निदेशक को ज्ञापन भेजकर फैक्ट्री का संरक्षण करने और इसके विकास के लिए व्यवस्थाएं दुरुस्त करने की मांग उठाई है।
बता दें कि 1954 में भारत रत्न स्व. पं. गोविंद बल्लभ पंत ने गनियाद्योली में केसीडीएफ की भूमि पर ड्रग फैक्ट्री की स्थापना की। फैक्ट्री के पास ही भेषेज विकास संघ की भूमि पर जड़ी बूटियों का उत्पादन होता था। राज्य बनने के बाद फैक्ट्री के दिन बहुरने की उम्मीद थी, लेकिन सरकारों के उदासीन रवैये के कारण भेषेज कार्यालय ही बंद हो गया। जड़ी बूटियों का उत्पादन भी ठप हो गया। अब फैक्ट्री को जड़ी बूटियों के लिए दिल्ली, हरिद्वार, हाथरस अन्य प्रदेशों पर निर्भर रहना पड़ता है। कभी यहां 200 कर्मचारी काम करते थे, वर्तमान में केवल 30 कर्मचारी कार्य कर रहे हैं।
कोआपरेटिव ड्रग फैक्ट्री सहकारी संघ के अध्या मोहन ने प्रबंध निदेशक को ज्ञापन भेजकर पहाड़ के इस उद्योग का संरक्षण करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते फैक्ट्री का संरक्षण नहीं किया गया तो यह उद्योग स्वत: खत्म हो जाएगा। फैक्ट्री के भवनों की स्थिति भी ठीक नहीं है। कहा कि यदि फैक्ट्री का संरक्षण होगा तो कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित होगा, नए युवाओं को रोजगार मिलेगा और फैक्ट्री को उसका पुराना गौरव वापस मिल पाएगा।
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बता दें कि 1954 में भारत रत्न स्व. पं. गोविंद बल्लभ पंत ने गनियाद्योली में केसीडीएफ की भूमि पर ड्रग फैक्ट्री की स्थापना की। फैक्ट्री के पास ही भेषेज विकास संघ की भूमि पर जड़ी बूटियों का उत्पादन होता था। राज्य बनने के बाद फैक्ट्री के दिन बहुरने की उम्मीद थी, लेकिन सरकारों के उदासीन रवैये के कारण भेषेज कार्यालय ही बंद हो गया। जड़ी बूटियों का उत्पादन भी ठप हो गया। अब फैक्ट्री को जड़ी बूटियों के लिए दिल्ली, हरिद्वार, हाथरस अन्य प्रदेशों पर निर्भर रहना पड़ता है। कभी यहां 200 कर्मचारी काम करते थे, वर्तमान में केवल 30 कर्मचारी कार्य कर रहे हैं।
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कोआपरेटिव ड्रग फैक्ट्री सहकारी संघ के अध्या मोहन ने प्रबंध निदेशक को ज्ञापन भेजकर पहाड़ के इस उद्योग का संरक्षण करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते फैक्ट्री का संरक्षण नहीं किया गया तो यह उद्योग स्वत: खत्म हो जाएगा। फैक्ट्री के भवनों की स्थिति भी ठीक नहीं है। कहा कि यदि फैक्ट्री का संरक्षण होगा तो कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित होगा, नए युवाओं को रोजगार मिलेगा और फैक्ट्री को उसका पुराना गौरव वापस मिल पाएगा।
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