फौज और आईएसआई का वर्चस्व
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पठानकोट आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के साथ वार्ता को सिर्फ संवाद तक सीमित रखना चाहिए। उसने जिस तरह से पहली बार भारत की बात मानी है।
उससे जाहिर है कि आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान कार्रवाई तो करना चाहता है, लेकिन हुकूमत अभी भी स्वतंत्र निर्णय नहीं ले पा रही है। रक्षा मामलों के विशेषज्ञ ले. जनरल मोहन चंद्र भंडारी का कहना है कि ठोस सामरिक नीति के अभाव में भारत के लिए भी आतंकवादी और छद्म गतिविधियों से निपटना आसान नहीं है।
अवकाश प्राप्त ले. जनरल भंडारी ने कहा कि पठानकोट में हुई आतंकी घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद का हल निकालना आसान नहीं है। जम्मू-कश्मीर का मसला सुलझे बगैर पाकिस्तान विभाजन को संपूर्ण नहीं मानता। दूसरी तरफ चीन भी दक्षिण एशिया में भारत का वर्चस्व नहीं चाहता है।
वर्तमान में भी वह भारत पर लगातार खतरा पैदा कर रहा है। पाकिस्तान में वर्तमान में आतंकवाद के 46 कैंप चल रहे हैं। पाकिस्तानी हुकूमत आतंकवाद के खात्मे को लेकर स्वतंत्र रूप से निर्णय नहीं कर पा रही है, वहां आज भी फौज और आईएसआई का वर्चस्व हावी है।
आतंकवाद के मसले पर भारत को अब पाकिस्तान के साथ वार्ता सिर्फ संवाद तक सीमित रखना चाहिए। भंडारी का कहना है कि भारत को भी इस मसले पर कड़ा रुख अपनाने की जरूरत है।
पाकिस्तान ने आतंकी हमले की पहचान के लिए पठानकोट एयरबेस पर भारत के साथ संयुक्त सर्च ऑपरेशन चलाने की बात कही है। इस पर अवकाश प्राप्त ले. जनरल एमसी भंडारी का मानना है कि भारत कभी भी पाक की किसी भी टीम को पठानकोट के एयरबेस में आने की इजाजत नहीं देगा।