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महिलाओं ने गौरा महेश की पूजा कर पति के दीर्घ आयु की कामना की
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अल्मोड़ा के चौसार में सातूं-आठूं पर सामूहिक रूप से गीत गाती महिलाएं।
- फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा/बागेश्वर। नगर में सातूूं-आठूं (डोर दुबड़ा) पर्व धूमधाम से मनाया गया। महिलाओं ने गौरा महेश की पूजा अर्चना कर पति के दीर्घायु और सुख समृद्धि की कामना की। चौसार निवासी मुन्नी पंत के आवास में हुए कार्यक्रम में महिलाओं ने महोत्सव के गीत गाए। नव विवाहिताओं में काफी उत्साह दिखाई दिया।
इससे पहले पांच अनाज के पौधों और तने से भगवान महेश्वर और गौरा की प्रतिमाएं बनाई गई। नए वस्त्र पहना कर दोनों प्रतिमाओं को स्थापित किया गया। भगवान शिव पार्वती को ताजे फल, बिरूड़ (पांच अनाजों गेहूं, गहत, चना, मक्का) आदि का भोग लगाया गया।
इन अनाजों को बिरूड़ पंचमी के दिन पानी में बिगो दिया गया था। जिसे सांतू-आठूं के लिन गौरा महेश्वर को अर्पित किया गया। महिलाओं ने इस पर्व पर उपवास रखकर पति के दीर्घ आयु की कामना की।
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नंदादेवी मंदिर के पुजारी आचार्य तारा दत्त जोशी ने पूजा कराई। इस मौके पर नलिनी पंत, दीपा तिवारी, तारा अग्निहोत्री, हेमा अग्निहोत्री, दीपा अग्निहोत्री, हेमांगिनी त्रिपाठी, हेमा त्रिपाठी, रक्षा पांडे, लक्ष्मी पंत आदि थीं।
बागेश्वर जिले में सातूं-आठूं पर्व का समापन हो गया है। अष्टमी के दिन महिलाओं ने भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की। भगवान से सुख, समृद्धि और धन-धान्य का आशीर्वाद मांगा। सातूं-आठूं पर्व कुमाऊं का पारंपरिक उत्सव है।
भाद्रपद महीने की सप्तमी और अष्टमी को होने वाले इस पर्व में महिलाएं उल्लास के साथ भागीदारी करती है। सप्तमी के दिन सातूं मनाया जाता है। अष्टमी यानि आठूं पर्व को भगवान शिव की कुशा आदि से मूर्ति का निर्माण किया जाता है।
पंडित मनोज तिवारी ने बताया कि गौरा-महेश्वर की पूजा को लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं। नगर के चौरासी, कठायतबाड़ा, नदीगांव, कफलखेत, बिलौना, मंडलसेरा आदि स्थानों में सातूं-आठूं का पर्व उल्लास से मनाया गया।
गौरा-महेश्वर की मूर्ति को विसर्जित किया गया। चौरासी में सपन्न हुई पूजा में किरन उप्रेती, गीता तिवारी, निर्मला जोशी, गीता कांडपाल आदि शामिल हुए। पूजा पंडित मनोज तिवारी ने संपन्न कराई।
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इससे पहले पांच अनाज के पौधों और तने से भगवान महेश्वर और गौरा की प्रतिमाएं बनाई गई। नए वस्त्र पहना कर दोनों प्रतिमाओं को स्थापित किया गया। भगवान शिव पार्वती को ताजे फल, बिरूड़ (पांच अनाजों गेहूं, गहत, चना, मक्का) आदि का भोग लगाया गया।
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इन अनाजों को बिरूड़ पंचमी के दिन पानी में बिगो दिया गया था। जिसे सांतू-आठूं के लिन गौरा महेश्वर को अर्पित किया गया। महिलाओं ने इस पर्व पर उपवास रखकर पति के दीर्घ आयु की कामना की।
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नंदादेवी मंदिर के पुजारी आचार्य तारा दत्त जोशी ने पूजा कराई। इस मौके पर नलिनी पंत, दीपा तिवारी, तारा अग्निहोत्री, हेमा अग्निहोत्री, दीपा अग्निहोत्री, हेमांगिनी त्रिपाठी, हेमा त्रिपाठी, रक्षा पांडे, लक्ष्मी पंत आदि थीं।
बागेश्वर जिले में सातूं-आठूं पर्व का समापन हो गया है। अष्टमी के दिन महिलाओं ने भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की। भगवान से सुख, समृद्धि और धन-धान्य का आशीर्वाद मांगा। सातूं-आठूं पर्व कुमाऊं का पारंपरिक उत्सव है।
भाद्रपद महीने की सप्तमी और अष्टमी को होने वाले इस पर्व में महिलाएं उल्लास के साथ भागीदारी करती है। सप्तमी के दिन सातूं मनाया जाता है। अष्टमी यानि आठूं पर्व को भगवान शिव की कुशा आदि से मूर्ति का निर्माण किया जाता है।
पंडित मनोज तिवारी ने बताया कि गौरा-महेश्वर की पूजा को लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं। नगर के चौरासी, कठायतबाड़ा, नदीगांव, कफलखेत, बिलौना, मंडलसेरा आदि स्थानों में सातूं-आठूं का पर्व उल्लास से मनाया गया।
गौरा-महेश्वर की मूर्ति को विसर्जित किया गया। चौरासी में सपन्न हुई पूजा में किरन उप्रेती, गीता तिवारी, निर्मला जोशी, गीता कांडपाल आदि शामिल हुए। पूजा पंडित मनोज तिवारी ने संपन्न कराई।