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Almora News: पाटिया में हुई बग्वाल, रणबांकुरों ने की पत्थरों की बौछार
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अल्मोड़ा। गोवर्धन पूजा पर ताकुला ब्लॉक के पाटिया में बग्वाल (पाषाण युद्ध) खेला गया। दो खामों में बंटे रणबांकुरों ने एक दूसरे पर जमकर पत्थरों की बौछार की। एक घंटा चली बग्वाल में आठ रणबांकुरे चोटिल हुए। पाटिया और भटगांव का दल पहले पानी पीकर विजयी रहा।
गोवर्धन पूजा के मौके पर पाटिया क्षेत्र में बग्वाल खेलने की परंपरा सदियों पुरानी है। बुधवार को परंपरा के मुताबिक यहां पाषाण युद्ध खेला गया। दो दलों के बीच बग्वाल हुई। एक दल में पाटिया और भटगांव के रणबांकुरे थे तो दूसरे में कोट्यूड़ा और कसून के ग्रामीण थे।
ढोल नगाड़ों की गर्जना के बीच पाटिया के पचघटिया में गाय की पूजा के साथ पाषाण युद्ध का आगाज हुआ। पाटिया दल के रणबांकुरों के पत्थर मारने के बाद बग्वाल शुरू हुई। बग्वाल के घोष के बाद दोनों खामों (दलों) के योद्धा पचघटिया नदी के आरपार एकत्र हुए। इसके बाद पाषाण युद्ध हुआ। दोनों तरफ से रणबाकुंरों ने एक दूसरे पर पत्थरों की बौछार की। करीब एक घंटे तक चली बग्वाल में आठ रणबांकुरे चोटिल हुए।
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पाटिया के वन पंचायत सरपंच देेवेंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि पाटिया दल के कुलदीप पिलख्वाल के सबसे पहले पानी पीने के साथ ही दल विजयी रहा। रणबांकुरों के नदी तक पहुंचने और पानी पीने के बाद पत्थर युद्ध की समाप्ति की घोषणा की गई।
गले मिलकर ली विदाई
युद्ध समाप्ति की घोषणा के बाद चारों खामों के रणबांकुरे एक दूसरे के गले मिले। बग्वाल में अगले साल फिर से मिलने का वादा कर अपने-अपने घरों को विदा हुए।
रणबांकुरों को करना पड़ता है नियमों का पालन
पाटिया के वन पंचायत सरपंच देवेंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि बग्वाल खेलने वाले रणबांकुरों को नियमों का पालन करना पड़ता है। सच्चे मन से बग्वाल खेलने पर रणबांकुरों की मनोकामना भी पूरी होती है। बग्वाल में चोटिल होना शुभ माना जाता है।
प्रवासी भी बने पाषाण युद्ध के साथी
आसमान में बरसते पत्थरों को देखकर प्रवासी भी खुद को नहीं रोक पाए। उत्साह में आकर कई प्रवासियों ने भी बग्वाल खेली। कई प्रवासी बच्चों ने पहली बार पाषाण युद्ध देखा तो वे रोमांचित हो उठे।
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बच्चों से लेकर बूढ़ों तक में दिखा उत्साह
बग्वाल देखने के लिए बसौली, ताकुला, खड़ाऊ, चुराड़ी, पाटिया, भटगांव, कोट्यूड़ा, कसून,भेटुली, जाखसौड़ा, मैचोर, पिल्खा समेत कई गांवों से काफी संख्या में लोग पहुंचे थे। बग्वाल को लेकर बच्चों से लेकर बूढ़ों तक में उत्साह दिखाई दिया। कई लोगों ने पाषाण युद्ध को मोबाइल में कैद किया। लोगों में पत्थर युद्ध की फोटो और वीडियो बनाने की होड़ रही। जिसको जहां जगह मिली वहीं से वीडियो बनाने लगा।
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गोवर्धन पूजा के मौके पर पाटिया क्षेत्र में बग्वाल खेलने की परंपरा सदियों पुरानी है। बुधवार को परंपरा के मुताबिक यहां पाषाण युद्ध खेला गया। दो दलों के बीच बग्वाल हुई। एक दल में पाटिया और भटगांव के रणबांकुरे थे तो दूसरे में कोट्यूड़ा और कसून के ग्रामीण थे।
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ढोल नगाड़ों की गर्जना के बीच पाटिया के पचघटिया में गाय की पूजा के साथ पाषाण युद्ध का आगाज हुआ। पाटिया दल के रणबांकुरों के पत्थर मारने के बाद बग्वाल शुरू हुई। बग्वाल के घोष के बाद दोनों खामों (दलों) के योद्धा पचघटिया नदी के आरपार एकत्र हुए। इसके बाद पाषाण युद्ध हुआ। दोनों तरफ से रणबाकुंरों ने एक दूसरे पर पत्थरों की बौछार की। करीब एक घंटे तक चली बग्वाल में आठ रणबांकुरे चोटिल हुए।
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पाटिया के वन पंचायत सरपंच देेवेंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि पाटिया दल के कुलदीप पिलख्वाल के सबसे पहले पानी पीने के साथ ही दल विजयी रहा। रणबांकुरों के नदी तक पहुंचने और पानी पीने के बाद पत्थर युद्ध की समाप्ति की घोषणा की गई।
गले मिलकर ली विदाई
युद्ध समाप्ति की घोषणा के बाद चारों खामों के रणबांकुरे एक दूसरे के गले मिले। बग्वाल में अगले साल फिर से मिलने का वादा कर अपने-अपने घरों को विदा हुए।
रणबांकुरों को करना पड़ता है नियमों का पालन
पाटिया के वन पंचायत सरपंच देवेंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि बग्वाल खेलने वाले रणबांकुरों को नियमों का पालन करना पड़ता है। सच्चे मन से बग्वाल खेलने पर रणबांकुरों की मनोकामना भी पूरी होती है। बग्वाल में चोटिल होना शुभ माना जाता है।
प्रवासी भी बने पाषाण युद्ध के साथी
आसमान में बरसते पत्थरों को देखकर प्रवासी भी खुद को नहीं रोक पाए। उत्साह में आकर कई प्रवासियों ने भी बग्वाल खेली। कई प्रवासी बच्चों ने पहली बार पाषाण युद्ध देखा तो वे रोमांचित हो उठे।
बच्चों से लेकर बूढ़ों तक में दिखा उत्साह
बग्वाल देखने के लिए बसौली, ताकुला, खड़ाऊ, चुराड़ी, पाटिया, भटगांव, कोट्यूड़ा, कसून,भेटुली, जाखसौड़ा, मैचोर, पिल्खा समेत कई गांवों से काफी संख्या में लोग पहुंचे थे। बग्वाल को लेकर बच्चों से लेकर बूढ़ों तक में उत्साह दिखाई दिया। कई लोगों ने पाषाण युद्ध को मोबाइल में कैद किया। लोगों में पत्थर युद्ध की फोटो और वीडियो बनाने की होड़ रही। जिसको जहां जगह मिली वहीं से वीडियो बनाने लगा।