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प्राचीन मंदिर समूहों के स्वरूप में नहीं होगा बदलाव

Fri, 11 Dec 2015 11:13 PM IST
ब्यूरो /अमर उजाला, द्वाराहाट (अल्मोड़ा)।
ब्यूरो /अमर उजाला, द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। Updated Fri, 11 Dec 2015 11:13 PM IST
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I would not change the nature of the ancient temple groups

द्वारिका नगरी के नाम से विख्यात द्वाराहाट के प्राचीन मंदिर समूहों के सुंदरीकरण का कार्य जोरशोर से चल रहा है। इस बार 10वीं सदी में बनी कचहरी देवाल और मनियान मंदिर समूहों का सुंदरीकरण होना है।

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कचहरी देवाल मंदिर के प्रांगण की खुदाई में मिले दो जलाधारी योनी पीठ, 16 चक्रीय प्रस्तर को पुरातत्व विभाग मंदिर के ही अवशेष मान रहा है। फिलहाल इन्हें एकत्रित किया जा रहा है। सुंदरीकरण में मंदिरों का स्वरूप प्राचीन ही रहेगा।
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ऐतिहासिक नगरी द्वाराहाट को कत्यूरी शासकों ने राजधानी के रूप में बसाया था। पूरे क्षेत्र में कुल 30 मंदिर हैं। इसके शिखर पर आदि शक्ति पीठ मां दूनागिरि, उत्तर की ओर प्राचीन नागार्जुन मंदिर, दक्षिण में बद्रीनाथ मंदिर, पूर्व की ओर राजमहल कचहरी देवाल मंदिर स्थापित हैं।
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इन मंदिरों के सुंदरीकरण का कार्य चल रहा है। यह कार्य 2004 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की ओर से किया जा रहा है। हर साल एक या दो मंदिरों का सुंदरीकरण होता है। इस साल 10वीं सदी में बने कचहरी देवाल, मनियान मंदिरों के सौंदर्यीकरण के लिए 28 लाख रुपये स्वीकृत हुए हैं।

जिससे मंदिरों के आंगन समतलीकरण, रेलिंग ठीक करना, रास्ता निर्माण, प्रांगण में पटाल, प्रांगण के समतलीकरण समेत कुछ मंदिरों का जीर्णोद्धार भी किया जा रहा है।


भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के प्रमुख डॉ. बसंत स्वर्णकार ने बताया कि कचहरी देवाल मंदिर के प्रांगण की खुदाई में मंदिर के कुछ अवशेष मिले हैं। इन्हें एकत्रित किया जा रहा है।

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