{"_id":"56f6dd494f1c1baf2af15205","slug":"accused-of-daughter-misconduct-exonerated","type":"story","status":"publish","title_hn":"बेटी से दुराचार का आरोपी दोषमुक्त","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
बेटी से दुराचार का आरोपी दोषमुक्त
ब्यूरा/अमर उजाला, रानीखेत (अल्मोड़ा)।
Updated Sun, 27 Mar 2016 12:34 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अल्मोड़ा। विशेष सत्र न्यायाधीश डा. ज्ञानेंद्र शर्मा ने अपने एक फैसले में बेटी से छेड़छाड़, लैंगिक अपराध और गाली गलौच करने के आरोपी को पॉक्सो और अन्य आपराधिक मामलों में दोषमुक्त कर दिया है। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अदालत ने यह पाया कि आरोपी मानसिक रोगी था। अदालत के आदेश पर उसका इलाज भी कराया गया।
विज्ञापन
उसके स्वस्थ होने के बाद पीड़िता ने भी अपने बयानों में आरोपी के मानसिक रोगी होने और खुद के बालिग होने की बात स्वीकार की। अदालत ने इस मामले में पीड़िता, उसकी दादी और विवेचनाधिकारी के खिलाफ पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों के दुरुपयोग पर कार्रवाई करने का नोटिस जारी किया है। इसके लिए इन तीनों को 30 मार्च को न्यायालय में उपस्थित होने को कहा गया है।
विज्ञापन
जानकारी के मुताबिक करीब दो साल पहले एक लड़की ने खुद को नाबालिग बताते हुए अपने पिता पर आए दिन शराब पीकर छेड़छाड़, लैंगिक अपराध और गाली गलौच करने के आरोप लगाए। उसके खिलाफ महिला थाना अल्मोड़ा में धारा 323, 504 और पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया था। मुकदमे के विचारण के दौरान आरोपी न्यायालय के सामने अजीब हरकतें करता पाया गया। विशेष सत्र न्यायाधीश ने इस पर संज्ञान लेते हुए उसका मेडिकल परीक्षण कराने के आदेश दिए। सुशीला तिवारी हॉस्पिटल हल्द्वानी में किए गए मेडिकल परीक्षण में आरोपी के मानसिक रोगी होने की पुष्टि हुई। उसके बाद आरोपी का सरकारी अस्पताल देहरादून में उपचार किया गया।
विज्ञापन
स्वस्थ होने के बाद आरोपी के साथ ही पीड़िता और उसकी दादी (आरोपी की मां) के बयान कराए गए। पीड़िता ने बयान में आरोपी पर पूर्व में लगाए गए आरोपों का समर्थन नहीं किया गया। उसने यह कहा कि घटना के वक्त वह वयस्क थी और आरोपी मानसिक रूप से अस्वस्थ था। विशेष सत्र न्यायाधीश डा. ज्ञानेंद्र शर्मा ने गवाहों के बयानों और पत्रावली की जांच करने के बाद आरोपी पिता अल्मोड़ा जिला निवासी को सभी आरोपों से बरी कर दिया और अब तक जेल में बंद इस आरोपी को रिहा करने के आदेश दिए।
साथ ही पीड़िता और उसकी दादी के साथ ही विवेचनाधिकारी के खिलाफ पाक्सो अधिनियम के प्रावधानों के दुरुपयोग पर कार्रवाई करने का नोटिस जारी किया है। इसके लिए इन तीनों को 30 मार्च को न्यायालय में उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए गए हैं। विशेष सत्र न्यायाधीश ने दादी की पैरवी के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अल्मोड़ा को एक अधिवक्ता दिलाने के आदेश भी दिए हैं। इस मामले में राज्य सरकार की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी गिरीश चंद्र फुलारा ने पैरवी की।