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स्पष्ट दिशा निर्देश नहीं होने से कोविड ड्यूटी पर लगे आयुष चिकित्सक परेशान
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ीएम को ज्ञापन सौंपते आयुष चिकित्सक। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : RANIKHET
राजकीय आयुर्वेदिक यूनानी चिकित्सा सेवा संघ ने डीएम को ज्ञापन सौंपकर आयुष चिकित्सकों को भी स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की भंति बीमा की सुविधा देने और ड्यूटी के दौरान स्पष्ट निर्देशों के बारे में जानकारी देने की मांग उठाई है। संघ का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर वे लोग भी पूरी निष्ठा से कोविड कार्यों में जुटे हुए हैं लेकिन कोविड केंद्रों में तैनात आयुष चिकित्सकों के ऐलोपैथिक दवा लिखने पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। कहा कि यह भी स्पष्ट नहीं बताया जा रहा है कि उन्हें एंटीबायोटिक्स और एंटीवायरल दवा लिखने का अधिकार है या नहीं।
अध्यक्ष डॉ. अजीत तिवारी के नेतृत्व में डीएम नितिन सिंह भदौरिया को सौंपे ज्ञापन में कहा गया कि कोविड-19 की दूसरी लहर में भी आयुष विभाग स्वास्थ्य विभाग से संबद्ध होकर कार्य कर रहा है, लेकिन आयुष विभाग के चिकित्सक और कर्मचारियों को स्वास्थ्य विभाग जैसी बीमा की सुविधा का लाभ नहीं मिलता। ड्यूटी के दौरान क्वारंटीन की अवधि का भी पता नहीं है। सरकार ने ऐलोपैथिक दवा लिखने के लिए आयुष चिकित्सकों पर प्रतिबंध लगाया हुआ है।
कोविड केंद्रों में तैनात आयुष चिकित्सक संशय में हैं कि उन्हें एंटीबायोटिक्स और एंटीवायरल लिखने का अधिकार है या नहीं। उपचार नहीं लिखने अथवा उचित उपचार के अभाव में कोई बड़ी घटना हुई तो इसका जिम्मेदार कौन होगा। डीएम ने सभी मुद्दों पर सार्थक कार्रवाई का आश्वासन दिया। ज्ञापन देने वालों में डॉ. श्रुति अग्रवाल, डॉ. रत्ना त्रिपाठी, डॉ. सुखदेव बोनाल आदि थे। यह भी मांग उठाई कि संविदा विस्तार के बगैर ही कई आयुष चिकित्सकों को भी कोरोना ड्यूटी में लगा दिया गया है। आयुष चिकित्सकों कर्मचारियों को लेकर त्वरित स्पष्ट शासनादेश जारी करने की मांग उठाई।
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अध्यक्ष डॉ. अजीत तिवारी के नेतृत्व में डीएम नितिन सिंह भदौरिया को सौंपे ज्ञापन में कहा गया कि कोविड-19 की दूसरी लहर में भी आयुष विभाग स्वास्थ्य विभाग से संबद्ध होकर कार्य कर रहा है, लेकिन आयुष विभाग के चिकित्सक और कर्मचारियों को स्वास्थ्य विभाग जैसी बीमा की सुविधा का लाभ नहीं मिलता। ड्यूटी के दौरान क्वारंटीन की अवधि का भी पता नहीं है। सरकार ने ऐलोपैथिक दवा लिखने के लिए आयुष चिकित्सकों पर प्रतिबंध लगाया हुआ है।
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कोविड केंद्रों में तैनात आयुष चिकित्सक संशय में हैं कि उन्हें एंटीबायोटिक्स और एंटीवायरल लिखने का अधिकार है या नहीं। उपचार नहीं लिखने अथवा उचित उपचार के अभाव में कोई बड़ी घटना हुई तो इसका जिम्मेदार कौन होगा। डीएम ने सभी मुद्दों पर सार्थक कार्रवाई का आश्वासन दिया। ज्ञापन देने वालों में डॉ. श्रुति अग्रवाल, डॉ. रत्ना त्रिपाठी, डॉ. सुखदेव बोनाल आदि थे। यह भी मांग उठाई कि संविदा विस्तार के बगैर ही कई आयुष चिकित्सकों को भी कोरोना ड्यूटी में लगा दिया गया है। आयुष चिकित्सकों कर्मचारियों को लेकर त्वरित स्पष्ट शासनादेश जारी करने की मांग उठाई।
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