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सीटू के आह्वान पर विभिन्न संगठनों का धरना, नगर में निकाली रैली

Tue, 08 Jan 2019 11:02 PM IST
Almora desk अमर उजाला ब्यूरो  अल्मोड़ा।
अमर उजाला ब्यूरो  अल्मोड़ा। Published by: Almora desk Updated Tue, 08 Jan 2019 11:02 PM IST
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Ditch of various organizations on CITU's call
अल्मोड़ा में धरना देते विभिन्न संगठनों के लोग। - फोटो : अमर उजाला

 सेंट्रल ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू) के आह्वान पर मंगलवार को बैंक, विभिन्न विभागों में तैनात दैनिक श्रमिकों की हड़ताल से काम कामकाज पर व्यापक प्रभाव पड़ा है। बैंक कर्मियों की हड़ताल के चलते राष्ट्रीयकृत बैंकों में भी काम काज प्रभावित हुआ हालांकि बैंक अधिकारी ड्यूटी पर थे और कुछ बैंकों में अधिकारियों ने ग्राहकों के जरूरी काम निपटाए। वहीं डाकघरों में भी कामकाज ठप रहा। हड़ताल के चलते डाक वितरण, रेलवे बुकिंग और पासपोर्ट बनवाने जैसे काम नहीं हो सके।                    

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  विभिन्न संगठनों की गांधी पार्क में हुई सभा में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि जल संस्थान पीटीसी कर्मचारियों को 11 माह से वेतन नहीं मिला है। उन्होंने पीटीसी, वर्कचार्ज, दैनिक वेतन भोगी और ग्राम प्रहरियों को नियमित करने की मांग करते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से दैनिक कर्मचारियों को नियमित करने तक 18 हजार न्यूनतम वेतन देने और राज्य सरकार से कर्मचारियों की हड़ताल पर लगाई गई पाबंदी को तत्काल हटाने की मांग की गई। सभा को किशन सिंह भंडारी, सीटू के जिलाध्यक्ष देवेंद्र सिंह फर्त्याल ने संबोधित किया। जबकि पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी ने भी समर्थन देते हुए अपने विचार रखे। संचालन सीटू के उपाध्यक्षा आरपी जोशी ने किया।
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आशा कार्यकर्ता आनंदी मेहरा, प्रेमा जोशी, पूजा, भोजन माता नरगिस, हेमा अधिकारी, शोभा जोशी, खष्टी, जल संस्थान से शिवराज सिंह, हंसादत्त, किशन भंडारी, प्रताप राम, किशन राम, गोविंद सिंह, आंगनबाड़ी से रैना देवी, ग्राम प्रहरी संगठन से भुवन राम, बालम सतवाल, किशन सिंह बोरा, कमला चौधरी, आशा जोशी और बधुवा मुक्ति मोर्चा संगठन के दया किशन कांडपाल ने विचार रखे। इधर हड़ताल में बैंक ऑफ बड़ौदा, पीएनबी, सेंट्रल, केनरा जैसे राष्ट्रीयकृत बैंक भी शामिल रहे। कर्मचारी बैंकों में स्थायी कार्यों की आउट सोर्सिंग के विरोध के अलावा बैंकों में पर्याप्त भर्ती करने, प्रतिगामी बैंकिंग सुधार उपायों और केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों और मजदूर और श्रम विरोधी नीतियों का विरोध कर रहे थे।  
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