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मैदानी क्षेत्र की तर्ज पर पहाड़ में भी धान का समर्थन मूल्य निर्धारित करना जरूरी

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sun, 11 Oct 2020 10:21 PM IST
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Farming in Ranikhet
रानीखेत (अल्मोड़ा)। प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्र की उपजाऊ घाटियों में धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करने की मांग उठने लगी है। घाटियों में प्रतिवर्ष हजारों क्विंटल धान की पैदावार होती है। बाजार की समुचित व्यवस्था न होने के कारण किसान अनाज को औने-पौने दामों पर बेचने को मजबूर होते हैं। मैदानी क्षेत्रों की तर्ज पर पहाड़ में भी समर्थन मूल्य निर्धारित करने की मांग सरकार तक भी पहुंचाई गई है। शनिवार को यहां ड्रग फैक्टरी में माइक्रो बायोलॉजिकल लैब का उद्घाटन करने पहुंचे डॉ. धन सिंह रावत से पूर्व दर्जा राज्यमंत्री नरेंद्र सिंह रौतेला ने मुलाकात की। उन्होंने कहा कि सोमेश्वर, चौखुटिया, बागेश्वर सहित प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में कई घाटियां खेती के लिए उपयुक्त हैं। इन घाटियों में किसान हाड़ तोड़ मेहनत कर धान का उत्पादन प्रचुर मात्रा में कर लेते हैं, लेकिन बाजार समय पर उपलब्ध नहीं हो पाता। मैदानी क्षेत्रों में धान का समर्थन मूल्य 18.80 रुपये निर्धारित है। उन्होंने कहा कि मैदानी क्षेत्रों की तर्ज पर पहाड़ की उपजाऊ घाटियों में भी धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया जाना चाहिए।
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