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देघाट के चैत्राष्टमी मेले का समापन
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देघाट में चैत्राष्टमी मेले पर माता का डोला सजाकर मंदिर पहुंचे लोग।
- फोटो : ALMORA
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भिकियासैंण (अल्मोड़ा)। देघाट का प्रसिद्ध चैत्राष्टमी मेला शनिवार को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गया। इस दौरान ग्रामीणों ने माता के डोले सजाकर मंदिर की परिक्रमा कर सुख-शांति की मन्नत मांगी। शनिवार सुबह से ही दूरदराज से श्रद्धालु माता के मंदिर पहुंचे। उन्होंने माता की पूजा की। ब्राह्मणों ने मंदिर में पूजा पाठ किया गया।
भरसोली, कोटसारी, सुरमोली, कुमालेश्वर, गोलना से लोग माता का डोला सजाकर पूरे गाजे, बाजे के साथ मंदिर प्रांगण में पहुंचे। एकमात्र भैंसा बगड्याल गांव से मंदिर में लाया गाया था, जिसे मंदिर की परिक्रमा कर मंदिर समिति को सौंप दिया गया। सप्तमी की रात अल्मोड़ा जिले से सटे पौड़ी, चमोली और आसपास के क्षेत्रों से 35 से अधिक बकरे मंदिर में लाए गए थे, जिन्हें मंदिर के पुजारियों ने पूजा के बाद लौटा दिया। मंदिर समिति ने सबका आभार जताया। शांति व्यवस्था के लिए तहसीलदार पूरन गिरी, नायब तहसीलदार दीवान गिरी, कानूनगो भास्कर जोशी, राजेंद्र लाल वर्मा, राजस्व उपनिरीक्षक धीरज कुमार, रजत यादव, प्रकाश देवतल्ला, जगदीश जोशी आदि भी डटे रहे। आयोजन में मंदिर समिति अध्यक्ष किशन मैठानी, नारायण बंगारी, पूरन रजवार, वीरेेंद्र सिंह रावत, अशोक तिवारी, सुरेंद्र गोयल का सहयोग रहा।
मेले में पहुंचे कई बाहरी क्षेत्रों के दुकानदार
भिकियासैंण (अल्मोड़ा)। इस वर्ष चैत्राष्टमी मेले में स्थानीय व्यापारियों के साथ ही रामनगर, काशीपुर, मुरादाबाद, बरेली, हल्द्वानी आदि क्षेत्रों से भी व्यापारी दुकान लगाने पहुंचे। बच्चों के खिलौने, कपड़े, बर्तन, खाने-पीने की दुकानों के साथ ही झूले भी मेले में आकर्षण बने रहे। प्रशासन के सहयोग से मेले में उद्यान, कृषि, पशुपालन, आजीविका, स्वास्थ्य आदि विभागों के स्टाल भी लगाए गए।
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शराब की दुकान खुलने पर नाराजगी जताई
भिकियासैंण (अल्मोड़ा)। चैत्राष्टमी मेले पर प्रत्येक वर्ष प्रशासन के आदेश पर क्षेत्र में स्थित शराब की दुकान को बंद रखा जाता था लेकिन इस बार शराब की दुकान को बंद नहीं रखा गया। पूरे दिन शराब की दुकान खुली होने पर लोगों ने नाराजगी भी जताई। हालांकि दुकान खुलने से अराजकता नहीं बढ़ी लेकिन लोगों में नशेड़ियों के आतंक का खतरा बना रहा।
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भरसोली, कोटसारी, सुरमोली, कुमालेश्वर, गोलना से लोग माता का डोला सजाकर पूरे गाजे, बाजे के साथ मंदिर प्रांगण में पहुंचे। एकमात्र भैंसा बगड्याल गांव से मंदिर में लाया गाया था, जिसे मंदिर की परिक्रमा कर मंदिर समिति को सौंप दिया गया। सप्तमी की रात अल्मोड़ा जिले से सटे पौड़ी, चमोली और आसपास के क्षेत्रों से 35 से अधिक बकरे मंदिर में लाए गए थे, जिन्हें मंदिर के पुजारियों ने पूजा के बाद लौटा दिया। मंदिर समिति ने सबका आभार जताया। शांति व्यवस्था के लिए तहसीलदार पूरन गिरी, नायब तहसीलदार दीवान गिरी, कानूनगो भास्कर जोशी, राजेंद्र लाल वर्मा, राजस्व उपनिरीक्षक धीरज कुमार, रजत यादव, प्रकाश देवतल्ला, जगदीश जोशी आदि भी डटे रहे। आयोजन में मंदिर समिति अध्यक्ष किशन मैठानी, नारायण बंगारी, पूरन रजवार, वीरेेंद्र सिंह रावत, अशोक तिवारी, सुरेंद्र गोयल का सहयोग रहा।
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मेले में पहुंचे कई बाहरी क्षेत्रों के दुकानदार
भिकियासैंण (अल्मोड़ा)। इस वर्ष चैत्राष्टमी मेले में स्थानीय व्यापारियों के साथ ही रामनगर, काशीपुर, मुरादाबाद, बरेली, हल्द्वानी आदि क्षेत्रों से भी व्यापारी दुकान लगाने पहुंचे। बच्चों के खिलौने, कपड़े, बर्तन, खाने-पीने की दुकानों के साथ ही झूले भी मेले में आकर्षण बने रहे। प्रशासन के सहयोग से मेले में उद्यान, कृषि, पशुपालन, आजीविका, स्वास्थ्य आदि विभागों के स्टाल भी लगाए गए।
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शराब की दुकान खुलने पर नाराजगी जताई
भिकियासैंण (अल्मोड़ा)। चैत्राष्टमी मेले पर प्रत्येक वर्ष प्रशासन के आदेश पर क्षेत्र में स्थित शराब की दुकान को बंद रखा जाता था लेकिन इस बार शराब की दुकान को बंद नहीं रखा गया। पूरे दिन शराब की दुकान खुली होने पर लोगों ने नाराजगी भी जताई। हालांकि दुकान खुलने से अराजकता नहीं बढ़ी लेकिन लोगों में नशेड़ियों के आतंक का खतरा बना रहा।