{"_id":"5fc12e868ebc3e9b8d708cf1","slug":"ayurvedic-hospital-system-should-be-improved-almora-news-hld4054059175","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिले में किराये के भवनों में संचालित हो रहे हैं 24 आयुर्वेदिक अस्पताल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिले में किराये के भवनों में संचालित हो रहे हैं 24 आयुर्वेदिक अस्पताल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अल्मोड़ा। जिले में 24 राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल किराये के भवनों में संचालित हो रहे हैं। जिला मुख्यालय के अस्पताल के पास भी अपना भवन नहीं है। किराये के भवनों में चल रहे कई आयुर्वेदिक अस्पतालों के भवन बेहद जर्जर हैं। सीलन के कारण दवाओं के खराब होने का खतरा रहता है।
उत्तराखंड राज्य बनने के 20 साल बाद भी जिले में आयुर्वेदिक चिकित्सा व्यवस्था पटरी पर नहीं आ सकी। जिले में कुल 50 आयुर्वेदिक अस्पताल हैं। इनमें से 24 अस्पतालों के पास अपने भवन नहीं हैं। राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल नगर (अल्मोड़ा) लोअर माल रोड खोल्टा में किराये के भवन में संचालित हो रहा है। जिला मुख्यालय में इस कार्यालय को संचालित करने के लिए सरकारी भवन नहीं मिल पाया। सैंणमानुर, बकस्वाड़, बानठौक, सौनी, जीनापानी, स्यूनराकोट, काकड़ीघाट, मनुली, नगचूलाखाल, चमड़खान, दोड़म, मेरगांव, हउली, भगौती, सल्पड़, तलाड़ताल, देवलीखेत, झुपुलचौड़ा, धारखोला, डीनापानी, तोली, जिंगोली, बसई अगासपुर, मनान अस्पताल लंबे समय से किराये के भवनों में संचालित हैं। बसंतपुर और टाना में अस्पताल मुफ्त के भवनों में संचालित हैं। दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में किराये के भवनों में चलने वाले कई आयुर्वेदिक अस्पतालों के भवनों की हालत बेहद जर्जर हो गई है। कई भवनों की छत जीर्णशीर्ण है। बारिश होने पर इन भवनों के छत से पानी टपक कर अंदर आ जाता है। इससे जहां सरकारी दस्तावेज खराब होने का खतरा रहता है वहीं कर्मचारियों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। साथ ही सीलन के कारण दवाओं के खराब होने का खतरा रहता है। इधर क्वैरला और चितौड़खाल में आयुर्वेदिक अस्पतालों के भवन बन गए हैं। चमड़खान में आयुर्वेदिक अस्पताल भवन के लिए लिए 15.88 लाख रुपये का बजट मंजूर हो गया है। धारखोला, टाना में भी अस्पताल के भवनों की कार्रवाई चल रही है।
वर्तमान में 24 अस्पतालों के पास अपने भवन हैं, जबकि अन्य अस्पताल किराये के भवनों में ही संचालित हो रहे हैं। इन अस्पतालों के भवनों के निर्माण के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है हालांकि फिलहाल बजट नहीं मिला है। बजट मिलने पर भवन निर्माण के लिए कार्रवाई की जाएगी। चितौड़खाल, क्वैरला में अस्पतालों के भवन बनकर तैयार हैं।
विज्ञापन
- डॉ. केएस नपलच्याल, जिला आयुर्वेदिक और यूनानी अधिकारी अल्मोड़ा
विज्ञापन
उत्तराखंड राज्य बनने के 20 साल बाद भी जिले में आयुर्वेदिक चिकित्सा व्यवस्था पटरी पर नहीं आ सकी। जिले में कुल 50 आयुर्वेदिक अस्पताल हैं। इनमें से 24 अस्पतालों के पास अपने भवन नहीं हैं। राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल नगर (अल्मोड़ा) लोअर माल रोड खोल्टा में किराये के भवन में संचालित हो रहा है। जिला मुख्यालय में इस कार्यालय को संचालित करने के लिए सरकारी भवन नहीं मिल पाया। सैंणमानुर, बकस्वाड़, बानठौक, सौनी, जीनापानी, स्यूनराकोट, काकड़ीघाट, मनुली, नगचूलाखाल, चमड़खान, दोड़म, मेरगांव, हउली, भगौती, सल्पड़, तलाड़ताल, देवलीखेत, झुपुलचौड़ा, धारखोला, डीनापानी, तोली, जिंगोली, बसई अगासपुर, मनान अस्पताल लंबे समय से किराये के भवनों में संचालित हैं। बसंतपुर और टाना में अस्पताल मुफ्त के भवनों में संचालित हैं। दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में किराये के भवनों में चलने वाले कई आयुर्वेदिक अस्पतालों के भवनों की हालत बेहद जर्जर हो गई है। कई भवनों की छत जीर्णशीर्ण है। बारिश होने पर इन भवनों के छत से पानी टपक कर अंदर आ जाता है। इससे जहां सरकारी दस्तावेज खराब होने का खतरा रहता है वहीं कर्मचारियों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। साथ ही सीलन के कारण दवाओं के खराब होने का खतरा रहता है। इधर क्वैरला और चितौड़खाल में आयुर्वेदिक अस्पतालों के भवन बन गए हैं। चमड़खान में आयुर्वेदिक अस्पताल भवन के लिए लिए 15.88 लाख रुपये का बजट मंजूर हो गया है। धारखोला, टाना में भी अस्पताल के भवनों की कार्रवाई चल रही है।
विज्ञापन
वर्तमान में 24 अस्पतालों के पास अपने भवन हैं, जबकि अन्य अस्पताल किराये के भवनों में ही संचालित हो रहे हैं। इन अस्पतालों के भवनों के निर्माण के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है हालांकि फिलहाल बजट नहीं मिला है। बजट मिलने पर भवन निर्माण के लिए कार्रवाई की जाएगी। चितौड़खाल, क्वैरला में अस्पतालों के भवन बनकर तैयार हैं।
विज्ञापन
- डॉ. केएस नपलच्याल, जिला आयुर्वेदिक और यूनानी अधिकारी अल्मोड़ा