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...लगा जैसे सच में भोलेनाथ के चरणों में बैठे हों

Mon, 18 Sep 2017 12:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, चौखुटिया (अल्मोड़ा)।
अमर उजाला ब्यूरो, चौखुटिया (अल्मोड़ा)। Updated Mon, 18 Sep 2017 12:09 AM IST
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felt as if i was sitting on lord shankar's laps
मानसरोवर के सामने खड़े यात्री गिरीश चंद्र भट्ट। - फोटो : अमर उजाला
कैलास मानसरोवर का अलौकिक नजारा देखकर पूरी थकान तो दूर हुई ही, साथ ही ऐसा लगा जैसे सच में भोलेनाथ के चरणों में बैठे हों। यह बात अंतिम और 18वें यात्री दल में शामिल सेवानिवृत्त शिक्षक द्वाराहाट अंतर्गत धनखल गांव निवासी गिरीश चंद्र भट्ट ने अपनी यात्रा के अनुभव साझा करते हुए कही। अमर उजाला से अपने अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि पूरी यात्रा में 27 दिन का समय लगा।
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इसमें कुमाऊं मंडल विकास निगम, उत्तराखंड पुलिस, आईटीबीपी के अलावा चीन की सीमा लिपुलेख दर्रा पहुंचने पर चीन के विदेश मंत्रालय के सुरक्षा अधिकारियों की टीम का भरपूर सहयोग मिला। लिपुलेख से तकलाकोट, दारचीन व डोलमा दर्रा के बाद कैलाश पर्वत के दर्शन हुए। बताया कि मानसरोवर की 80 किमी बस से सफर करने के बाद कैलास पर्वत की परिक्रमा पैदल की, जिसमें तीन दिन का समय लगा।
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उन्होंने बताया कि कूंगू से मानसरोवर व कैलास पर्वत का नजारा सबसे आकर्षक दिखाई देता है। कैलाश पर्वत पर भोले शंकर और मां पार्वती की सुंदर आकृति दिखाई देती है, जबकि दूसरे छोर पर हनुमान जी की आकृति है। भट्ट ने बताया कि उनकी टीम में कुल 34 लोग थे, जिनमें से दो लोगों को अस्वस्थता के चलते रास्ते से ही लौटना पड़ा। 
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चीन में किया छह दिन का साठ हजार का भुगतान 
गिरीश चंद्र भट्ट ने बताया कि कुमाऊं मंडल विकास निगम द्वारा 22 दिन के सफर सहित भोजन आदि का कुल 35 हजार रुपये लिया गया, जबकि चीन के अधिकारियों को महज छह दिन का 60 हजार का भुगतान करना पड़ा। चीन में भाषाई परेशानी तो थी, लेकिन वहां के अधिकारियों का व्यवहार अच्छा था। 


चीन की सपाट बनी सड़कों में है सफर का आनंद 
गिरीश चंद्र भट्ट ने बताया कि चीन के लिपुलेख से बस में सवार हुए। चीन की सड़क देखी तो देखते रहे गए। सपाट बनी सड़क में सरपट दौड़ते वाहनों में सफर का अलग ही आनंद है। चीन में हर जगह पर सौर ऊर्जा से संचालित बिजली का उपयोग हो रहा है। इसके लिए बड़े-बड़े संयंत्र लगाए गए हैं। पूरा नजारा देखने के बाद कह सकते हैं कि विकास के मामले में अभी हमारे देश को बहुत कुछ करना है।
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