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Almora News: एक माह से अधिक समय तक व्यापार रहा चौपट, व्यापारियों की आर्थिकी हुई कमजोर
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अल्मोड़ा। पहाड़ की लाइफ लाइन अल्मोड़ा-हल्द्वानी राष्ट्रीय राजमार्ग 109 पर डेंजर जोन क्वारब 47 दिनों तक बंद रहने के कारण स्थानीय व्यापार चौपट रहा है। व्यवसायियों को भारी नुकसान झेलना पड़ा। मार्ग खुलने से स्थानीय व्यापारियों के चेहरों पर मुस्कान लौट आई।
संवाद न्यूज एजेंसी ने स्थानीय व्यापारियों से बातचीत की। उनका कहना था कि क्वारब मार्ग बंद रहने से व्यापार बुरी तरह से प्रभावित रहा। रोजी रोटी पर संकट आ गया। मार्ग से रोजाना हजारों वाहन आवाजाही करते हैं। इस दौरान यात्री क्वारब में रुकते हैं और स्थानीय भोजनालयों और दुकानों में चाय पानी पीते हैं। मार्ग बंद होने से वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से ठप रही। इससे स्थानीय दुकानों में ग्राहकों का आना जाना बंद हो गया। इससे चाय पानी की दुकानों से लेकर जनरल स्टोर के दुकानदारों को कमाई के लाले पड़ गए।
बिक्री न होने से उन्हें आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा। रोजमर्रा के सामान की भी बिक्री नहीं हुई। बुधवार को मार्ग खुलने से स्थानीय बाजार में चहल पहल दिखी। क्वारब में स्थित कुछ दुकानों में खाना तैयार हो रहा था तो कही पकौड़ी तले जा रहे थे। स्थानीय दुकान किशन सिंह बताते हैं कि कई दिनों बाद चाय पानी की बिक्री हुई है।
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बोले व्यापारी
मार्ग बंद रहने के दौरान कारोबार बुरी तरह से प्रभावित रहा। रोजी रोटी पर संकट आ गया है। घर का खर्चा चलाना मुश्किल हो गया। आज से मार्ग खुल गया है। अब राहत मिलने की उम्मीद जगी है।
किशन सिंह बिष्ट, क्वारब
क्वारब पर वाहनों की आवाजाही से ही कारोबार चलता है। वाहनों का संचालन बंद रहने से स्थानीय व्यापारियों को नुकसान झेलना पड़ा है। मार्ग खुलने से कारोबार पटरी पर आएगा।
आनंद सिंह, क्वारब
क्वारब बंद रहने के कारण होटल में खाने की बिक्री पर असर पड़ा। जो खाना बनता था वह ग्राहक न आने से शाम तक वैसे ही रहता है। आज ग्राहकों के आने से खाना खत्म हो चुका है। उम्मीद है कि राहत मिलेगी।
सुरेंद्र लटवाल, क्वारब
क्वारब पर दरकती पहाड़ी से स्थानीय जन जीवन बुरी तरह से प्रभावित है। मार्ग बंद होने से सबसे अधिक असर स्थानीय व्यापारियों पर पड़ा। ग्राहक न आने से रोजी-रोटी बंद रही। इससे दिक्कतें हुई।
लछम सिंह लटवाल, क्वारब
कई दिनों बाद चाय की बिक्री हुई। मार्ग बंद होने से ग्राहकों के इंतजार में ही पूरा दिन बीत जाता था। काफी नुकसान झेलना पड़ा। अब मार्ग खुल गया है। आगे भी खुला रहे प्रशासन को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए।
पूरन सिंह लटवाल, क्वारब
मलबे से क्वारब के समीप बह रही सुयाल नदी का पानी हुआ मटमैला
अल्मोड़ा। क्वारब के समीप बहने वाली सुयाल नदी मलबे से पट गई है। मलबा गिरने से नदी का पानी मटमैला हो गया है। क्वारब पर दरकती पहाड़ी के समीप सुयाल नदी बहती है। यह नदी अल्मोड़ा और नैनीताल जिलों के बीच एक प्राकृतिक सीमा का काम करती है। यह नदी अल्मोड़ा नगर के जलागम क्षेत्र का प्रमुख हिस्सा है। क्योंकि यह आगे चलकर कोसी नदी में मिल जाती है।
क्वारब पर पहाड़ से गिर रहा मलबा और बोल्डर सुयाल नदी में समाहित हो रहे हैं। इससे नदी मलबा से पट रही है। मलबे की मिट्टी गिरने से नदी का पानी मटमैला हो गया है। पैदल चलने वाले लोग नदी के रास्ते भी आवाजाही करते हैं। मलबा गिरने से उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पहाड़ी से लगातार हो रहे भूस्खलन और नदी के कटाव के कारण सुयाल नदी पर बने पुल की नींव और सुरक्षा दीवारों को भी खतरा बना हुआ है।
