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अपराधी हाईटेक और उत्तराखंड में पटवारी डंडे पर टिके
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
Updated Sat, 26 Sep 2015 10:44 PM IST
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जिले के ग्रामीण इलाके की कानून व्यवस्था आज भी पटवारियों के हवाले है, लेकिन अधिकांश तहसीलों में पटवारियों के 211 में से 107 पद खाली हैं। जिससे एक पटवारी के जिम्मे कई क्षेत्र हैं। राजस्व पुलिस के पास अपराधियों से निपटने के लिए संसाधन भी नहीं हैं। इस कारण ग्रामीण इलाकों में जहां अपराधों पर काबू करना मुश्किल हो रहा है वहीं शांति व्यवस्था में भी दिक्कतें आ रही हैं। जिले में रेगुलर पुलिस का विस्तार भी नहीं हो पा रहा है। इस कारण खासकर ग्रामीण इलाकों में चोरी और अन्य वारदातें बढ़ रही हैं।
राज्य के पर्वतीय क्षेत्र में 70 प्रतिशत क्षेत्र की पूरी कानून व्यवस्था पटवारियों के जिम्मे है। शेष 30 प्रतिशत नगरों और बड़े कस्बों में कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी रेगुलर पुलिस (उत्तराखंड पुलिस) के ऊपर है, लेकिन इसके बावजूद पटवारियों के अधिकांश पद खाली हैं। हालत यह है कि जिले में पटवारियों के कुल 211 पद हैं इनमें से 107 पद रिक्त हैं। इस स्थिति में एक पटवारी के पास कई क्षेत्रों का चार्ज रहता है। दूसरी तरफ चपरासियों के भी 80 प्रतिशत पद खाली हैं। राजस्व पुलिस क्षेत्र के अंतर्गत हत्या, डकैती, लूट, बलात्कार सहित सभी आपराधिक मामलों की विवेचना के अलावा अभियुक्तों की गिरफ्तारी, न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल करने और उन्हें जेल भेजने आदि सभी जिम्मेदारी पटवारियों पर ही है। पुलिस कार्य के अलावा उन पर गांवों में ागरिकों की जमीन का लेखा-जोखा रखने, खसरा, खतौनी तैयार करने सहित तमाम अन्य सरकारी कार्यों का दायित्व भी है।
आज अपराधी हाईटेक हो चुके हैं, लेकिन पटवारियों के पास हथियार के नाम पर सिर्फ एक डंडा है। कई पटवारी क्षेत्रों के अंतर्गत सड़कों से जुड़े इलाके भी आते हैं, लेकिन अपराधियों को गिरफ्तार करने के लिए किसी भी पटवारी चौकी में वाहन की तक व्यवस्था नहीं है। पटवारी महासंघ के जिलाध्यक्ष राजेंद्र गिरि का कहना है कि पटवारियों के आधे से अधिक पद खाली रहने से काम करना काफी कठिन हो रहा है। राजस्व कर्मियों के पास पुलिस कार्य के अलावा अन्य कार्य भी हैं। ऐसे में व्यवस्था प्रभावित हो रही है। पटवारियों के खाली पद तुरंत भरे जाने चाहिए। साथ ही उन्हें अन्य सुविधाएं भी मिलनी चाहिए।
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राज्य के पर्वतीय क्षेत्र में 70 प्रतिशत क्षेत्र की पूरी कानून व्यवस्था पटवारियों के जिम्मे है। शेष 30 प्रतिशत नगरों और बड़े कस्बों में कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी रेगुलर पुलिस (उत्तराखंड पुलिस) के ऊपर है, लेकिन इसके बावजूद पटवारियों के अधिकांश पद खाली हैं। हालत यह है कि जिले में पटवारियों के कुल 211 पद हैं इनमें से 107 पद रिक्त हैं। इस स्थिति में एक पटवारी के पास कई क्षेत्रों का चार्ज रहता है। दूसरी तरफ चपरासियों के भी 80 प्रतिशत पद खाली हैं। राजस्व पुलिस क्षेत्र के अंतर्गत हत्या, डकैती, लूट, बलात्कार सहित सभी आपराधिक मामलों की विवेचना के अलावा अभियुक्तों की गिरफ्तारी, न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल करने और उन्हें जेल भेजने आदि सभी जिम्मेदारी पटवारियों पर ही है। पुलिस कार्य के अलावा उन पर गांवों में ागरिकों की जमीन का लेखा-जोखा रखने, खसरा, खतौनी तैयार करने सहित तमाम अन्य सरकारी कार्यों का दायित्व भी है।
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आज अपराधी हाईटेक हो चुके हैं, लेकिन पटवारियों के पास हथियार के नाम पर सिर्फ एक डंडा है। कई पटवारी क्षेत्रों के अंतर्गत सड़कों से जुड़े इलाके भी आते हैं, लेकिन अपराधियों को गिरफ्तार करने के लिए किसी भी पटवारी चौकी में वाहन की तक व्यवस्था नहीं है। पटवारी महासंघ के जिलाध्यक्ष राजेंद्र गिरि का कहना है कि पटवारियों के आधे से अधिक पद खाली रहने से काम करना काफी कठिन हो रहा है। राजस्व कर्मियों के पास पुलिस कार्य के अलावा अन्य कार्य भी हैं। ऐसे में व्यवस्था प्रभावित हो रही है। पटवारियों के खाली पद तुरंत भरे जाने चाहिए। साथ ही उन्हें अन्य सुविधाएं भी मिलनी चाहिए।
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