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अल्मोड़ा की धसपड़ ग्राम सभा को मिला तृतीय राष्ट्रीय जल शक्ति पुरस्कार

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 30 Mar 2022 12:25 AM IST
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Dhaspad Village Of Almora Get Prize
दिल्ली में राष्ट्रपति से तृतीय राष्ट्रीय जल शक्ति पुरस्कार लेते उप परियोजना निदेशक डॉ. शिव कुमा? - फोटो : ALMORA
अल्मोड़ा। सीमित संसाधनों के बीच ग्रामसभा धसपड़ में किए गए सफल जल प्रबंधन के लिए ग्रामसभा को उत्तरी जोन में तृृतीय राष्ट्रीय जल शक्ति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
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दिल्ली में आयोजित एक समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ग्रामसभा को यह पुरस्कार दिया। पुरस्कार के रूप में ग्राम्या परियोजना अल्मोड़ा प्रभाग के उप परियोजना निदेशक डॉ. शिव कुमार और ग्रामसभा के ग्राम प्रधान दिनेश चंद्र पांडे ने पुुरस्कार ग्रहण किया। पुरस्कार के रूप में एक स्मृति चिन्ह, प्रशस्ति पत्र और दो लाख रुपये की धनराशि दी गई।
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जल संवर्धन के लिए गांव की तलहटी में मौजूद सदानीरा पहाड़ी नदी से पानी को सौर ऊर्जा की मदद से 118 मीटर ऊपर स्थित किसानों के खेतों तक पहुंचाया गया। इस पूरे प्रयोग में गुरुत्वाकर्षण की भी मदद ली गई। इस प्रयोग से खेती का रकबा भी बढ़ा और नकदी फसलों से भी काश्तकारों की आय अच्छी होने लगी। ग्राम पंचायत ने खंतियों और कच्चे तालाबों को खोद कर वर्षा जल संचय से गांव के प्राकृतिक जल स्रोतों की उपलब्धता को भी बढ़ाया। कुशल प्रबंधन के लिए ग्राम पंचायत को उत्तरी जोन में पहला पुरस्कार मिला।
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उप परियोजना निदेशक डॉ. शिव कुमार ने बताया कि इस योजना से छह हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित हो रहा है। इससे पूर्व 2012 पहाड़पानी स्थित शिलालेख ग्रामसभा को भी ग्राम्या एक योजना के तहत प्रथम पुरस्कार मिला था।

चाल, खाल, खंतियों से किए गधेरे रिचार्ज
अल्मोड़ा। प्रदेश के लिए आज ग्राम पंचायत धसपड़ एक मॉडल ग्रामसभा के रूप में उभरा है। इस गांव के लोगों ने जल संवर्धन में बेहतरीन कार्य कर एक मिसाल पेश की है। जल संरक्षण और संवर्धन के लिए ग्राम्या योजना दो के तहत धसपड़ गांव में मध्यम आकार के 11 कच्चे तालाब, 43 छोटे तालाब, 2540 खंतिया, 46 रूफ वाटर हार्वेस्टिंग टैंक, 18 एलडीपीई टैंक, 13 वानस्पतिक चैक डैम, 21 ड्राइ स्टोन चेकडैम, 27 गैबियन चेकडैम बनाए गए। इसके साथ ही गांव की तलहटी में चेकडैम की मदद से पानी रोककर पांच अश्वशक्ति के सौर ऊर्जा संचालित वाटर लिफ्ट पंप की मदद से 118 मीटर ऊपर बने 20 हजार लीटर के टैंक तक पानी लाकर सिंचाई की जाती है। जल संवर्धन के इस कार्य से ग्रामीणों का छह हेक्टेयर कृषि रकबा बड़ा है। गांव के 36 परिवार इसका सीधा लाभ ले रहे हैं। जिससे गांव के काश्तकार पारंपरिक फसलों के साथ ही सब्जी, लिलियम, अगनेसिया आदि फूलों की खेती भी करने लगे हैं। गांव में अब नौ पालीहाऊस भी तैयार कर लिए गए हैं।
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