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सेनाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ना अच्छा संकेत
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
Updated Thu, 15 Sep 2016 11:04 PM IST
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भारतीय मूल की बनरीत खारा।
- फोटो : अमर उजाला
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युद्ध का मैदान हो चाहे कोई दूसरा क्षेत्र महिलाएं कहीं भी पुरुषोँ से पीछे नहीं हैं। भारतीय और अमेरिकी सेनाओं में जिस तरह से महिलाओं की संख्या में इजाफा हो रहा है वह भविष्य के लिए अच्छा संकेत है। यह बात अमेरिकी सेना में शामिल भारतीय मूल की स्टाफ सार्जेंट बलरीत खारा ने कही।
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खारा दो साल पूर्व भी यहां युद्धाभ्यास के लिए अमेरिकी सेना की टुकड़ी में शामिल थीं। सार्जेंट बलरीत खारा मूल रूप से पंजाब के भटिंडा की रहने वाली हैं। उन्होंने बताया कि युद्धाभ्यास का मुख्य मकसद दोनों देशों की संस्कृति और युद्ध कौशल की तकनीकों को साझा करना है।
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उन्होंने कहा कि भारतीय और अमेरिकी सेना के कार्यों में खास अंतर नहीं है। अमेरिकी सैनिक युद्ध कौशल में माहिर है, जबकि भारतीय सैनिकों में सहनशीलता है। भारतीय सेना से सहनशीलता को सीखा जाएगा। उन्होंने भारतीय सेना को सबसे बड़ी डेमोक्रेसी करार दिया। उनके साथ इराक आपरेशन में तीन सौ सैनिकों का प्रतिनिधित्व कर चुकी अमेरिकी सेना की केरालाइन मोराइली भी मौजूद थीं। अमेरिकी सैन्य दल में शामिल ब्रिगेड कमांडर कर्नल डेविड फोले ने भी भारतीय सैनिकों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि अनुशासन के बल पर मनुष्य आगे बढ़ सकता है। अमेरिकी सेना में ले. कर्नल कैनथ कूप भी शामिल हैं। वह पिछले छह युद्धाभ्यासों में भाग ले चुके हैं। उनके अनुभवों का लाभ दोनों देशों की सेनाएं उठाएंगी।
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