{"_id":"5820b94c4f1c1bf77eb38166","slug":"being-put-at-risk-studies","type":"story","status":"publish","title_hn":"जान जोखिम में डाल हो रही पढ़ाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जान जोखिम में डाल हो रही पढ़ाई
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
Updated Mon, 07 Nov 2016 10:56 PM IST
विज्ञापन
खस्ता हाल में सलोनी का प्राथनिक विद्यालय।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सरकारी शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने के तमाम दावे तो किए जा रहे हैं, लेकिन लंबे समय से आपदा में क्षतिग्रस्त विद्यालयों की सुध नहीं ली जा रही है। ताड़ीखेत ब्लॉक में कई विद्यालय ध्वस्त होने की कगार पर पहुंच चुके हैं, इन विद्यालयों में बच्चे जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने को विवश हैं। सुदूरवर्ती प्राथमिक विद्यालय सलोनी की हालत भी कुछ ऐसी ही है। छह साल पूर्व की आपदा में यह विद्यालय क्षतिग्रस्त हो गया था।
विज्ञापन
मालूम हो कि 2010 के बाद अलग-अलग वर्षों में आई आपदा में ताड़ीखेत विकासखंड में छह से अधिक विद्यालय क्षतिग्रस्त हो गए थे, लेकिन छह साल बीतने के बाद भी इनकी सुध नहीं ली गई है। किसी विद्यालय की दीवारें दरक रही हैं, तो कहीं छत टपक रही है, बच्चे इन क्षतिग्रस्त विद्यालयों में पढ़ने को मजबूर हैं। एक तरफ सरकार राजकीय विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए तमाम प्रयासों के दावे कर रही है, दूसरी तरफ आपदा में क्षतिग्रस्त विद्यालयों को ठीक नहीं किया जा रहा है।
विज्ञापन
सुदूरवर्ती सलोनी गांव स्थित प्राचीन प्राथमिक विद्यालय भी इसी हालत में है। विद्यालय की दीवारों में दरारें पड़ चुकी हैं, किसी भी समय इसके ध्वस्त होने की आशंका बनी हुई है। वर्तमान में यहां 23 बच्चे अध्ययनरत हैं। प्रधान नरेंद्र सिंह ने बताया कि छह सालों से विद्यालय का सुधारीकरण नहीं हुआ था, अब उन्होंने इस मसले को जिला प्लान से स्वीकृत करा दिया है। नशा हटाओ, पलायन रोको पद यात्रा के संयोजक डा. प्रमोद नैनवाल ने बताया कि पहाड़ के अधिकांश विद्यालयों की हालत खराब है, सरकार को इन प्राचीन विद्यालयों की सुध लेकर इन्हें ठीक करना चाहिए।
विज्ञापन