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कूड़ेदान के बाहर, नदियों के किनारे फेंक दिया जाता है कूड़ा
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बागेश्वर के सैम मंदिर वार्ड, नदीगांव में कूड़ेदान के बाहर बिखरा कूड़ा। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : BAGESHWAR
बागेश्वर। किसी भी क्षेत्र, नगर को स्वच्छ रखने के लिए जनता का भी अहम योगदान रहता है। जनता भी इसमें भागेदार रहती है। यदि लोग उदासीन हो गए तो स्वच्छता पर भी कहीं न कहीं इसका असर पड़ता है। बागेश्वर नगर में भी इसी उदासीनता का असर पड़ रहा है। हम तो यही कहेंगे कि नगर की स्वच्छता रैकिंग में और सुधार के लिए नगर की जनता को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
नगर में सड़कों के किनारे कूड़ा बिखरा रहता है। रात को प्लास्टिक की थैलियों में कूड़ा भरकर सड़क पर फेंक दिया जाता है। कूड़ेदानों से बाहर कूड़ा बिखरा रहता है। यानि कि कुछ लोग कूड़ेदानों में कूड़ा न डालकर कूड़ेदान के पास डाल देते हैं। इससे कूड़ेदानों के आसपास गंदगी पसरी रहती है। कूड़ेदान के इर्द-गिर्द जानवरों का अड्ढा बन जाता है। नगर की स्वच्छता में बट्टा लगता है। हाल में नगर में कई स्थानों पर ढक्कनदार कूड़ेदान भी बने हैं ताकि कूड़ा बाहर न बिखरे। फिर भी कूड़ेदानों के बाहर कूड़ा डालने का सिलसिला नहीं रुका है।
नगर में कई स्थानों पर नदियों के तट कूड़े में तब्दील रहते हैं। लोग नदियों के किनारे कूड़ा डाल देते हैं। कुछ जगह ऐसे स्थानों पर कूड़ा डाल दिया जाता है जहां से कूड़ा निकालने में भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। नगर की सड़कों पर बिखरे और जहां-तहां डाले गए कूड़े के निस्तारण में भी दिक्कत आती है। यदि कूड़ेदान में ही कूड़ा पड़ा रहे तो पर्यावरण मित्रों को कूड़ा निस्तारण में मदद मिलती। यही कहा जा सकता है कि नगर की स्वच्छता के लिए पालिका को तो सजग रहना ही होगा, नागरिकों को जिम्मेदारी निभानी होगी।
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कूड़ेदानों से बाहर कूड़ा डालने के लिए समस्या अब भी बनी हुई है। लोगों से कूड़ादान में ही कूड़ा डालने की अपील की जाती है। पिछली बार नगर के परिवारों को 6000 कूड़ेदान वितरित किए गए। इस बार व्यापारियों को डस्टबिन दिए जा रहे हैं। नगर के सभी छोटे-बड़े व्यापारियों को कूड़ेदान दिए जाएंगे। नगर को स्वच्छ रखने में नगर की जनता का अहम योगदान है।
सुरेश खेतवाल पालिकाध्यक्ष बागेश्वर।
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नगर में सड़कों के किनारे कूड़ा बिखरा रहता है। रात को प्लास्टिक की थैलियों में कूड़ा भरकर सड़क पर फेंक दिया जाता है। कूड़ेदानों से बाहर कूड़ा बिखरा रहता है। यानि कि कुछ लोग कूड़ेदानों में कूड़ा न डालकर कूड़ेदान के पास डाल देते हैं। इससे कूड़ेदानों के आसपास गंदगी पसरी रहती है। कूड़ेदान के इर्द-गिर्द जानवरों का अड्ढा बन जाता है। नगर की स्वच्छता में बट्टा लगता है। हाल में नगर में कई स्थानों पर ढक्कनदार कूड़ेदान भी बने हैं ताकि कूड़ा बाहर न बिखरे। फिर भी कूड़ेदानों के बाहर कूड़ा डालने का सिलसिला नहीं रुका है।
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नगर में कई स्थानों पर नदियों के तट कूड़े में तब्दील रहते हैं। लोग नदियों के किनारे कूड़ा डाल देते हैं। कुछ जगह ऐसे स्थानों पर कूड़ा डाल दिया जाता है जहां से कूड़ा निकालने में भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। नगर की सड़कों पर बिखरे और जहां-तहां डाले गए कूड़े के निस्तारण में भी दिक्कत आती है। यदि कूड़ेदान में ही कूड़ा पड़ा रहे तो पर्यावरण मित्रों को कूड़ा निस्तारण में मदद मिलती। यही कहा जा सकता है कि नगर की स्वच्छता के लिए पालिका को तो सजग रहना ही होगा, नागरिकों को जिम्मेदारी निभानी होगी।
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कूड़ेदानों से बाहर कूड़ा डालने के लिए समस्या अब भी बनी हुई है। लोगों से कूड़ादान में ही कूड़ा डालने की अपील की जाती है। पिछली बार नगर के परिवारों को 6000 कूड़ेदान वितरित किए गए। इस बार व्यापारियों को डस्टबिन दिए जा रहे हैं। नगर के सभी छोटे-बड़े व्यापारियों को कूड़ेदान दिए जाएंगे। नगर को स्वच्छ रखने में नगर की जनता का अहम योगदान है।
सुरेश खेतवाल पालिकाध्यक्ष बागेश्वर।