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बाल मन की अनुभूति वाला ही बाल साहित्य लिख सकता है : निशंक
अल्मोड़ा़, अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 07 Jul 2017 10:17 PM IST
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संगोष्ठी का उद्घाटन करते पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक
- फोटो : अमर उजाला
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पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार से सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि बाल साहित्य के सृजन के लिए बालमन की विशिष्ट अनुभूतियां लेखक के भीतर होनी अनिवार्य हैं। डॉ. निशंक एसएसजे परिसर में सुप्रसिद्ध साहित्यकार अमृतलाल नागर की जन्मशताब्दी पर दो दिवसीय संगोष्ठी को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
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महादेवी वर्मा सृजन पीठ की ओर से अमृतलाल नागर का बाल साहित्य सृजन और संदर्भ विषय पर आयोजित संगोष्ठी का उद्घाटन अवसर पर उन्होंने कहा कि नागर ने बालपन से लेखन शुरू कर दिया था। स्वाभाविक रूप से बालमन की अनुभूतियां उनके भीतर विद्यमान रहीं। महादेवी वर्मा सृजन पीठ के कार्य कलापों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि पीठ ने साहित्य और समाज से जुड़े सामयिक विषयों पर अपने वैचारिक आयोजनों द्वारा देशभर में विशिष्ट पहचान बनाई है।
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विशिष्टि अतिथि उत्तराखंड आवासीय विवि के कुलपति प्रो. एचएस धामी ने कहा कि नागर को बाल मनोविज्ञान का सच्चा प्रतिनिधि कहा जाए तो अनुचित नहीं होगा। अध्यक्षता करते हुए परिसर कला संकायाध्यक्ष प्रो. एसए हामिद ने कहा कि बाल मन के बौद्धिक विकास के लिए अच्छे साहित्य की जरूरत को बाल साहित्यकार ही पूरा कर सकते हैं।
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महादेवी सृजन पीठ के निदेशक प्रो. देव सिंह पोखरिया ने बताया कि नागर के जन्मशताब्दी परियोजना के अंतर्गत संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार ने महादेवी सृजन पीठ रामगढ़ में अमृतलाल नागर की स्मृति में राइटर्स होम के निर्माण के लिए 80 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की है। नागर की पौत्री डा. दीक्षा नागर ने नागर के जीवन से जुड़े संस्मरणों को साझा किया। संगोष्ठी को प्रो. जगत सिंह बिष्ट, रमेश चंद्र पंत, विमला जोशी, डा. राज सक्सेना, नवीन बादल डिमरी, उदय किरौला, डा. रीता तिवारी, शालिनी मिश्रा ने संबोधित किया।
कार्यक्रम में डॉ. सोनिका रानी की पुस्तक डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक का कथा साहित्य समेत डॉ. राज सक्सेना, डॉ. विपिन चंद्र शाह और विमला जोशी की पुस्तकों का भी लोकार्पण किया गया। संचालन मोहन सिंह रावत ने किया। इस दौरान साहित्य अकादमी के पूर्व उपसचिव ब्रजेंद्र त्रिपाठी, डॉ. आरती सिंघल, हरिमोहन, मुकेश नौटियाल, डॉ. चेतना उपाध्याय, डॉ. राकेश चक्र, प्रकाश चंद्र जोशी, रतन सिंह किरमोलिया, प्रो. दिवा भट्ट, प्रो. शेर सिंह बिष्ट, प्रो. जेएस रावत, प्रो. शेखर चंद्र जोशी, प्रो. अनिल जोशी समेत काफी संख्या में शिक्षक और छात्र मौजूद थे।