डायलिसिस की सुविधा वाला जिले का पहला अस्पताल होगा बेस अस्पताल
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अमर उजाला में छपी खबर का संज्ञान लेकर हाईकोर्ट की ओर से जारी निर्देश का ही असर है कि अल्मोड़ा बेस अस्पताल जिले का पहला डायलिसिस की सुविधा वाला अस्पताल बनने जा रहा है। कोर्ट ने 20 सितंबर तक यह सुविधा शुरू करने का आदेश दिया था। स्वास्थ्य विभाग कोर्ट की अवमानना से बचने के लिए 20 सितंबर से पहले ही हर हाल में डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध कराने की कोशिश में है।
अल्मोड़ा के बेस अस्पताल में 2006 में 1.10 करोड़ रुपये कीमत की नई डायलिसिस मशीन आज भी बेस अस्पताल के एक कमरे में बंद पड़ी है। अमर उजाला के बीते तीन जनवरी के अंक में आजकल के फेर में 1.10 करोड़ की मशीन हुई कबाड़.. शीर्षक से पहले पेज पर खबर छापी थी। अमर उजाला की इस खबर के आधार पर एनटीडी निवासी नवाज खान ने हाइकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने अमर उजाला की खबर का संज्ञान लेते हुए 21 फरवरी 2018 को सात माह के भीतर डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध कराने के आदेश जारी किये थे।
बेस अस्पताल के प्रमुख चिकित्साधीक्षक डा.टीडी रखोलिया ने बताया कि डायलिसिस कराने के लिए डा. ललित मोहन के अलावा स्टाफ नर्स ज्योति आर्या और संगीता आर्या को एक माह की ट्रेनिंग के लिए हल्द्वानी भेजा गया है। यह सभी लोग 18 अगस्त तक ट्रेनिंग से लौट आएंगे। मशीन फिट करने के लिए जगह निर्धारित करके वहां आरओ प्लांट लगा दिया गया है और बिजली और जनरेटर के कनेक्शन की व्यवस्था भी कर दी गई है। निदेशालय स्तर से मशीन खरीदने के आदेश हो चुकेे हैं और अगस्त माह के भीतर मशीन लग जाएगी। सितंबर पहले सप्ताह से मशीन का ट्रायल शुरू हो जाएगा।
एक करोड़ में खरीदी मशीन अब कबाड़
अल्मोड़ा। दिलचस्प यह है कि 2006 में एक करोड़ रुपये से अधिक लागत से खरीदी गई मशीन कमरे में वैसे ही बंद है और अब कबाड़ हो चुकी है। 12 साल पुरानी यह मशीन अब वैसे भी चलन से बाहर हो चुकी है और इसे अब प्रयोग में नहीं लाया जा सकेगा। फिलहाल अधिकारी इस मशीन को लेकर कुछ कह नहीं रहे हैं।