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हिमालयी राज्यों को जल सुरक्षा देना सरकार की प्राथमिकताओं में है: अग्रवाल
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सोमेश्वर में परियेजना का निरीक्षण करते केंद्र के अतिरिक्त सचिव रवि अग्रवाल।
- फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा। हिमालयी राज्यों को जल सुरक्षा देना केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं में है। यह बात वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भारत सरकार के अतिरिक्त सचिव रवि अग्रवाल ने बीते दिन सोमेश्वर में एक परियोजना के निरीक्षण के दौरान कही। उन्होंने कहा कि हर जलस्रोत को संरक्षित करते हुए जनसामान्य को उसके संरक्षण से जोड़ना होगा।
विभिन्न जलस्रोतों पर किए जा रहे उपचारों का निरीक्षण करते हुए उन्होंने कार्यों पर संतोष जताया और वनों में पशुओं के लिए कुछ स्थायी जल केंद्र भी विकसित करने का सुझाव भी दिया। उन्होंने क्षेत्र में नए पर्यटक स्थल के रूप में रुद्रधारी का चयन करने और क्षेत्र में स्वच्छता के लिए किए गए कार्यों की भी सराहना की।
जीबी पंत संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक और राष्ट्रीय हिमालयी अध्ययन मिशन के नोडल अधिकारी ई. किरीट कुमार ने उन्हें जल अभ्यारण्य की अवधारणा पर किए जा रहे रहे कार्यों की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की और कौसानी क्षेत्र के काटली गांव में कोसी नदी के उद्गम क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों का निरीक्षण कराया।
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उन्होंने बताया कि जल स्रोतों एवं स्रोत आधारित जलधाराओं का पुनरुद्धार का कार्य वैज्ञानिक विधि से किया जा रहा है। जल अभ्यारण्य के कार्य की प्रगति पर उन्होंने बताया कि अब तक 11 राज्यों में 1350 से अधिक जल स्रोतों का सूचीकरण हो चुका है तथा बड़ी संख्या में संकटग्रस्त स्रोतों को चिन्हित कर उनके संरक्षण की कार्ययोजना बनाई जा रही है।
इस दौरान मंत्रालय के वरिष्ठ सलाहकार ललित कपूर और वन विभाग के अधिकारी, परियोजना वैज्ञानिक डॉ. ललित गिरि, वन क्षेत्राधिकारी विशन लाल, जगदीश पांडे, विक्रम नेगी, दिनेश चंद्र पांडे आदि इस अवसर पर उनके साथ थे।
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विभिन्न जलस्रोतों पर किए जा रहे उपचारों का निरीक्षण करते हुए उन्होंने कार्यों पर संतोष जताया और वनों में पशुओं के लिए कुछ स्थायी जल केंद्र भी विकसित करने का सुझाव भी दिया। उन्होंने क्षेत्र में नए पर्यटक स्थल के रूप में रुद्रधारी का चयन करने और क्षेत्र में स्वच्छता के लिए किए गए कार्यों की भी सराहना की।
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जीबी पंत संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक और राष्ट्रीय हिमालयी अध्ययन मिशन के नोडल अधिकारी ई. किरीट कुमार ने उन्हें जल अभ्यारण्य की अवधारणा पर किए जा रहे रहे कार्यों की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की और कौसानी क्षेत्र के काटली गांव में कोसी नदी के उद्गम क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों का निरीक्षण कराया।
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उन्होंने बताया कि जल स्रोतों एवं स्रोत आधारित जलधाराओं का पुनरुद्धार का कार्य वैज्ञानिक विधि से किया जा रहा है। जल अभ्यारण्य के कार्य की प्रगति पर उन्होंने बताया कि अब तक 11 राज्यों में 1350 से अधिक जल स्रोतों का सूचीकरण हो चुका है तथा बड़ी संख्या में संकटग्रस्त स्रोतों को चिन्हित कर उनके संरक्षण की कार्ययोजना बनाई जा रही है।
इस दौरान मंत्रालय के वरिष्ठ सलाहकार ललित कपूर और वन विभाग के अधिकारी, परियोजना वैज्ञानिक डॉ. ललित गिरि, वन क्षेत्राधिकारी विशन लाल, जगदीश पांडे, विक्रम नेगी, दिनेश चंद्र पांडे आदि इस अवसर पर उनके साथ थे।