अल्मोड़ा। उत्तराखंड किसान सभा और सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनिटन (सीटू) के कार्यकर्ताओं ने शनिवार को चौघानपाटा में धरना, प्रदर्शन किया। उन्होंने सरकार पर किसान और मजदूर विरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया।
वक्ताओं ने कहा कि कोविड-19 महामारी ने दुनियाभर में बुरा प्रभाव डाला है लेकिन भारत इससे अधिक प्रभावित हुआ है। बिना सोचे समझे लागू नोटबंदी, जीएसटी और लॉकडाउन का गंभीर असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। देश की जीडीपी सबसे निचले स्तर पर पहुंच कर माइनस 23.9 पर पहुंच चुकी है। 15 करोड़ से अधिक लोग रोजगार खो चुके हैं। हजारों छोटी-बड़ी कंपनियां संकट में हैं। कोरोनाकाल में अधिकतर देशों ने अपने नागरिकों को आर्थिक सुरक्षा दी है लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था गहरे संकट में है। इससे उबरने के लिए उन्होंने सभी परिवारों को 7500 रुपये प्रतिमाह देने की मांग की। उन्होंने बेरोजगारों, महामारी के कारण बेरोजगार लोगों को बेरोजगारी भत्ता देने, हर जरूरतमंद व्यक्ति को 10 किलो अनाज छह माह तक देने, मनरेगा में काम करने वालों को 200 दिन का रोजगार और 600 रुपये मजदूरी देने, सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण पर रोक लगाने, शहरी क्षेत्र में रोजगार गारंटी कानून बनाने की मांग की। धरने में सीटू के जिला सचिव आरपी जोशी, उत्तराखंड किसान सभा के जिला सचिव दिनेश पांडे, यूसुफ तिवारी, अरुण जोशी, स्वप्निल पांडे आदि रहे।