{"_id":"650bcddb05a5c4c9230f7b95","slug":"gic-is-in-bad-shape-department-put-red-mark-ranikhet-news-c-232-1-alm1001-3147-2023-09-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Almora News: रधुलीपीपल जीआईसी बदहाल, विभाग ने लगाया लाल निशान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Almora News: रधुलीपीपल जीआईसी बदहाल, विभाग ने लगाया लाल निशान
Thu, 21 Sep 2023 10:30 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Thu, 21 Sep 2023 10:30 AM IST
विज्ञापन
ताड़ीखेत विकासखंड के रधुलीपीतल इंटर कॉलेज के जर्जर भवन पर अंकित खतरे का निशान। संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
चेतन जोशी
रानीखेत (अल्मोड़ा)। प्रसिद्ध कैंसर स्पेशलिस्ट पद्मश्री प्रो. एमसी पंत सहित देश को कई प्रतिभाएं देने वाला ताड़ीखेत विकासखंड का रधुलीपीतल इंटर कॉलेज बदहाली की मार झेल रहा है। हालात ये हैं कि यह विद्यालय भवन कब ध्वस्त हो जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। दीवारों पर पड़ीं दरारें इस ओर साफ इशारा कर रही हैं और भवन पर खतरे का निशान लगाकर जिम्मेदारी निभा दी गई है। ऐसे में यहां 75 विद्यार्थी खतरे के बीच पढ़ने के लिए मजबूर हैं।
वर्ष 1960 में खोले गए इंटर कॉलेज रधुलीपीपल में गंगोड़ा, पीपली, अम्याड़ी, कुनकोली, तड़ी ज्यूली, बग्वाली सहित आसपास के 25 गांवों के विद्यार्थी सुनहरे भविष्य के सपने लिए पहुंचते हैं। इस इंटर कॉलेज से पढ़कर कई प्रतिभाओं ने देश के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। लेकिन 63 साल बाद भी इस विद्यालय का नया भवन नहीं बन सका है और पुराना भवन जर्जर हो चुका है।
विद्यालय भवन की छत जर्जर और दीवारों पर बड़ी-बड़ी दरारें पड़ने से इसके गिरने का खतरा बना हुआ है। विभाग ने जर्जर भवन की दीवार पर खतरे का निशान लगाते हुए कई बार इसके ध्वस्तीकरण का प्रस्ताव भेजा, जिसे अब तक सुनवाई नहीं हुई। ऐसे में विद्यार्थी जान जोखिम में पढ़ने के लिए मजबूर हैं।
विज्ञापन
85 प्रतिशत घट गई छात्रसंख्या
रानीखेत। जर्जर हो चुके विद्यालय भवन में विद्यार्थियों की सुरक्षा को देखते हुए अभिभावक उन्हें यहां भेजने से दूरी बनाने लगे हैं। ऐसे में यहां की छात्र संख्या हर सत्र में घट रही है। हालात यह हैं कि बीते 11 सालों में यहां की छात्र संख्या में 85 प्रतिशत की गिरावट आई है। विभागीय आकड़ों के मुताबिक वर्ष 2012 में यहां छात्र संख्या 500 थीं जो अब घटकर केवल 75 रह गई है, जबकि यहां सभी शिक्षकों की तैनाती है। संवाद
प्रयोगशाला के बिना विज्ञान का कैसे मिलेगा ज्ञान
रानीखेत। इंटर कॉलेज में कक्षा 11 और 12 वीं के विद्यार्थियों के लिए प्रयोगशाला नहीं है। इन कक्षाओं में पढ़ने वाले 25 विद्यार्थियों को बगैर प्रयोगशाला के विज्ञान का ज्ञान नहीं मिल रहा है। ऐसे में विद्यार्थी परेशान हैं और अभिभावक उनके भविष्य को लेकर चिंतित। संवाद
इस विद्यालय से पढ़े हैं मशहूर कैंसर स्पेशलिस्ट पद्मश्री प्रो. एमसी पंत
रानीखेत। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के रेडियोलॉजी विभाग के पूर्व प्रमुख और पद्मश्री डॉ. एमसी पंत ने इसी विद्यालय से शिक्षा प्राप्त की। लखनऊ कैंसर इंस्टीट्यूट, उत्तराखंड के सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज, स्वामी राम इंस्टीट्यूट में कैंसर विभाग की स्थापना डॉ. पंत के प्रयास से संभव हुई। उन्होंने कैंसर रोग विषय पर 12 से अधिक पुस्तकें लिखीं हैं जो आज भी इसके उपचार में सहायक बन रही हैं।
