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घर से लेकर बाजार तक बंदरों ने किया नाक में दम
अमर उजाला ब्यूराे अल्माेड़ा
Updated Fri, 05 May 2017 10:44 PM IST
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अल्मोड़ा में उतपात मचाते बंदर।
- फोटो : अमर उजाला
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बंदरों के आतंक से लोग परेशान हैं। घर से स्कूल और बाजार तक बंदर समस्या बने हुए हैं। कूड़ा बिखरा होने और लोगों द्वारा खाद्य सामग्री फेंकने से बंदर अक्सर इन जगहों को अपना अड्डा बनाए हुए हैं। पिछले दिनों हाइकोर्ट ने किसी भी स्थान पर बंदरों को खाद्य सामग्री देने पर पाबंदी लगा दी थी। इसके बाद वन विभाग ने महज खानापूरी करते हुए शहर के कुछ जगहों को संवेदनशील घोषित कर पल्ला झाड़ लिया। बंदरों को रोकने के लिए कुछ नहीं किया गया।
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शहर और ग्रामीण इलाकों में बंदरों की समस्या कुछ इस कदर ज्यादा हो गई है कि लोगों को बंदरों की फौज देखकर अपना रास्ता तक बदलना पड़ता है। बंदर घरों में घुसकर सामान उठा ले जाते हैं। साथ ही खेती बाड़ी को भी भारी नुकसान पहुंचाते हैं। मालूम हो कि 2015 में मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक उत्तराखंड ने आदेश पारित कर वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत किसी भी स्थान पर बंदरों को खाद्य सामग्री देने पर प्रतिबंध लगाया था। जिस पर इसी साल जनवरी में उत्तराखंड हाइकोर्ट ने भी मुहर लगाते हुए इस संबंध में व्यापक प्रचार-प्रसार करने के आदेश दिए थे। इसके बावजूद इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
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पिछले दिनों वन विभाग ने भी खानापूरी करते हुए शहर के कुछ क्षेत्रों कैंट, मल्ला जोशीखोला, कर्नाटक खोला, पांडेखोला, रानीधारा, चीनाखान, पोखरखाली को सर्वाधिक संवेदनशील घोषित करके लोगों से बंदरों को खाद्य पदार्थ नहीं देने की अपील जारी कर दी, लेकिन बंदरों के आतंक से मुक्ति दिलाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। ।
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