संवाद न्यूज एजेंसी ने स्थानीय व्यापारियों से बातचीत की। उनका कहना था कि क्वारब मार्ग बंद रहने से व्यापार बुरी तरह से प्रभावित रहा। रोजी रोटी पर संकट आ गया। मार्ग से रोजाना हजारों वाहन आवाजाही करते हैं। इस दौरान यात्री क्वारब में रुकते हैं और स्थानीय भोजनालयों और दुकानों में चाय पानी पीते हैं। मार्ग बंद होने से वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से ठप रही। इससे स्थानीय दुकानों में ग्राहकों का आना जाना बंद हो गया। इससे चाय पानी की दुकानों से लेकर जनरल स्टोर के दुकानदारों को कमाई के लाले पड़ गए।
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बिक्री न होने से उन्हें आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा। रोजमर्रा के सामान की भी बिक्री नहीं हुई। बुधवार को मार्ग खुलने से स्थानीय बाजार में चहल पहल दिखी। क्वारब में स्थित कुछ दुकानों में खाना तैयार हो रहा था तो कही पकौड़ी तले जा रहे थे। स्थानीय दुकान किशन सिंह बताते हैं कि कई दिनों बाद चाय पानी की बिक्री हुई है।
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बोले व्यापारी
मार्ग बंद रहने के दौरान कारोबार बुरी तरह से प्रभावित रहा। रोजी रोटी पर संकट आ गया है। घर का खर्चा चलाना मुश्किल हो गया। आज से मार्ग खुल गया है। अब राहत मिलने की उम्मीद जगी है।
किशन सिंह बिष्ट, क्वारब
क्वारब पर वाहनों की आवाजाही से ही कारोबार चलता है। वाहनों का संचालन बंद रहने से स्थानीय व्यापारियों को नुकसान झेलना पड़ा है। मार्ग खुलने से कारोबार पटरी पर आएगा।
आनंद सिंह, क्वारब
क्वारब बंद रहने के कारण होटल में खाने की बिक्री पर असर पड़ा। जो खाना बनता था वह ग्राहक न आने से शाम तक वैसे ही रहता है। आज ग्राहकों के आने से खाना खत्म हो चुका है। उम्मीद है कि राहत मिलेगी।
सुरेंद्र लटवाल, क्वारब
क्वारब पर दरकती पहाड़ी से स्थानीय जन जीवन बुरी तरह से प्रभावित है। मार्ग बंद होने से सबसे अधिक असर स्थानीय व्यापारियों पर पड़ा। ग्राहक न आने से रोजी-रोटी बंद रही। इससे दिक्कतें हुई।
लछम सिंह लटवाल, क्वारब
कई दिनों बाद चाय की बिक्री हुई। मार्ग बंद होने से ग्राहकों के इंतजार में ही पूरा दिन बीत जाता था। काफी नुकसान झेलना पड़ा। अब मार्ग खुल गया है। आगे भी खुला रहे प्रशासन को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए।
पूरन सिंह लटवाल, क्वारब
मलबे से क्वारब के समीप बह रही सुयाल नदी का पानी हुआ मटमैला
अल्मोड़ा। क्वारब के समीप बहने वाली सुयाल नदी मलबे से पट गई है। मलबा गिरने से नदी का पानी मटमैला हो गया है। क्वारब पर दरकती पहाड़ी के समीप सुयाल नदी बहती है। यह नदी अल्मोड़ा और नैनीताल जिलों के बीच एक प्राकृतिक सीमा का काम करती है। यह नदी अल्मोड़ा नगर के जलागम क्षेत्र का प्रमुख हिस्सा है। क्योंकि यह आगे चलकर कोसी नदी में मिल जाती है।
क्वारब पर पहाड़ से गिर रहा मलबा और बोल्डर सुयाल नदी में समाहित हो रहे हैं। इससे नदी मलबा से पट रही है। मलबे की मिट्टी गिरने से नदी का पानी मटमैला हो गया है। पैदल चलने वाले लोग नदी के रास्ते भी आवाजाही करते हैं। मलबा गिरने से उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पहाड़ी से लगातार हो रहे भूस्खलन और नदी के कटाव के कारण सुयाल नदी पर बने पुल की नींव और सुरक्षा दीवारों को भी खतरा बना हुआ है।