कोट
जर्जर हो चुके इंटर कॉलेज के भवन के ध्वस्तीकरण का प्रस्ताव भेजा गया है। स्वीकृति के बाद ही इसे ध्वस्त कर नया भवन बनाया जाएगा। - एसएस चौहान, खंड शिक्षा अधिकारी, ताड़ीखेत।
रानीखेत (अल्मोड़ा)। प्रसिद्ध कैंसर स्पेशलिस्ट पद्मश्री प्रो. एमसी पंत सहित देश को कई प्रतिभाएं देने वाला ताड़ीखेत विकासखंड का रधुलीपीतल इंटर कॉलेज बदहाली की मार झेल रहा है। हालात ये हैं कि यह विद्यालय भवन कब ध्वस्त हो जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। दीवारों पर पड़ीं दरारें इस ओर साफ इशारा कर रही हैं और भवन पर खतरे का निशान लगाकर जिम्मेदारी निभा दी गई है। ऐसे में यहां 75 विद्यार्थी खतरे के बीच पढ़ने के लिए मजबूर हैं।
वर्ष 1960 में खोले गए इंटर कॉलेज रधुलीपीपल में गंगोड़ा, पीपली, अम्याड़ी, कुनकोली, तड़ी ज्यूली, बग्वाली सहित आसपास के 25 गांवों के विद्यार्थी सुनहरे भविष्य के सपने लिए पहुंचते हैं। इस इंटर कॉलेज से पढ़कर कई प्रतिभाओं ने देश के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। लेकिन 63 साल बाद भी इस विद्यालय का नया भवन नहीं बन सका है और पुराना भवन जर्जर हो चुका है।
विज्ञापन
विद्यालय भवन की छत जर्जर और दीवारों पर बड़ी-बड़ी दरारें पड़ने से इसके गिरने का खतरा बना हुआ है। विभाग ने जर्जर भवन की दीवार पर खतरे का निशान लगाते हुए कई बार इसके ध्वस्तीकरण का प्रस्ताव भेजा, जिसे अब तक सुनवाई नहीं हुई। ऐसे में विद्यार्थी जान जोखिम में पढ़ने के लिए मजबूर हैं।
विज्ञापन
85 प्रतिशत घट गई छात्रसंख्या
रानीखेत। जर्जर हो चुके विद्यालय भवन में विद्यार्थियों की सुरक्षा को देखते हुए अभिभावक उन्हें यहां भेजने से दूरी बनाने लगे हैं। ऐसे में यहां की छात्र संख्या हर सत्र में घट रही है। हालात यह हैं कि बीते 11 सालों में यहां की छात्र संख्या में 85 प्रतिशत की गिरावट आई है। विभागीय आकड़ों के मुताबिक वर्ष 2012 में यहां छात्र संख्या 500 थीं जो अब घटकर केवल 75 रह गई है, जबकि यहां सभी शिक्षकों की तैनाती है। संवाद
प्रयोगशाला के बिना विज्ञान का कैसे मिलेगा ज्ञान
रानीखेत। इंटर कॉलेज में कक्षा 11 और 12 वीं के विद्यार्थियों के लिए प्रयोगशाला नहीं है। इन कक्षाओं में पढ़ने वाले 25 विद्यार्थियों को बगैर प्रयोगशाला के विज्ञान का ज्ञान नहीं मिल रहा है। ऐसे में विद्यार्थी परेशान हैं और अभिभावक उनके भविष्य को लेकर चिंतित। संवाद
इस विद्यालय से पढ़े हैं मशहूर कैंसर स्पेशलिस्ट पद्मश्री प्रो. एमसी पंत
रानीखेत। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के रेडियोलॉजी विभाग के पूर्व प्रमुख और पद्मश्री डॉ. एमसी पंत ने इसी विद्यालय से शिक्षा प्राप्त की। लखनऊ कैंसर इंस्टीट्यूट, उत्तराखंड के सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज, स्वामी राम इंस्टीट्यूट में कैंसर विभाग की स्थापना डॉ. पंत के प्रयास से संभव हुई। उन्होंने कैंसर रोग विषय पर 12 से अधिक पुस्तकें लिखीं हैं जो आज भी इसके उपचार में सहायक बन रही हैं।
कोट
जर्जर हो चुके इंटर कॉलेज के भवन के ध्वस्तीकरण का प्रस्ताव भेजा गया है। स्वीकृति के बाद ही इसे ध्वस्त कर नया भवन बनाया जाएगा। - एसएस चौहान, खंड शिक्षा अधिकारी, ताड़ीखेत।