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एथलीट गरिमा को मिला शान-ए-हिंद राष्ट्रीय पुरस्कार
Tue, 01 Jan 2019 11:27 PM IST
Almora desk
अमर उजाला ब्यूरो रानीखेत (अल्मोड़ा)।
अमर उजाला ब्यूरो रानीखेत (अल्मोड़ा)।
Published by: Almora desk
Updated Tue, 01 Jan 2019 11:27 PM IST
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दिल्ली में शान-ए-हिंद पुरस्कार से नवाजते केंद्रीय मंत्री।
- फोटो : अमर उजाला
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जज्बा हो तो कोई भी परेशानी आड़े नहीं आती। इसी बता को साबित कर दिखा रही हैं उत्तराखंड की घायल एथलीट गरिमा जोशी। बंगलूरू में वाहन की टक्कर से व्हील चेयर में बैठने को मजबूर गरिमा व्हील चेयर मैराथन दौड़ में भी अव्वल स्थान प्राप्त किया। इसीलिए उन्हें गत दिनों दिल्ली में शान-ए-हिंद राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया है। यह पुरस्कार उन्हें केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले और शहीद चंद्रशेखर आजाद के भतीजे पं. सुरजीत आजाद ने प्रदान किया।
मालूम हो कि यहां चिलियानौला निवासी पूरन चंद्र जोशी की छोटी पुत्री गरिमा जोशी खेलों के क्षेत्र में बचपन से ही अग्रणी रही हैं। दौड़ में रुचि होने के कारण उन्होंने वही रास्ता चुना। बीते वर्ष मई में उनका चयन बंगलूरू में टीसीएस वर्ल्ड 10 की अंतरराष्ट्रीय मैराथन दौड़ के लिए हुआ, वहां वह भारत की तरफ से टॉप 6 स्थान पर रहीं, लेकिन 30 मई को अभ्यास के दौरान अज्ञात वाहन उन्हें टक्कर मारकर बुरी तरह से घायल कर गया। घटना में उनकी रीढ़ की हड्डियां टूट गईं, उनके पांव अभी तक कार्य नहीं कर रहे हैं।
वर्तमान में उनका दिल्ली स्थित इंडियन स्पाइनल इंजरी सेंटर में उपचार चल रहा है। वह व्हील चेयर के सहारे हैं, लेकिन खेल के प्रति उनका जज्बा बरकरार है। दिल्ली में तीन बार व्हील मैराथन दौड़ भी वह जीत चुकी हैं। पिता पूरन जोशी ने बताया कि इसी जज्बे को देखते हुए उन्हें अब राष्ट्रीय पुरस्कार शान-ए-हिंद पुरस्कार से नवाजा गया है। पिता पूरन जोशी ने बताया माता आशा जोशी भी कैंसर रोग से जूझ रही हैं। उनका सफदरजंग में अस्पताल में उपचार चल रहा है।
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मालूम हो कि यहां चिलियानौला निवासी पूरन चंद्र जोशी की छोटी पुत्री गरिमा जोशी खेलों के क्षेत्र में बचपन से ही अग्रणी रही हैं। दौड़ में रुचि होने के कारण उन्होंने वही रास्ता चुना। बीते वर्ष मई में उनका चयन बंगलूरू में टीसीएस वर्ल्ड 10 की अंतरराष्ट्रीय मैराथन दौड़ के लिए हुआ, वहां वह भारत की तरफ से टॉप 6 स्थान पर रहीं, लेकिन 30 मई को अभ्यास के दौरान अज्ञात वाहन उन्हें टक्कर मारकर बुरी तरह से घायल कर गया। घटना में उनकी रीढ़ की हड्डियां टूट गईं, उनके पांव अभी तक कार्य नहीं कर रहे हैं।
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वर्तमान में उनका दिल्ली स्थित इंडियन स्पाइनल इंजरी सेंटर में उपचार चल रहा है। वह व्हील चेयर के सहारे हैं, लेकिन खेल के प्रति उनका जज्बा बरकरार है। दिल्ली में तीन बार व्हील मैराथन दौड़ भी वह जीत चुकी हैं। पिता पूरन जोशी ने बताया कि इसी जज्बे को देखते हुए उन्हें अब राष्ट्रीय पुरस्कार शान-ए-हिंद पुरस्कार से नवाजा गया है। पिता पूरन जोशी ने बताया माता आशा जोशी भी कैंसर रोग से जूझ रही हैं। उनका सफदरजंग में अस्पताल में उपचार चल रहा है।
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