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गोल्डन कार्ड में नियम ठीक करे सरकार
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चंद्रमणि भट्ट।
- फोटो : ALMORA
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सरकार की ओर से कर्मचारियों और पूर्व कर्मचारियों को दी जा रही गोल्डन कार्ड सेवा अपने लक्ष्य को पूरा करने में सफल साबित होती नहीं दिख रही है। खासतौर से पूर्व कर्मचारियों का गोल्डन कार्ड सेवा को लेकर अच्छा रुझान नहीं है। वे इसमें सरकार की ओर से ध्यान दिए जाने की मांग कर रहे हैं।
पेंशन धारकों ने बताया कि सरकार ने गोल्डन कार्ड बनवा तो दिया लेकिन इसको सही तरह से लागू नहीं करवा पा रही है। गवर्नमेंट पेंशनर्स वेलफेयर आर्गनाइजेशन के अध्यक्ष गिरीश चंद्र तिवारी ने बताया कि इसमें ओपीडी कैशलेस न होने के कारण अस्पताल वाले गोल्डन कार्ड को स्वीकार भी नहीं कर रहे हैं। बताया कि अगर गोल्डन कार्ड का लाभ लेना है तो अनिवार्य तौर पर अस्पताल में भर्ती होना पड़ेगा।
यह नियम पूरी तरह से गलत है। इसे बदला जाना चाहिए और ओपीडी को भी कैशलेस में शामिल करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कई निजी अस्पताल इसमें अनुबंधित नहीं हैं। खासतौर से बाहरी राज्यों के निजी अस्पताल यहां के गोल्डन कार्ड लेने से मना कर रहे हैं।
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पीएल साह ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं दुरुस्त नहीं हैं। हायर सेंटर के लिए निजी अस्पतालों में ही जाना पड़ता है और वहां पर गोल्डन कार्ड की सुविधा नहीं मिल पाती है। चंद्रमणि भट्ट ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से पेंशनरों के लिए स्वास्थ्य योजना में कैशलेस योजना स्वैच्छिक है। पेंशनरों को चिकित्सा भत्ते के रूप में एक हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन के साथ मिलता है। पेंशनरों की अंशदान कटौती पेंशन के अनुरूप आधी की जाए।
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पेंशन धारकों ने बताया कि सरकार ने गोल्डन कार्ड बनवा तो दिया लेकिन इसको सही तरह से लागू नहीं करवा पा रही है। गवर्नमेंट पेंशनर्स वेलफेयर आर्गनाइजेशन के अध्यक्ष गिरीश चंद्र तिवारी ने बताया कि इसमें ओपीडी कैशलेस न होने के कारण अस्पताल वाले गोल्डन कार्ड को स्वीकार भी नहीं कर रहे हैं। बताया कि अगर गोल्डन कार्ड का लाभ लेना है तो अनिवार्य तौर पर अस्पताल में भर्ती होना पड़ेगा।
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यह नियम पूरी तरह से गलत है। इसे बदला जाना चाहिए और ओपीडी को भी कैशलेस में शामिल करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कई निजी अस्पताल इसमें अनुबंधित नहीं हैं। खासतौर से बाहरी राज्यों के निजी अस्पताल यहां के गोल्डन कार्ड लेने से मना कर रहे हैं।
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पीएल साह ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं दुरुस्त नहीं हैं। हायर सेंटर के लिए निजी अस्पतालों में ही जाना पड़ता है और वहां पर गोल्डन कार्ड की सुविधा नहीं मिल पाती है। चंद्रमणि भट्ट ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से पेंशनरों के लिए स्वास्थ्य योजना में कैशलेस योजना स्वैच्छिक है। पेंशनरों को चिकित्सा भत्ते के रूप में एक हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन के साथ मिलता है। पेंशनरों की अंशदान कटौती पेंशन के अनुरूप आधी की जाए।

गिरीश चंद्र तिवारी।- फोटो : ALMORA