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30 जून तक कैसे बनेगी कपिलेश्वर पंपिंग योजना!
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
Updated Tue, 22 Dec 2015 12:02 AM IST
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प्रदेश सरकार विकास योजनाओं के बजट तो मुहैया करा रही है, पर कार्यदायी संस्थाओं की उदासीनता से योजनाएं के तय समय पर पूरी नहीं होने से लोगों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने सोमवार को लमगड़ा ब्लॉक में 14.58 करोड़ की लागत से निर्माणाधीन कपिलेश्वर-बानणीदेवी पंपिंग योजना का निरीक्षण किया। 30 जून 2016 में पूरी हो जाने वाली योजना में अब तक 30 फीसदी काम भी पूरा नहीं हुआ है।
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विधानसभा अध्यक्ष के निरीक्षण के साथ अमर उजाला की टीम ने भी पड़ताल की। प्रात: 9.30 बजे गढ़ापानी में सड़क से उतर कर श्री कुंजवाल करीब डेढ़ किमी की पैदल चढ़ाई कर बानणीदेवी मंदिर के निकट निर्माणाधीन टैंक स्थल पहुंचे। जल निगम के अधिशासी अभियंता राम बाबू मौर्या नेक बताया कि 100 केएल क्षमता वाले इस टैंक से अलग-अलग गांवों में बनने वाले सात छोटे टैंकों में पानी सप्लाई होगा।
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छोटे टैंकों से गांव समितियां गांव के लिए वितरण लाइनें बिछाएंगी, लेकिन अभी इन टैंकों का निर्माण शुरू नहीं हुआ है। इसके बाद 10:25 बजे जलना टॉप में 200 केएल क्षमता के टैंक निर्माण स्थल पहुंचे। यहां करीब चार मजदूर एक स्थान पर खुदाई कर रहे थे। साइट में कुछ भी निर्माण सामग्री नहीं थी। अधिशासी अभियंता ने बताया कि इस टैंक से निकलने वाली लाइन से भी सात अन्य टैंकों में पानी की सप्लाई होनी है।
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सात स्थानों पर छोटे टैंकों का निर्माण शुरू नहीं होने की जानकारी मिलने पर कुंजवाल ने कड़ी नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को खूब फटकार लगाई। कहा कि 30 जनवरी को वह फिर से यहां पहुंचेंगे। तब तक टैंक नहीं बना तो खैर नहीं। 11:50 बजे वह सत्यूं गांव में निर्माणाधीन पंप हाउस स्थल पहुंचे। पंप हाउस के लिए कुछ पीलर ही खड़े किए गए थे। 150 केएल के टैंक का निर्माण भी शुरू नहीं हुआ था।
काम की काफी धीमी प्रगति पर कुंजवाल भड़क उठे। उन्होंने कहा कि एक साल के भीतर विभाग 25 फीसदी काम पूरा नहीं कर सका है, जबकि ठेकेदार को 3.24 करोड़ का भुगतान भी हो गया है। उन्होंने पूछा कि 30 जून तक शेष 75 फीसदी काम कैसे पूरा होगा।
फिर कहा कि काम में देरी क्यों हुई इससे मतलब नहीं हर हाल में 30 जून तक सभी गांवों में पानी नहीं चला तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। इसके बाद वह आगे के निरीक्षण को पैदल ही सिमल्टी, कपिलेश्वर को रवाना हो गए। काम की रफ्तार इसी तरह सुस्त रही तो दो साल में भी काम पूरा होने की संभावना नहीं है।