फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Almora News ›   Directorate of officials

बाबूओं के भरोसे चल रहा उद्यान निदेशालय

Thu, 12 May 2016 12:34 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, रानीखेत (अल्मोड़ा)।
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, रानीखेत (अल्मोड़ा)। Updated Thu, 12 May 2016 12:34 AM IST
विज्ञापन

रानीखेत (अल्मोड़ा)। पर्वतीय क्षेत्रों में औद्यानिकी गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यहां चौबटिया में स्थापित उद्यान निदेशालय अधिकारियों की भारी कमी से जूझ रहा है। कभी अधिकारी-कर्मचारियों की लंबी चौड़ी फौज वाले इस निदेशालय में वर्तमान में केवल निदेशक और एक उपनिदेशक हैं। अधिकांश कार्य बाबूओं के हवाले है। अधिकारी-कर्मचारियों के अभाव के चलते तमाम कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इसके बावजूद शासन स्तर से अधिकारियों की नियुक्ति को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। 

विज्ञापन


उत्तर प्रदेश शासनकाल के दौरान जीबी पंत ने पर्वतीय क्षेत्र के काश्तकारों को औद्यानीकरण से जोड़ने के लिए 1953 में चौबटिया में उद्यान निदेशालय की स्थापना की। 106.91 हेक्टेयर भूमि में फैले इस निदेशालय में निदेशक सहित तीन उपनिदेशक, दो संयुक्त निदेशक, अपर निदेशक और उद्यान अधिकारियों सहित कर्मचारियों की लंबी चौड़ी फौज तैनात की गई। रिसर्च सैंटर भी स्थापित किया गया। डेलीसेस, रॉयमर, फेनी, रेड गोल्ड, गोल्डन वैली जैसी स्वदेशी डेलीसस प्रजाति के सेबों के पौंधे लगाए गए। इन सेबों की लालिमा देश ही नहीं वरन विदेशों तक मशहूर थी।
विज्ञापन


हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड आदि प्रदेश भी इस प्रजाति को यहीं से खरीदते थे, लेकिन पिछले एक दशक से निदेशालय में निरंतर अधिकारियों की संख्या में घट रही है। वर्तमान में यहां निदेशक और एकमात्र उपनिदेशक तैनात हैं। निदेशक भी अधिकांश देहरादून से ही कार्य संचालित करते हैं। निदेशालय सूत्रों के अनुसार यहां अपर निदेशक, संयुक्त निदेशक, उप निदेशक फल संरक्षण और उपनिदेशक मुख्यालय का पद रिक्त चल रहा है।  
विज्ञापन
विज्ञापन


विभाग में लेखाकार के 14 पद सृजित हैं, जिनमें से 12 पद रिक्त चल रहे हैं। चालकों के भी आधा दर्जन पद रिक्त हैं। अधिकांश कार्य मिनिस्ट्रियल कर्मचारियों के हवाले चल रहा है। निदेशक देहरादून कैंप कार्यालय में रहते हैं, जिस कारण कर्मचारियों का फाइल लेकर देहरादून की दौड़ लगानी पड़ती है।


अधिकारियों की कमी के चलते पिछले एक दशक से सेब के उत्पादन में भारी गिरावट आई है। इसके अलावा कई कार्य प्रभावित हो रहे हैं। हालांकि इस बीच उद्यान में स्वदेशी सेब के गौरव को वापस लाने पर कार्य चल रहा है। उद्यान की खाली भूमि पर स्वदेशी प्रजाति के सेब के पेड़ लगाए जा रहे हैं। इधर इस संबंध में जानकारी हासिल करने के लिए उद्यान निदेशक से फोन पर वार्ता नहीं हो पाई।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed