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Almora News: आरक्षण के बावजूद नहीं बदल रही तस्वीर

Thu, 04 Sep 2025 11:58 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा Updated Thu, 04 Sep 2025 11:58 PM IST
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Despite reservation, the picture is not changing
रानीखेत (अल्मोड़ा)। जिले के कई विकासखंडों में बीडीसी बैठक हुई। इनमें विभिन्न विभागों के अधिकारियों और हाल ही में चुने गए क्षेत्र पंचायत सदस्य बड़ी संख्या में पहुंचे लेकिन नजारा कुछ अलग ही था। कई सीटों पर महिला प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की लेकिन उनकी उपस्थिति से ज्यादा चर्चा उनके पतियों की मौजूदगी की रही।
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जानकार मानते हैं कि समस्या दो स्तर पर है। पहला समाज में अभी भी महिलाओं के नेतृत्व को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया गया है। दूसरा कई बार परिवार और समाज का दबाव महिलाओं को स्वतंत्र निर्णय लेने से रोकता है। नतीजतन चुनी गई महिला प्रतिनिधि पीछे छूट जाती हैं और उनके पति या परिवार के पुरुष प्रधान पति या बीडीसी पति की तरह आगे आ जाते हैं। हालांकि कुछ सीटों पर ऐसा भी देखने को मिला कि महिला प्रतिनिधियों ने खुद अपनी बात रखी।
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सवाल पूछे और योजनाओं पर चर्चा की। यह बदलाव की छोटी है लेकिन उम्मीद जगाने वाली है। प्रशासनिक अधिकारियों का भी मानना है कि महिलाओं को और अधिक प्रोत्साहन देने की जरूरत है ताकि वे खुद अपनी पहचान बना सकें।
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महिलाएं बनीं प्रॉक्सी प्रतिनिधि असल कमान पतियों के हाथ में
बैठक के दौरान यह साफ दिखाई दिया कि जिन सीटों पर महिलाओं ने चुनाव जीता है। वहां असल भूमिका उनके पतियों ने निभानी शुरू कर दी है। कई जगहों पर तो महिला सदस्य खामोश बैठी रहीं। यह स्थिति देखते ही अन्य निर्वाचित सदस्यों ने भी मजाकिया लहजे में टिप्पणी कर दी कि महिलाएं तो सिर्फ नाम के लिए जीती हैं। असल काम तो इनके पति ही करेंगे। यह परिदृश्य उस सोच पर सवाल खड़ा करता है जिसके तहत पंचायत चुनावों में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू किया गया था।
सरकार का उद्देश्य था कि महिलाएं निचले स्तर से राजनीति में आएं अपनी आवाज बुलंद करें और समाज व क्षेत्र के विकास में प्रत्यक्ष योगदान दें। लेकिन हकीकत यह है कि कई जगह महिलाएं ‘प्रॉक्सी प्रतिनिधि’ बनकर रह गई हैं। संवाद

लोकतंत्र की पहली सीढ़ी पर अधूरी मौजूदगी
पंचायत लोकतंत्र की पहली सीढ़ी है। अगर यहां महिलाओं की वास्तविक भागीदारी सुनिश्चित नहीं होगी, तो राजनीति में उनकी सशक्त मौजूदगी का सपना अधूरा ही रह जाएगा।
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