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गगास को बचाने के लिए महिलाओं ने कमर कसी
अमर उजाला ब्यूराे अल्माेड़ा
Updated Sun, 14 May 2017 11:01 PM IST
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गगास बचाओ अभियान के तहत भतौरा में बैठक करतीं महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला
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सदाबहानी गगास नदी के गिरते जल स्तर को लेकर क्षेत्र की महिलाएं भी चिंतित हैं। गगास बचाओ अभियान के तहत महिला एकता परिषद, महिला मंगल दल भतौरा और बोरखोला की बैठक में गगास को बचाने के लिए हर संभव प्रयास करने का संकल्प लिया गया। नदी के उद्गम स्थल भटकोट और पांडवखोली की तलहटी पर स्थित स्रोतों को रिचार्ज करने के लिए वृहद पौधरोपण, चाल-खाल बनाने पर जोर दिया गया। तय हुआ कि सदाबहानी गगास को जनसहयोग से बचाने की अमर उजाला फाउंडेशन की मुहिम के तहत 22 मई से प्रस्तावित पदयात्रा को पूरा सहयोग दिया जाएगा।
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पंचायत घर भतौरा में आयोजित बैठक में महिलाओं ने कहा कि क्षेत्र का जन-जीवन गगास नदी पर निर्भर है, लेकिन पिछले कुछ सालों से नदी का जल स्तर निरंतर गिर रहा है। जंगलों में बेतहाशा आग लगने से छोटे-छोटे पेड़-पौधे नष्ट हो रहे हैं, चीड़ के वन विकसित होने से पानी का संचय नहीं हो पा रहा है। उद्गम स्थल सहित कई गाड़-गधेरों में जानवरों को पानी पिलाने के लिए पहले लोग चाल-खाल बनाते थे, इससे पानी का संचय होता था, लेकिन देखरेख के अभाव में सारे चाल-खाल दम तोड़ चुके हैं और गगास नदी के सहायक गधेरे पूरी तरह से सूख चुके हैं। नदी को बचाने के लिए स्वयं ग्रामीणों को ही आगे आना होगा। यदि अभी भी नहीं चेते तो आने वाले कुछ वर्षों में नदी का अस्तित्व मिट जाएगा और पानी की त्राहि-त्राहि मच जाएगी।
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बैठक में अमर उजाला फाउंडेशन की गगास बचाओ अभियान की सराहना की गई और सभी क्षेत्रवासियों से मिलजुलकर इस मुहिम को मंजिल तक पहुंचाने का आह्वान किया गया। अमर उजाला टीम ने बताया कि अमर उजाला फाउंडेशन ने सदाबहानी गगास को जनता के सहयोग से बचाने का अभियान शुरू किया है। इसके तहत 22 और 23 मई को क्षेत्र में पदयात्रा होगी। इसके बाद भी नदी को बचाने की मुहिम जारी रहेगी। विभागों के माध्यम से पौध रोपण और चाल-खालों का निर्माण कराया जाएगा। बैठक में एकता परिषद की सचिव मधुबाला कांडपाल, माया देवी, ललित कैड़ा, पार्वती देवी, कृपाल सिंह, हीरा सिंह, हेमा जोशी, प्रीति देवी, नारायणी देवी, तारा देवी, सरपंच सुरेंद्र कैड़ा, वन दरोगा देवेंद्र सिंह, किशन सिंह, बचे सिंह, मोहन सिंह सहित कई लोग मौजूद थे। संचालन मोहन कांडपाल ने किया।
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कोट----------
गाड़-गधेरों में चाल-खाल बनाने, हार्वेस्टिंग टैंक बनाने, पौधरोपण जैसे कार्यों से निश्चित ही भू-जल रिचार्ज किया जा सकता है और नदी के अस्तित्व को बचाया जा सकता है। उत्तराखंड सरकार की कैंपा और जायका योजनाओं के तहत ऐसे कार्य कराने का प्रावधान है। गांवों से पंचायतें ऐसे प्रस्ताव बनाकर विभाग को भेजें तो बजट मिलने ये काम करा दिए जाएंगे।
-देवेंद्र सिंह कैड़ा, फॉरेस्टर, वन विभाग, सोमेश्वर रेंज