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फिर साबित हुई बोर्ड परीक्षकों की लापरवाही
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
Updated Fri, 29 Apr 2016 11:15 PM IST
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उत्तराखंड बोर्ड के परीक्षकों की लापरवाही का खामियाजा मेधावी छात्र-छात्राओं को हर साल भुगतना पड़ रहा है। न्यायालय के आदेश पर विद्यांचल कालोनी मकीड़ी निवासी विवेकानंद इंटर कालेज अल्मोड़ा के इंटरमीडिएट के मेधावी छात्र नीलेश बिष्ट की उत्तर पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन किया गया।
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दोबारा कापी जांचने पर अंग्रेजी में चार और गणित में तीन अंक अधिक मिले हैं। पहले वह 451 अंक पाकर बोर्ड मेरिट सूची में 17 वें स्थान पर थे। अब सात अंक बढ़कर कुल 458 अंक हो गए हैं। इस हिसाब से उनका मेरिट में दसवां स्थान बन गया है।
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नीलेश बिष्ट को इंटरमीडिएट परीक्षा 2015 में 500 में से 451 अंक मिले। जबकि उन्हें अधिक अंक पाने की आशा थी। नीलेश ने उत्तर पुस्तिकाओं की छाया प्रति मंगवाई और पाया की मूल्यांकन में लापरवाही बरती गई है। उन्होंने उत्तराखंड बोर्ड को कई पत्र लिखे, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। इसके बाद उन्होंने नैनीताल उच्च न्यायालय में गुहार लगाई। न्यायालय के आदेश पर बोर्ड कार्यालय ने नीलेश की कापियां पुन: जांचने के आदेश दिए।
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दोबारा की गई जांच में नीलेश के अंग्रेजी विषय में 77 अंक से बढ़कर 81 अंक हो गए हैं। गणित विषय में भी तीन अंक अधिक मिले हैं। गणित में अब उनके नंबर 96 अंक से बढ़कर 99 हो गए हैं। जबकि हिंदी में उनके 89, भौतिकी में 96, रसायन में 93 अंक हैं। उनको पहले मिले कुल 451 अंक अब बढ़कर 458 हो गए हैं। इस आधार पर उनकी उत्तराखंड बोर्ड मेरिट सूची में 17 वें स्थान से दसवां स्थान बन गया है। नीलेश की माता रमा बिष्ट मकेड़ी में आंगनबाड़ी कार्यकत्री हैं। नीलेश वर्तमान में रामजस कालेज दिल्ली से केमेस्ट्री आनर्स कर रहे हैं। उनका कहना है कि शिक्षकों को मूल्यांकन में लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। पूर्णतया पारदर्शी मूल्यांकन करें, ताकि किसी विद्यार्थी का भविष्य बरबाद नहीं हो।