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योजना बना डाली पर धन देने से कतरा रही सरकार
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
Updated Thu, 21 Jan 2016 12:41 AM IST
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इंटरमीडिएट पास गरीब परिवार की 2015 में आवेदन कर चुकीं 2516 छात्राओं को गौरादेवी कन्या धन योजना का लाभ नहीं मिला है। इनमें सामान्य जाति की 2101 और अनुसूचित जाति की 415 छात्राएं शामिल हैं। इन छात्राओं को 50-50 हजार रुपये की सहायता नहीं मिल पा रही है।
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शासन द्वारा बीपीएल परिवार की इंटरमीडिएट पास छात्राओं को प्रोत्साहित करने के लिए गौरा देवी कन्या धन योजना में 50-50 हजार रुपये देने का प्राविधान है। प्रतिवर्ष पात्र छात्राएं विकासखंड कार्यालय के माध्यम से समाज कल्याण विभाग में आवेदन करती हैं।
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मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सत्ता संभालने के बाद यह धनराशि 25 हजार रुपये से बढ़ाकर 50 हजार रुपये प्रति छात्रा कर दी। 2015 में इंटरमीडिएट पास छात्राओं के आवेदन करने की अंतिम तिथि 30 सितंबर निर्धारित थी। जिले के विभिन्न ब्लॉकों की 2516 छात्राओं ने गौरादेवी कन्या धन योजना का लाभ लेने के लिए समाज कल्याण विभाग में आवेदन किया है।
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इनमें सामान्य जाति की 2101, अनुसूचित जाति की 415 छात्राएं शामिल हैं। साढ़े तीन माह बीतने के बाद भी इन छात्राओं को योजना का लाभ नहीं मिला है। छात्राओं को लाभान्वित करने के लिए 12.58 करोड़ बजट की जरूरत है।
इधर विभाग से मिली जानकारी के अनुसार शासन से सामान्य जाति की छात्राओं के लिए 5.45 करोड़ और अनुसूचित जाति की छात्राओं के लिए एक करोड़ पांच लाख पचास हजार रुपये ही मिले हैं। कोषागार कर्मियों की हड़ताल के चलते छात्राओं को धनराशि आवंटित नहीं हो पा रही है, जबकि अवशेष बजट के लिए शासन को लिखा गया है।
2013 में आवेदन कर चुकीं 957 छात्राओं को तीन साल बाद भी योजना का लाभ नहीं मिला है। इनमें सामान्य वर्ग की 711 और अनुसूचित जाति वर्ग की 246 छात्राएं हैं। इन छात्राओं के लिए विभाग को दो करोड़ 39 लाख 25 हजार रुपये की जरूरत है। इनके लिए बजट विभाग को तीन साल बाद भी बजट नहीं मिला है। इससे यह छात्राएं लाभान्वित नहीं हो पा रही है।